मेरठ से जल्‍द लांच होगा अमर उजाला का ‘माई सिटी’

अमर उजाला, मेरठ में अब अपनी पकड़ और मजबूत करने की तैयारी कर रहा है. इसकी जिम्‍मेदारी संपादक राजीव सिंह को सौंपी गई है. मेरठ यूनिट के साथ अमर उजाला का भावनात्‍मक रिश्‍ता है. अखबार के निदेशक रहे अतुल माहेश्‍वरी कभी इस यूनिट की जिम्‍मेदारी संभाला करते थे. इसलिए यहां पर अखबार को अन्‍य अखबारों को कड़ा टक्‍कर देने के लिए 'माई सिटी' लांच करने की तैयारी की जा रही है. फिलहाल माई सिटी लखनऊ एवं कानपुर से प्रकाशित हो रहा है.

बताया जा रहा है कि संपादक राजीव सिंह मेरठ के प्रोफाइल एवं विकास को ध्‍यान में रखते हुए माई सिटी के तेवर को तय करने में जुटे हुए हैं. संभावना है कि इसी टीम को रीआर्गेनाइज किया जाएगा. इसका टेस्‍ट बिल्‍कुल पश्चिमी यूपी की सोच और सरोकार से जुड़ा होगा. सूत्रों का कहना है कि फिलहाल प्रबंधन ने अभी इसको लांच किए जाने की तिथि तय नहीं की है, लेकिन जल्‍द ही इसके प्रकाशन की तैयारियां शुरू की जा चुकी हैं.  

पिछले कुछ वर्षों में मेरठ में अमर उजाला का सर्कुलेशन प्रभावित हुआ है. अब लोगों को अमर उजाला के साथ मानसिक तौर कनेक्‍ट करने के लिए ही राजीव सिंह माई सिटी लांच करने की योजना बना रहे हैं. अमर उजाला अपने कई यूनिटों से माई सिटी का प्रकाशन कर रहा है. कानपुर जैसे शहरों में माई सिटी को बेहतर रिस्‍पांस भी मिला रहा है. हालांकि लखनऊ में माई सिटी लोगों को बहुत प्रभावित करने में सफल नहीं रहा है. 

अवनीश ने अमर उजाला एवं आशुतोष ने दैनिक जागरण ज्‍वाइन किया

शाहजहांपुर से खबर है कि स्‍वतंत्र भारत में कार्यरत अवनीश मिश्रा ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे क्राइम रिपोर्टर थे तथा तीन सालों से अखबार के साथ जुड़े हुए थे. अवनीश ने अपनी नई पारी शाहजहांपुर में ही अमर उजाला के साथ शुरू की है. उन्‍हें यहां भी रिपोर्टर बनाया गया है. अवनीश ने अपने करियर की शुरुआत दस वर्ष पहले स्‍वतंत्र भारत, खुटार से की थी. इसके बाद से राष्‍ट्रीय सहारा, शाहजहांपुर से जुड़ गए. वहां से इस्‍तीफा देने के बाद वापस स्‍वतंत्र भारत से जुड़ गए थे.

स्‍वतंत्र भारत, शाहजहांपुर से आशुतोष मिश्रा ने इस्‍तीफा इस्‍तीफा दे‍ दिया है. वे फोटोग्राफर के रूप में कार्यरत थे. आशुतोष ने शाहजहांपुर में ही दैनिक जागरण का दामन थाम लिया है. आशुतोष की गिनती अच्‍छे प्रेस फोटोग्राफरों में की जाती है.

अमर उजाला, बरेली से जेपी शर्मा का इस्‍तीफा, विपुलराज की जिम्‍मेदारी बदली

अमर उजाला, बरेली से खबर है कि जेपी शर्मा ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत थे तथा डेस्‍क इंचार्ज की जिम्‍मेदारी संभाल रहे थे. जेपी शर्मा का कुछ समय पहले ही चंडीगढ़ से बरेली के लिए तबादला किया गया था. बीच में वे बीमार पड़ गए थे, जिसके बाद वे छुट्टी पर चल रहे थे. जेपी अपनी नई पारी कहां से शुरू करने वाले हैं इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है.

बरेली से ही दूसरी खबर है कि अमर उजाला के डाक में तैनात सब एडिटर विपुलराज सिंह का तबादला काम्‍पैक्‍ट में कर दिया गया है. वे काफी समय से अमर उजाला से जुड़े हुए हैं. 

बगावत कर सकते हैं अमर उजाला, बनारस के पत्रकार!

अमर उजाला, बनारस यूनिट में इन दिनों कर्मचारियों में तनाव है. संपादक द्वारा छोटी-छोटी बातों पर अनुशासन की चाबुक चलाए जाने से कर्मचारी बगावत के मूड में हैं. सूत्रों का कहना है कि जिस तरह से मीटिंग में संपादक के सामने ऊंची आवाज में बातें हो रही हैं उससे किसी दिन अप्रिय घटना की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है. कारण बताया जा रहा है कि संपादक छोटी-छोटी बातों पर सजा देने के साथ कर्मचारियों को सार्वजनिक रूप से फटकारते रहते हैं.

अभी दो-तीन पहले मीटिंग में पांच से दस मिनट लेट आने वाले सिटी के तीन पत्रकारों की वीकली आफ संपादक ने निरस्‍त करवा दिया. अब बताया जा रहा है कि संपादक ने एररलेस अखबार निकालने की चेतावनी देते हुए कहा है कि जिससे भी गलती होगी उसे सजा भुगतना होगा. साथ ही ब्‍यूरो से आने वाली खबरों को रीराइट करके लगाने का फरमान भी जारी कर दिया गया है. खबर है कि पहले सब एडिटर और सीनियर सब एडिटर अपने पेज खुद तैयार करते थे, परन्‍तु संपादक के नए फरमान के बाद अब पेज पेजीनेटर तैयार करेंगे. इसके साथ ही ब्‍यूरो यानी जिलों से आने वाली खबरों को सब एडिटर रीराइट करके लगाएंगे.   

यहां काम करने वाले कर्मचारी परेशान है कि एक-एक उपसंपादक पर कई जिलों की जिम्‍मेदारी रहती है, इस स्थिति में वे कैसे सारी खबरों को रीराइट करके लगा पाएंगे. कुछ कर्मचारियों का कहना है कि वे गलत होने पर सजा पाने को तैयार हैं, परन्‍तु अच्‍छा करने पर प्रोत्‍साहन और पुरस्‍कार भी तो मिलना चाहिए. सिर्फ सजा से काम कैसे चलेगा. पर संपादक जी केवल सजा देने को तैयार हैं प्रोत्‍साहित करने को वो अपनी जिम्‍मेदारी नहीं मानते हैं. बताया जा रहा है कि पिछले दिनों सिटी की मीटिंग में पांच से दस मिनट देरी से पहुंचे कर्मचारियों की एक से लेकर तीन साप्‍ताहिक अवकाशों को खतम कर दिया गया. इतना ही नहीं संपादक छोटी-मोटी गलती होने पर कर्मचारियों की सैलरी भी कटवा रहे हैं.

सब मिलाकर अमर उजाला, बनारस में कर्मचारी तनाव के साथ काम कर रहे हैं. अच्‍छा करने के प्रयास में तथा दबाव में गलतियां भी ज्‍यादा हो रही हैं. तनाव-दबाव से आजिज कई लोग दूसरे संस्‍थानों में भी झांका-ताकी करने लगे हैं ताकि यहां से बाहर निकल सकें. ब्‍यूरो में भी कई लोगों को फोर्स लीव पर भेजे जाने की खबर है. वैसे भी ब्‍यूरो में किसी को एक दिन का साप्‍ताहिक अवकाश नहीं मिलता, इस स्थिति में एररलेस काम करना किसी के लिए भी मुश्किल है. वहीं चम्‍मचे टाइप लोग संपादक को चढ़ाकर अपना उल्‍लू से सीधा कर रहे हैं, परन्‍तु संस्‍थान तथा कर्मचारियों का इससे कहीं अधिक नुकसान हो रहा है. अपने पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए पहचाने जाने वाले अमर उजाला जैसे संस्‍थान में इस तरह की कार्रवाई निश्चित रूप से सोचनीय तथा चिंतनीय है.

बनारस में अमर उजाला के पत्रकार से लूट

बनारस के मंडुआडीह थाना क्षेत्र के चेतना नगर में बदमाशों ने गुरुवार की रात अमर उजाला के पत्रकार जनार्दन सिंह को असलहा सटाकर पांच हजार रुपये, एटीएम कार्ड, मोबाइल तथा कई अन्‍य सामान लूट लिया. विरोध करने पर पांच की संख्‍या में मौजूद बदमाशों ने जनार्दन को मारपीट कर घायल कर दिया और मौके से फरार हो गए. भुक्‍तभोगी पत्रकार ने अपने साथ हुई लूट की घटना की जानकारी पुलिस को दे दी है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.

हमेशा की तरह जनार्दन सिंह गुरुवार की रात भी करीब ग्यारह बजे चांदपुर स्थित अमर उजाला के दफ्तर से अपना काम खतम कर के घर के लिए निकले. रास्‍ते में उन्‍होंने एक एटीएम के पास रुककर पांच हजार रुपये निकाले. इसके बाद वे बाइक लेकर घर की तरफ चल पड़े. अभी वो कुछ दूर गए ही होंगे कि चेतना नगर के पास पांच युवकों ने उन्‍हें घेर लिया. अभी वे कुछ समझ पाते की बदमाशों ने असलहा निकाल लिया और धमकाकर जनार्दन से पैसे तथा मोबाइल छीनने लगे. पत्रकार ने जब इसका विरोध किया तो सभी मिलकर उन्‍हें पीटने लगे. पत्रकार ने मदद की गुहार भी लगाई. जनार्दन को घायल करने के बाद बदमाश उनके पास से पांच हजार रुपये नगदी, तीन अंगूठी, एटीएम कार्ड, मोबाइल लूट कर ले गए. घायलावस्‍था में पत्रकार घर पहुंचे. इसके बाद पुलिस को भी घटना की जानकारी दे दी गई. इस घटना से बनारस के पत्रकारों में काफी रोष है.

अपनी गर्दन बचाने के लिए अमर उजाला के संपादक ने ले ली रिपोर्टर की बलि

अमर उजाला अक्‍सर अपने पत्रकारों के पक्ष में खड़ा होने के चलते अन्‍य अखबारों से अलग पहचान रखता है, परन्‍तु जम्‍मू एडिशन में जिस तरह एक पुराने पत्रकार के साथ रवैया अपनाया गया है, उससे अमर उजाला के साख पर बट्टा लगा है. खबर है कि जम्‍मू एडिशन से संबद्ध लखनपुर के रिपोर्टर अनिल शर्मा अमर उजाला से पिछले बारह सालों से जुड़े हुए हैं. अनिल ने लखनपुर के स्‍थानीय ट्रांसपोर्टरों के गोरखधंधे के खिलाफ एक खबर लिखी.

इस खबर को अमर उजाला ने अपने 22 नवम्‍बर के अंक में प्रकाशित भी किया. इस खबर के बाद से बौखलाए ट्रांसपोर्टर अमर उजाला, जम्‍मू कार्यालय पहुंचे तथा संपादक से अनिल शर्मा को हटाने की बात की. संपादक ने ट्रांसपोर्टरों से इस संदर्भ में कदम उठाने का आश्‍वासन दिया. इसी बीच ट्रांसपोर्टरों ने अनिल शर्मा तथा अमर उजाला के खिलाफ आठ केस कर दिए. इसके बाद संपादक ने ट्रांसपोर्टरों को बुलाकर अमर उजाला के केस वापस लेने की बात की तथा ट्रांसपोर्टरों की मांग के अनुरूप अनिल शर्मा को हटाने की बात भी कही. इसके बाद अनिल शर्मा को अमर उजाला से हटाए जाने का फरमान संपादक ने जारी कर दिया.

संपादक द्वारा अनिल शर्मा को हटाए जाने के बाद ट्रांसपोर्टरों ने अमर उजाला के खिलाफ की गई अपनी रिपोर्ट वापस ले ली, पर अनिल शर्मा के खिलाफ वे अब भी केस डाले हुए हैं. अनिल शर्मा पूरी तरह से अलग-थलग पड़ गए हैं, जबकि उनकी गिनती अमर उजाला के तेजतर्रार तथा ईमानदार रिपोर्टरों में की जाती थी. सूत्रों ने बताया कि कश्‍मीर में धारा 370 लागू है, जिसके चलते यहां कोई बाहर का व्‍यक्ति जमीन नहीं खरीद सकता है. अमर उजाला ने यहां पर किसी स्‍थानीय व्‍यक्ति के नाम से जमीन लेकर यूनिट बनाया हुआ है, जिसके चलते अमर उजाला पचड़े में नहीं फंसना चाहता था. साथ ही वह स्‍थानीय व्‍यक्ति भी कोर्ट कचहरी के चक्‍कर में नहीं पड़ना चाहता था, जिसके चलते अनिल शर्मा को बलि चढ़ा दिया गया.

इस संदर्भ में जब अनिल शर्मा से बात की गई तो उन्‍होंने अमर उजाला से हटाए जाने तथा अकेले केस लड़ने की पुष्टि की. उन्‍होंने यह भी बताया कि इस खबर के पक्ष में सारे साक्ष्‍य उनके पास मौजूद हैं. उसके बाद भी उन्‍हें हटा दिया गया. जब अनिल शर्मा को हटाए जाने के बारे में संपादक रविंदर श्रीवास्‍तव से बात की गई तो उन्‍होंने कहा कि ये इंटर्नल बातें हैं इसको सबके साथ शेयर नहीं किया जा सकता है. उन्‍होंने सच्‍चाई भी उसी से जानने को कहा जिसने यह खबर दी है. वैसे भी अमर उजाला का रिकार्ड रहा है कि कई मौकों पर वह अपने रिपोर्टरों के साथ खड़ा रहा है. हाल ही में गोरखपुर यूनिट में दो ऐसी घटनाएं हुई फिर संपादक तथा अखबार अपने रिपोर्टरों के पक्ष में खड़ा रहे, पर जम्‍मू यूनिट ने अपने ही बनाए मानक को तोड़ दिया है.

अमर उजाला के प्रति लोगों में फूटा आक्रोश, नहीं उतरने दी प्रतियां

जालौन में एक गल्‍ला व्‍यापारी की पुत्री के अपहरण और बाद में उसकी हत्‍या के मामले में पुलिस के पक्ष में और भ्रामक खबर छापने पर जालौन के व्‍यापारी और क्षेत्रीय लोगों का गुस्‍सा अमर उजाला के खिलाफ फूट पड़ा. मंगलवार को लोगों ने जालौन नगर में अमर उजाला की प्रतियां उतरने ही नहीं दी. लोगों में इतना गुस्‍सा था कि उन्‍होंने अखबार के खिलाफ नारे भी लगाए.

उल्‍लेखनीय है कि जालौन के एक गल्‍ला व्‍यापारी गिरीश गुप्‍ता की 21 वर्षीय पुत्री तथा एमए की छात्रा शिक्षा गुप्‍ता का अपहरण कुछ बदमाशों ने 11 नवम्‍बर को कर लिया था. अपहरण के दौरान बदमाशों ने गिरीश गुप्‍ता को भी गंभीर रूप से घायल कर दिया था. इस मामले की जांच के लिए पुलिस की जांच टीमें भी बनाई गईं, पर कुछ पता नहीं चल पाया. इस मामले को ही  संदिग्‍ध बताते हुए पुलिस जांच कर रही थी. अमर उजाला भी पुलिस के पक्ष की ही खबरें छाप रहा था. पुलिस अधीक्षक के बयान पर अखबार परिजनों पर ही निशाना साध रहा था. लेकिन सोमवार को जब छात्रा का शव मिला तो जालौन के लोगों का गुस्‍सा पुलिस के प्रति भड़क उठा. लोगों ने अमर उजाला के पत्रकारों को भी खरी खोटी सुनाई.

इस घटना के कवरेज के लिए गए अमर उजाला के पत्रकारों को भगा दिया गया. इतना ही नहीं मंगलवार की सुबह जालौन के व्‍यापारियों ने अमर उजाला की प्रतियां तक नहीं उतरने दी. व्‍यापारियों ने खबर लिखने वाले रिपोर्टरों के खिलाफ कार्रवाई तक की मांग कर डाली तथा अमर उजाला की गंदी पत्रकारिता के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली. बैकफुट पर आए अमर उजाला ने बाद में खबरों में सुधार की कोशिश की पर व्‍यापारी अब भी अखबार के पत्रकारों से नाराज हैं. व्‍यापारियों ने हत्‍या के खिलाफ प्रदर्शन भी किया तथा हत्‍यारों की गिरफ्तारी न होने तक आंदोलन की चेतावनी दी है.

जालौन से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. 

अमर उजाला के पत्रकार दिनेश गुप्‍ता का निधन

अमर उजाला में उप संपादक एवं लखीमपुर कार्यालय के ब्यूरो प्रभारी दिनेश गुप्ता का शनिवार देर रात लखनऊ के मेडिकल कालेज में उपचार के दौरान निधन हो गया। 42 वर्षीय दिनेश गुप्ता के निधन पर तमाम पत्रकारों, समाज सेवियों, राजनीतिक दलों के नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उनकी अंत्येष्टि यहां सेठघाट पर की गई। मुखाग्नि उनके दस वर्षीय पुत्र प्रखर गुप्ता तथा उनके बड़े भाई महेश गुप्ता ने दी। वह अपने पीछे बूढ़ी मां के अलावा पत्नी रोमा गुप्ता, पुत्र प्रखर गुप्ता व पुत्री साक्षी गुप्ता उर्फ जूही (12) को छोड़ गए हैं।

करीब एक साल पहले उन्हें बोन टीबी हो गई थी। 25 अक्तूबर को रात में अचानक हालत खराब हो गई। उन्हें उसी रात जिला अस्पताल में भर्ती कराया बाद में एक नवंबर को पीजीआई लखनऊ लाया गया, फिर मेडिकल कालेज ले जाए गए। वहां शुरू हुए इलाज के साथ ही शनिवार रात करीब 11 बजे चिकित्सकों ने आपरेशन की तैयारी शुरू कर दी, लेकिन तभी 12.25 बजे उनकी सांसें थम गईं।

रविवार सुबह उनका पार्थिव शरीर शहर के मुहल्ला राजगढ़ स्थित उनके आवास लाया गया। शहर के सेठघाट पर करीब डेढ़ बजे उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। अमर उजाला कार्यालय के समस्त स्टाफ एवं क्षेत्रीय संवाददाताओं के अलावा विभिन्न समाचार पत्रों व इलेक्ट्रानिक चैनल्स के पत्रकारों के साथ सांसद ज़फर अली नकवी, पूर्व मंत्री रामकुमार वर्मा, सपा विधायक डा. आरए उस्मानी, विधायक कृष्ण गोपाल पटेल, सदर विधायक उत्कर्ष वर्मा, धीरेंद्र बहादुर सिंह, जिला पंचायत सदस्य राजीव गुप्ता, विनोद मिश्रा, प्रेम शंकर अग्रवाल, डा. इरा श्रीवास्तव, नीरज बरतरिया, राजीव त्रिवेदी, सतीश श्रीवास्तव, अन्नू मिश्रा, केवल कृष्ण, सीतापुर अमर उजाला कार्यालय के ब्यूरो प्रभारी आशू बाजपेई, यातायात प्रभारी राजेश चौधरी, सहायक यातायात प्रभारी राममनोहर सिंह सहित तमाम गणमान्य लोग उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुए। साभार : अमर उजाला

अमर उजाला : वेद इटावा एवं वीरेश औरैया के ब्‍यूरोचीफ बने

: विक्रम की नई पारी : अमर उजाला, इटावा से खबर है कि वेद प्रकाश त्रिपाठी को नया ब्‍यूरोचीफ बनाया गया है. वेद अभी तक कानुपर में अपनी सेवाएं दे रहे थे. अब तक इटावा में ब्‍यूरोचीफ की जिम्‍मेदारी निभा रहे वीरेश मिश्रा को औरेया का प्रभारी बना दिया गया है. मूल रूप से इटावा के रहने वाले वीरेश की गिनती तेजतर्रार पत्रकारों में होती है. सूत्रों का कहना है काफी समय से उन्‍हें इटावा से हटाने की कोशिश चल रही थी.

अब तक औरैया में ब्‍यूरोचीफ की भूमिका निभा रहे एस चौहान को वापस कानपुर बुला लिया गया है. चौहान काफी समय से औरैया में तैनात थे. बताया जा रहा है कि प्रबंधन अभी कुछ और तबादले भी कर सकता है.

हिंदुस्‍तान, बदायूं से खबर है कि बिनवार के रिपोर्टर विक्रम प्रताप सिंह ने इस्‍तीफा दे दिया है. उन्‍होंने अपनी नई पारी की शुरुआत दैनिक जागरण से की है. सूत्रों का कहना है कि विक्रम वरिष्‍ठों से परेशान चल रहे थे तथा आजिज आकर अखबार को बाय कर दिया. वे अखबार की लांचिंग के समय से ही जुड़े हुए थे.

रघुवीन्‍द्र मिश्र बने दिव्‍य हिमाचल के एजीएम

: निशा, तुषार एवं आशीष अमर उजाला से जुड़े : दैनिक जागरण, चंडीगढ़ से खबर है कि रघुवीन्‍द्र मिश्रा ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर मार्केटिंग मैनेजर के पद पर कार्यरत थे. इन्‍होंने अपनी नई पारी दिव्‍य हिमाचल से शुरू की है. इन्‍हें यहां असिस्‍टेंट जनरल मैनेजर बनाया गया है. रघुवीन्‍द्र जागरण से पहले हिंदुस्‍तान और अमर उजाला को भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

पंजाब केसरी, अंबाला से खबर है कि निशा शर्मा ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे डेस्‍क पर कार्यरत थीं. उन्‍होंने अपनी नई पारी अमर उजाला, अंबाला के साथ शुरू की है. उन्‍हें यहां भी डेस्‍क पर लाया गया है. पंजाब केसरी, जालंधर से सी तुषार दत्‍त ने भी इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर सब एडिटर थे. उन्‍होंने भी अपनी नई पारी अमर उजाला, चंडीगढ़ से शुरू की है. इन्‍हें यहां भी सब एडिटर बनाया गया है. पंजाब केसरी, चंडीगढ़ से आशीष रामपाल भी इस्‍तीफा देकर अमर उजाला पहुंच गए हैं.

पानीपत और करनाल से भी लांच हुआ अमर उजाला का ‘माई सिटी’

अमर उजाला ने अंबाला, यमुनानगर, कैथल और कुरुक्षेत्र के बाद पानीपत और करनाल से भी माई सिटी लां‍च किया है. हरियाणा के इन दो शहरों में माई सिटी की लांचिंग एक नवम्‍बर को की गई. इस पुल आउट की लांचिंग चार शहरों में इसे बढि़या रिस्‍पांस मिलने के बाद की गई है. अखबार ने लिखा है कि पाठकों तक पहुंचने तथा उनकी आवाज बनने के लिए इस पुल आउट की लांचिंग की गई है.

इन दोनों शहरों के बाद अब अमर उजाला प्रबंधन सोनीपत और रोहतक से भी पुल आउट निकालने की तैयारियों में जुट गया है. उल्‍लेखनीय है कि अमर उजाला माई सिटी पुल आउट में स्‍थानीय खबरों को प्रमुखता देता है. स्‍थानीय बड़ी-छोटी खबरों के चलते ही हरियाणा के चार शहरों में इसे अच्‍छा रिस्‍पांस मिला है.

अमर उजाला ने ‘जहान’ डुबा दिया, पर मरा एक

अखबारों में छोटी मो‍टी गलतियां होती रहती हैं. कुछ गलतियां ऐसी होती हैं जिससे अर्थ का अनर्थ हो जाता है. ऐसा किसी एक शब्‍द के हेरफेर से हो जाता है. ऐसी ही एक गलती अमर उजाला के अम्‍बाला एडिशन में प्रथम पेज की एक हेडिंग में हुई. हेडिंग पढ़ कर लोग उत्‍सुक हुए कि ये हुआ कब और हमलोग कैसे बच गए? 

ईरान में पानी का एक जहाज डूब गया था, जिसमें अम्‍बाला का एक नौजवान भी मारा गया. अमर उजाला ने खबर वही छापी पर हेडिंग में 'जहाज' की जगह 'जहान' शब्द प्रकाशित कर दिया. इस तरह हेडिंग हो गई 'जहान डूबने से अंबाला के युवक की मौत'.  इस खबर को लोग चटखारे लेकर पढ़ते रहे.  चर्चा करते रहे कि जब जहान ही डूब गया तो हमलोग और अखबार कैसे बच गया. अखबार से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि गलत हेडिंग को ठीक कर लिया गया था लेकिन इंटरनेट एडिशन में ईपेपर पर गलत हेडिंग का प्रकाशन हो गया.

अजीत राठी बने अमर उजाला में स्‍पेशल करेस्‍पांडेंट

: साधना न्‍यूज से चार वीडियो एडिटरों का इस्‍तीफा : हिंदुस्‍तान, देहरादून से खबर है कि अजीत राठी ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर सीनियर रिपोर्टर थे. इन्‍होंने अपनी नई पारी देहरादून में ही अमर उजाला के साथ कर रहे हैं. उन्‍हें स्‍पेशल करेस्‍पांडेंट बनाया गया है. वे काफी समय से हिंदुस्‍तान को अपनी सेवाएं दे रहे थे. इसके पहले भी वे कई अखबारों में काम कर चुके हैं. 

साधना न्‍यूज से खबर है कि चार वीडियो एडिटरों ने इस्‍तीफा दे दिया है. ये लोग काफी समय से साधना से जुड़े हुए थे. इस्‍तीफा देने वालों में सियाराम, अजय रावत, अजय शर्मा और सुशील कुमार शामिल हैं. ये लोग अपनी नई पारी कहां से शुरू करने वाले हैं इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है.

आलोक पराड़कर अमर उजाला पहुंचे, नीतीश की नई पारी

साहित्य-संस्कृति की पत्रकारिता में गहरी दखल रखने वाले आलोक पराड़कर अब अमर उजाला की लखनऊ टीम का हिस्सा होंगे. उन्होंने यहाँ वरिष्ठ संवाददाता के पद पर ज्वाइन किया है. आलोक अभी जनसंदेश टाइम्‍स के साथ चीफ रिपोर्टर के रूप में जुड़े हुए थे. उन्‍होंने अपने जाने की सूचना प्रबंधन को दे दी है. गौरतलब है कि इसके पहले आलोक वरिष्‍ठ संवाददाता के रूप में हिंदुस्‍तान को अपनी सेवाएं दे रहे थे. प्रबंधन द्वारा उनका तबादला बनारस कर दिए जाने के बाद उन्‍होंने इस्‍तीफा दे दिया था तथा जनसंदेश टाइम्‍स से जुड़ गए थे. समझा जा रहा है कि वे हिंदुस्तान छोड़ने के बाद से ही जागरण और अमर उजाला के सम्पर्क में थे और बेहतर ऑफर मिलने पर उन्होंने अमर उजाला ज्वाइन कर लिया. आलोक के जनसंदेश टाइम्‍स से जाने की पुष्टि जनसंदेश टाइम्‍स के संपादक डा. सुभाष राय ने की.

नीतीश सरकार ने साधना न्‍यूज से इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर वीडियो एडिटर के रूप में कार्यरत थे. उन्‍होंने अपनी नई पारी जागरण प्रकाशन के ऑनलाइन सर्विस एमएमआई ऑनलाइन लिमिटेड से की है. नीतीश इसके पहले भी कई संस्‍थानों के हिस्‍सा रह चुके हैं.

आलोक शुक्‍ला बने दैनिक जागरण, हल्‍द्वानी के संपादक

: दिनेश ने जनवाणी ज्‍वाइन किया : दैनिक जागरण, हल्‍द्वानी से खबर है कि आलोक शुक्‍ला यहां के नए स्‍थानीय संपादक बना दिए गए हैं. अब तक इस पद पर जिम्‍मेदारी निभा रहे राजीव शुक्‍ला को असिस्‍टेंट संपादक बना दिया गया है. गौरतलब है कि आलोक शुक्‍ला इसके पहले हल्‍द्वानी में ही अमर उजाला के संपादक के पद पर कार्यरत थे. प्रबंधन ने उनकी जगह मेरठ में तैनात सुनील शाह को संपादकीय प्रभारी बनाकर हल्‍द्वानी भेज दिया था तथा आलोक शुक्‍ला को नोएडा स्थित कारपोरेट ऑफिस से अटैच कर दिया था. इसके बाद उन्‍होंने अमर उजाला से इस्‍तीफा दे दिया. इस संदर्भ में और जानकारी के लिए जब आलोक शुक्‍ला को फोन किया गया तो उनका मोबाइल स्विच ऑफ बताता रहा.  जब दैनिक जागरण, बरेली के सीजीएम एएन सिंह से संपर्क किया गया तो उन्‍होंने आलोक शुक्‍ला को हल्‍द्वानी का संपादक बनाए जाने की पुष्टि की.

हिंदुस्‍तान, रुद्रपुर से खबर है कि दिनेश अवस्‍थी ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां स्ट्रिंगर के पद पर कार्यरत थे. वे अपनी नई पारी जनवाणी, देहरादून से करने जा रहे हैं. उन्‍हें यहां रिपोर्टर बनाया जा रहा है. दिनेश काफी समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं तथा कई संस्‍थानों को अपनी सेवाएं दी हैं.

न्‍यूज चैनलों की मालिकाना पद्धति काफी संदिग्‍ध है

केंद्र सरकार ने पिछले दिनों एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिये नए चैनल खोलने के इच्छुक आवेदकों के लिए भावी दिशानिर्देश जारी किए। दरअसल, अगले साल पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव और फिर दो साल बाद होने वाले आम चुनाव के मद्देनजर कई चैनल मालिक इस बहती गंगा में हाथ धोने की तैयारी में हैं। इस समय तकरीबन 578 टेलीविजन चैनल सक्रिय हैं, जो धर्म, मनोरंजन, खान-पान, क्षेत्रीयता और विभिन्न समुदायों से जुड़ी तमाम चीजें परोसते रहते हैं। इनमें 122 समाचार चैनल हैं।

अखबारों के ज्यादातर पाठक दुनिया की ताजातरीन घटनाओं से खुद को अपडेट रखना चाहते हैं। अब देखने वाली बात यह है कि ये चैनल समाचार के भूखे इन दर्शकों की क्षुधा को किस तरह शांत करते हैं। पहली बात यह कि अधिक से अधिक छह चैनलों को छोड़कर ज्यादातर समाचार चैनल कुछ खास क्षेत्रों में नए चैनल खोल रहे हैं, लेकिन उन्हें कारोबार में घाटा हो रहा है। इन क्षेत्रों के दर्शकों के लिए परोसी जाने वाली समाचार सामग्री पक्षपातपूर्ण होती है। वे अकसर एक राय बनाते हैं, जो स्थानीय आबादी की नहीं, बल्कि चैनल मालिक के हितों की पूर्ति करता है।

साथ ही समाचार चैनलों की मालिकाना पद्धति काफी संदिग्ध है। तकरीबन 90 फीसदी मामलों में देखा गया है कि समाचार चैनल के मालिक बिल्डर हैं। इनमें से कुछ अपनी फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल विदेश में प्रसारण के लिए कर रहे हैं। मसलन, एक ऑपरेटर दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स और कनाडा के वैंकूवर के दर्शकों के लिए इसका इस्तेमाल कर रहा है। यह ऑपरेटर एक धार्मिक और एक मनोरंजन चैनल भी चला रहा है।

एक दूसरे चैनल ऑपरेटर ने शराब ठेकेदार के रूप में अपने पारिवारिक कारोबार की शुरुआत की थी। इसके बाद वह निर्माण क्षेत्र में आया और फिर उसने फिल्म उद्योग में हाथ आजमाया। आज उनके पास एक हिंदी समाचार चैनल और चार क्षेत्रीय समाचार चैनल हैं। अब यह एक अंगरेजी समाचार चैनल शुरू करने की तैयारी में है। यह सूची काफी लंबी है। इसके अलावा टेलीविजन क्षेत्र में कई बड़े नाम हैं। इनमें से कुछ स्विट्जरलैंड, अमेरिका, सऊदी अरब और अन्य संदिग्ध स्रोतों से धन प्राप्त कर रहे हैं।

इसी तरह देश में गरीबों के हितों के लिए लड़ने की कसम खाने वाले वामपंथी नेताओं का पैसा एक अंगरेजी समाचार चैनल में लगा हुआ है। अगर इन चैनलों की सामग्री पर गौर करें, तो निश्चित रूप से घोटालों की भयावहता का अंदाजा खुद-ब-खुद होने लगेगा। अधिकांश समाचार चैनल केवल शहरों की खबरों को तवज्जो देते हैं। भारत एक विशाल देश है और हर गांव में तमाम अच्छी खबरें छिपी रहती हैं। क्या कोई समाचार चैनल गांवों की खबरों के लिए समय दे रहा है? क्या ये चैनल यह दिखाने की जरूरत महसूस करते हैं कि ग्रामीण भारत में क्या हो रहा है?

सभी समाचार चैनलों में ब्रेकिंग न्यूज का तमाशा साफ देखा जा सकता है। पिछले साल एक चैनल ने दिल्ली के पुलिस आयुक्त के कुत्ते की गुमशुदगी की खबर पूरे दिन ब्रेकिंग न्यूज के रूप में चलाई। अखबारों के शीर्षकों की तुलना अगर समाचार चैनल में दिखाई जाने वाली खबरों से करें, तो पता चलता है कि कोई खबर जिसे राष्ट्रीय स्तर के अखबार में एक छोटे पैराग्राफ में जगह मिलती है, वही एक राष्ट्रीय स्तर के टीवी चैनल में पूरे दिन चलती रहती है।

समाचार चैनलों पर कॉमेडी से जुड़े कार्यक्रम दिखाए जाते हैं। सवाल यह है कि जब उन्हें केवल समाचार दिखाने का लाइसेंस मिला हुआ है, तो वे इस तरह के बेहूदा कार्यक्रम क्यों दिखाते हैं? समाचार की जगह से घंटों तक फिल्मों के ट्रेलर और फिल्मी कलाकारों के साक्षात्कार क्यों दिखाते हैं। दर्शकों को इन सबसे राहत इसलिए नहीं मिल पा रही है, क्योंकि इसके लिए कोई स्वतंत्र नियामक निकाय नहीं है। समाचार चैनलों के सामग्री की निगरानी के लिए अब केंद्र सरकार ने एक नियामक की नियुक्ति की ओर संकेत किया है।

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत में टेलीविजन उद्योग युवा पीढ़ी को ज्यादा शिक्षित, जवाबदेह और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने के प्रति जवाबदेह नहीं है। दरअसल, टेलीविजन अज्ञानता और मूर्खता के सूचकांक को बढ़ावा देने वाला एक साधन बन चुका है। इसलिए कहा जा सकता है टेलीविजन देखना बेहतर बेवफूक बनने की सही विधि है।

गौतम कौल का यह लिखा अमर उजाला में प्रकाशित हो चुका है. इसे वहीं से साभार लिया गया है.

चैनल के नाम पर बेरोजगारों को ठगने वाला एमडी लौटाएगा पैसे

शिमला। बेरोजगारों के साथ ठगी के मामले में फंसे एक निजी न्यूज चैनल का एमडी बेरोजगारों का पैसा वापस लौटाएगा. पुलिस की हिरासत में एक सहयोगी के आने के बाद एमडी ने सभी 22 बेरोजगार युवाओं के पैसे लौटाने का वादा किया है. शनिवार को न्‍यूज चैनल में नौकरी के नाम पर ठगे गए युवाओं तथा एमडी का आमना-सामना थाना सदर में हुआ. पुलिस की मौजूदगी में तमाम तरह के आरोप-प्रत्‍यारोप लगे. अंत में एमडी ने सभी बेरोजगारों के पैसा वापस करने का वायदा किया है. पुलिस ने उसको एक सप्‍ताह की मोहलत दी है.

पुलिस द्वारा की गई अब तक की जांच में खुलासा हुआ है कि इस पूरे प्रकरण का मास्टर माइंड कथित न्‍यूज चैनल का एमडी राजेंद्र विधान है. इस मामले में पुलिस हिरासत में लिये गए  प्रेम सिंह को भी उसने मोहरा के रूप में इस्‍तेमाल किया. पुलिस का कहना है ठगी के शिकार युवा चाहते हैं कि उनका पैसा उन्‍हें वापस मिल जाए. आरोपी एमडी भी पैसा वापस लौटाने को तैयार है. इस स्थिति में अगर उसे गिरफ्तार कर लिया जाता है तो बेरोजगारों का पैसा अटक जाएगा. इसलिए बेरोजगार भी कानूनी कार्रवाई की बजाय पैसे वापस दिलाने का दबाव डाल रहे हैं. फिलहाल एमडी के पास अभी 50 हजार रुपये हैं, जबकि कुल रकम करीब साढ़े तीन लाख है. पुलिस ने बताया कि इतनी रकम का इंतजाम करने के लिए उसे एक सप्‍ताह का वक्त दिया गया है. डीएसपी सिटी बलबीर जसवाल ने कहा कि राजेंद्र विदान पैसा लौटाने को तैयार हो गया है. यह पूरे मामले का मास्टर माइंड है. आरोपी की गिरफ्तारी तय है.

कथित निजी न्यूज चैनल के एमडी का मोहरा बने प्रेम सिंह वर्मा ने कहा कि नेटवर्क डायरेक्टर के पद पर उसे तैनाती दी गई. हिमाचल में नेटवर्क खड़ा करने के आदेश दिए कहा कि प्रत्येक रिपोर्टर से 15,000 हजार और प्रत्येक ब्यूरो प्रमुख से 25,000 हजार लेने हैं. यह पैसा उनके प्रशिक्षण पर खर्च होगा. प्रशिक्षण के तुरंत बाद इन्हें प्रशिक्षण का प्रमाण पत्र, पहचान पत्र और वेतन दिया जाएगा. प्रेम सिंह ने आरोप लगाया कि उसने पांच महीने तक काम किया पर इस दौरान उसे वेतन के रूप में एक रुपया तक नहीं दिया गया. वह खुद राजेंद्र विधान की ठगी का शिकार हुआ है, उसको जो भी पैसा या चेक मिला उसने राजेंद्र विधान को दे दिया. इसका रिकार्ड भी उसके पास मौजूद है.