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जनसंदेश टाइम्‍स के संवाददाता को चार साल की कैद

जनसंदेश टाइम्‍स, बनारस में ऐसे लोगों के हाथों में हैं. जिससे इस अखबार और पत्रकारिता दोनों का भला होना मुश्किल है. बनारस यूनिट से जुड़े चंदौली जिले से खबर है कि जनसंदेश टाइम्‍स ने एक ऐसे व्‍यक्ति को अखबार प्रतिनिधि बना रखा था, जिस जान लेवा हमला करने का आरोप था. इस मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने जनसंदेश टाइम्‍स के इस संवाददाता को चार साल कैद की सजा सुनाई है. इसके बाद यह बहस फिर तेज हो गया है कि जनसंदेश टाइम्‍स जैसे अखबार अपराध करने वालों को पाल पोस कर पत्रकारिता कर रहे हैं. 

जनसंदेश टाइम्‍स, बनारस में ऐसे लोगों के हाथों में हैं. जिससे इस अखबार और पत्रकारिता दोनों का भला होना मुश्किल है. बनारस यूनिट से जुड़े चंदौली जिले से खबर है कि जनसंदेश टाइम्‍स ने एक ऐसे व्‍यक्ति को अखबार प्रतिनिधि बना रखा था, जिस जान लेवा हमला करने का आरोप था. इस मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने जनसंदेश टाइम्‍स के इस संवाददाता को चार साल कैद की सजा सुनाई है. इसके बाद यह बहस फिर तेज हो गया है कि जनसंदेश टाइम्‍स जैसे अखबार अपराध करने वालों को पाल पोस कर पत्रकारिता कर रहे हैं. 

जानकारी के अनुसार चंदौली जिले में कमालपुर क्षेत्र में रणविजय सिंह जनसंदेश टाइम्‍स अखबार से जुड़े हुए हैं. इनकी नियुक्ति जिला ब्‍यूरोचीफ सिद्धार्थ यादव के रिकमंडेशन के बाद जिलों की जिम्‍मेदारी देखने वाले विजय विनीत ने की थी. सूत्रों का कहना है कि इन दोनों लोगों को पहले ही रणविजय सिंह के अतीत की जानकारी इन लोगों को थी. रणविजय सिंह ने कुछ समय पहले एक व्‍यक्ति को गोली मार दी थी, परन्‍तु वह बच गया था. जिसके बाद उसके ऊपर मामला दर्ज हुआ था. इसके बावजूद रणविजय जैसे अपराधी मानसिकता के व्‍यक्ति को जनसंदेश टाइम्‍स अखबार का पत्रकार बना दिया गया.

अब इसके पीछे इन लोगों की सोच चाहे पैसे वगैरह का लालच रहा हो अथवा किसी गुंडा टाइप व्‍यक्ति को अपने साथ जोड़ने की लालसा, पर इससे पत्रकारिता का नुकसान जरूर हुआ. कोर्ट ने अब इसी मामले में सुनवाई करते हुए रणविजय सिंह को चार साल कारावास की सजा सुनाई है, जिसके बाद पुलिस ने उसे अरेस्‍ट कर लिया. उसे जेल भेजा जा चुका है. परन्‍तु इस घटना के बाद से एक बात तो तय हो गई है‍ कि विजय विनीत और सिद्धार्थ यादव जैसे लोग आरोपी पत्रकारों को अखबार से जोड़कर सरोकारी माने जाने वाली पत्रकारिता की हत्‍या का प्रयास कर रहे हैं.

ये ही एक मामला नहीं है. इसके पहले भी बनारस में जनसंदेश टाइम्‍स लगातार चर्चा में रहा है. चाहे सैलरी में लेट लतीफी का मामला हो या फिर पाठकों के लिखे गए पत्रों में हेराफेरी का. यह अखबार बनारस में लगातार पत्रकारिता को बदनाम करता दिख रहा है. खैर, एक हत्‍या के प्रयास के आरोपी को पत्रकार बनाना सचमुच में पत्रकारिता को बदनाम और बरबाद करने का कदम माना जा सकता है. इस संदर्भ में जनसंदेश टाइम्‍स का पक्ष लेने के लिए संपादक आशीष बागची और जिलो की जिम्‍मेदारी देखने वाले विजय विनीत को भड़ास की तरफ से फोन किया गया, परन्‍तु दोनों लोगों ने फोन पिक नहीं किया.  

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