हिंदुस्तान, धनबाद में स्थितियां काफी खराब होती जा रही हैं. खबर है कि संपादक के रवैये से कम से कम एक दर्जन कर्मचारी दूसरे जगहों पर नौकरी तलाश रहे हैं. संपादक के अपशब्द बोलने का रवैया इन कर्मचारियों को सबसे ज्यादा नागवार गुजर रहा है. छोटी-मोटी गलती होने पर भी कर्मचारियों को अपशब्द व गालियां सुननी पड़ रही हैं. वहीं जूनियरों को बड़ी जिम्मेदारियां सौंप देने से भी यूनिट के अंदर तनाव फैला हुआ है. अगर प्रबंधन ने ध्यान नहीं दिया तो उसे यहां तगड़ा झटका लग सकता है.
सूत्रों का कहना है कि संपादक अपने जाति और रिश्तेदारों को पूरी तरह प्रश्रय दे रहे हैं. उन्होंने प्रभात खबर, देवघर में कार्यरत अपनी ही जाति के दो सब एडिटरों वरुण सिंह एवं प्रभात पराशर को हिंदुस्तान में ज्वाइन कराया है. ज्वाइन कराने के कुछ समय बाद ही उन्होंने पराशर को सिटी इंचार्ज बना दिया, जबकि इनसे सीनियर पदों पर तमाम लोग पहले से हिंदुस्तान में कार्यरत थे. वहीं सिटी इंचार्ज की जिम्मेदारी संभाल रहे राजकुमार को दुमका पेज देखने के लिए लगा दिया गया.
बताया जा रहा है कि यह यूनिट एक खास बिरादरी का जागीर बन गया है. यूनिट हेड, समाचार संपादक तथा संपादक तीनों एक ही बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं लिहाजा यहां की कोई भी गलत-सही बातें जल्दी यूनिट से बाहर नहीं निकल पाती हैं. अन्य कर्मचारियों की कोई बात सुनी ही नहीं जाती है, जिससे वे बुरी तरह परेशान हैं. समाचार संपादक सत्यभूषण सिंह ऊर्फ बड़कू सिंह पिछले दस सालों से यहां टिके हुए हैं. उनके चलते यहां की स्थिति और भी खराब हो रही है. वे संपादक के कान भरते हैं और संपादक कर्मचारियों से अपनी शैली में बात करते हैं.
सूत्रों का कहना है कि कुछ लोगों ने यहां की स्थितियों से एचआर के लोगों भी अवगत कराया है. हालांकि इस संदर्भ में जब संपादक गीतेश्वर प्रसाद सिंह का पक्ष लेने के लिए बात की गई तो उन्होंने सवालों का जवाब देने की बजाय मीटिंग में होने की बात कहते हुए बाद में बात करने को कहा.





