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अपनी गर्दन बचाने के लिए अमर उजाला के संपादक ने ले ली रिपोर्टर की बलि

अमर उजाला अक्‍सर अपने पत्रकारों के पक्ष में खड़ा होने के चलते अन्‍य अखबारों से अलग पहचान रखता है, परन्‍तु जम्‍मू एडिशन में जिस तरह एक पुराने पत्रकार के साथ रवैया अपनाया गया है, उससे अमर उजाला के साख पर बट्टा लगा है. खबर है कि जम्‍मू एडिशन से संबद्ध लखनपुर के रिपोर्टर अनिल शर्मा अमर उजाला से पिछले बारह सालों से जुड़े हुए हैं. अनिल ने लखनपुर के स्‍थानीय ट्रांसपोर्टरों के गोरखधंधे के खिलाफ एक खबर लिखी.

अमर उजाला अक्‍सर अपने पत्रकारों के पक्ष में खड़ा होने के चलते अन्‍य अखबारों से अलग पहचान रखता है, परन्‍तु जम्‍मू एडिशन में जिस तरह एक पुराने पत्रकार के साथ रवैया अपनाया गया है, उससे अमर उजाला के साख पर बट्टा लगा है. खबर है कि जम्‍मू एडिशन से संबद्ध लखनपुर के रिपोर्टर अनिल शर्मा अमर उजाला से पिछले बारह सालों से जुड़े हुए हैं. अनिल ने लखनपुर के स्‍थानीय ट्रांसपोर्टरों के गोरखधंधे के खिलाफ एक खबर लिखी.

इस खबर को अमर उजाला ने अपने 22 नवम्‍बर के अंक में प्रकाशित भी किया. इस खबर के बाद से बौखलाए ट्रांसपोर्टर अमर उजाला, जम्‍मू कार्यालय पहुंचे तथा संपादक से अनिल शर्मा को हटाने की बात की. संपादक ने ट्रांसपोर्टरों से इस संदर्भ में कदम उठाने का आश्‍वासन दिया. इसी बीच ट्रांसपोर्टरों ने अनिल शर्मा तथा अमर उजाला के खिलाफ आठ केस कर दिए. इसके बाद संपादक ने ट्रांसपोर्टरों को बुलाकर अमर उजाला के केस वापस लेने की बात की तथा ट्रांसपोर्टरों की मांग के अनुरूप अनिल शर्मा को हटाने की बात भी कही. इसके बाद अनिल शर्मा को अमर उजाला से हटाए जाने का फरमान संपादक ने जारी कर दिया.

संपादक द्वारा अनिल शर्मा को हटाए जाने के बाद ट्रांसपोर्टरों ने अमर उजाला के खिलाफ की गई अपनी रिपोर्ट वापस ले ली, पर अनिल शर्मा के खिलाफ वे अब भी केस डाले हुए हैं. अनिल शर्मा पूरी तरह से अलग-थलग पड़ गए हैं, जबकि उनकी गिनती अमर उजाला के तेजतर्रार तथा ईमानदार रिपोर्टरों में की जाती थी. सूत्रों ने बताया कि कश्‍मीर में धारा 370 लागू है, जिसके चलते यहां कोई बाहर का व्‍यक्ति जमीन नहीं खरीद सकता है. अमर उजाला ने यहां पर किसी स्‍थानीय व्‍यक्ति के नाम से जमीन लेकर यूनिट बनाया हुआ है, जिसके चलते अमर उजाला पचड़े में नहीं फंसना चाहता था. साथ ही वह स्‍थानीय व्‍यक्ति भी कोर्ट कचहरी के चक्‍कर में नहीं पड़ना चाहता था, जिसके चलते अनिल शर्मा को बलि चढ़ा दिया गया.

इस संदर्भ में जब अनिल शर्मा से बात की गई तो उन्‍होंने अमर उजाला से हटाए जाने तथा अकेले केस लड़ने की पुष्टि की. उन्‍होंने यह भी बताया कि इस खबर के पक्ष में सारे साक्ष्‍य उनके पास मौजूद हैं. उसके बाद भी उन्‍हें हटा दिया गया. जब अनिल शर्मा को हटाए जाने के बारे में संपादक रविंदर श्रीवास्‍तव से बात की गई तो उन्‍होंने कहा कि ये इंटर्नल बातें हैं इसको सबके साथ शेयर नहीं किया जा सकता है. उन्‍होंने सच्‍चाई भी उसी से जानने को कहा जिसने यह खबर दी है. वैसे भी अमर उजाला का रिकार्ड रहा है कि कई मौकों पर वह अपने रिपोर्टरों के साथ खड़ा रहा है. हाल ही में गोरखपुर यूनिट में दो ऐसी घटनाएं हुई फिर संपादक तथा अखबार अपने रिपोर्टरों के पक्ष में खड़ा रहे, पर जम्‍मू यूनिट ने अपने ही बनाए मानक को तोड़ दिया है.

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