SC stays further proceedings in the Hindustan Advertisement Scandal case

Munger : The world famous 200 crore Dainik Hindustan Advertisement scandal case now reached the Supreme Court.Honourable Mr.Justice H.L.Dattu and Honourable Mr.Justice Dipak Misra, in the Special Leave Petition (Criminal) No.1603/2013,(Shobhana Bhartia Vs State of Bihar & others ) on March 05, ordered to stay further proceedings in the Munger F.I.R No.445/2011,dated 18-11-2011 under sections 8(B)/14/15 of the Press & Registration of Books Act,1867 read with sections 420/471/476 of the Indian Penal Code,1860.

The Supreme Court ordered, "There shall be interim stay of further proceedins in the F.I.R No.445/2011, dated 18/12/2011 under sections 8(B)/14/15 of the Press & Registration of Books Act, 1867 read with sections 420/471 /476 of the Indian Penal Code,1860 and the proceedings emanating thereto, until further orders."

Senior advocates Mr.Mukul Rohtagi, Mr.Aman Lekhi, Mr. Sandeep Kapur, Mr.Shivek Trehan and Mr. Laksh Khanna for M/S Karanjawala & Com. appeared for the petitioner, Shobhana Bhartia in the Supreme Court.

Demand to confiscate the properties of economic offenders : The President of the Watch Dog group and government witness in the sensational 200 crore Dainik Hindustan Advertisement scandal,Kashi Prasad, who is also an R.T.I activist of national level ,senior lawyer and journalist,in a press note today, has urged the Chief Minister of Bihar ,Nitish Kumar and the Director General of Police, Bihar, Abhyanand to confiscate the properties of all the accused persons of the Munger Kotwali Case No.445 of 2011 on the plea that this case relates to the economic offence of serious-nature not in India,but in the world of the media.

The accused persons include the VVIPs of India : The accused persons include Smt. Shobhana Bharatia (the Chairperson of M/S Hindustan Media Ventures Limited, New Delhi), Amit Chopra (the Publisher, M/S Hindustan Media Ventures Limited, New Delhi), Shashi Shekhar (Chief Editor, Dainik Hindustan, New Delhi), Aaku Srivastawa (the Regional Editor, Dainik Hindustan, Patna Edition, Patna) and Binod Bandhu (the Regional Editor, the Bhagalpur and Munger editions of Dainik Hindustan, Bhagalpur). It is worth mentioning that Kashi Prasad has been honoured by Arvind Kejriwal earlier.

The Bihar govt.'s decision hailed : Meanwhile, Mr.Prasad has also hailed the decision of the Bihar government in which the govt. has begun confiscating the properties of arms-smugglers and illicit- liquor manufacturers.Recently, on the directives of the Director General of Police(Bihar,Patna),the Munger police under the leadership of the Police Superintendent,P.Kannan, have confiscated the properties of two arms-smugglers in the Munger district in Bihar.The Munger administratin has sent proposals to the state government to confiscate the properties of twenty more economic offenders.

"If the govt. confiscates the properties of arms-smugglers,the govt. is also free to confiscate the properties of the accused persons in connection with the famous 200 crore Dainik Hindustan Advertisement scandal case," advocates Mr. Prasad.

Demand to expedite the police investigation : In the press -note, Mr.Prasad has also urged the Bihar Chief Minister,Nitish Kumar and the D.G.P(Bihar),Abhyanand to expedite the investigation of this case immediately in the wake of the findings of the supervision-reports of the S.P(Munger) and the Dy.S.P(Munger) .The S.P and the Dy.S.P have found all allegations against the accused persons "prima facie true." It is worth mentioning that the Honourable Justice Anjana Prakash of the Patna High Court has directed the Munger police to complete the police investigaton in this instant case within three months from the date of the receipt of this court order. The High Court order has ,in fact, strengthened the morale of the Bihar police in the investigaton of this world famous case.

Accusations against accused persons under various sections of IPC : All the accused persons namely Shobhana Bharatia,Amit Chopra,Shashi Shekhar,Aaku Srivastawa and Binod Bandhu have been charged with cheating and committing forgery with the Union and the Bihar governments in a bid to get the government advertisements under sections 420/471 and 476 of the Indian Penal Code and sections 8(B)/14 and 15 of The Press & Registration of Books Act,1867.

The charge-sheet awaited : After the submission of the supervision-reports of the Dy.S.P and the S.P,the Munger police are to submit the charge-sheet against them in the court.(EOM)

Report by Shrikrishna Prasad, an R.T.I activist, lawyer and journalist, Munger, Bihar.  Mobile No.09470400813.


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क्‍यों हिंदुस्‍तान को सताने लगी मुंगेर के विकास की चिंता?

मुंगेर। विश्वस्तरीय 200 करोड़ के दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन फर्जीवाड़ा कांड में ज्यों-ज्यों अभियुक्तों की गर्दन की ओर कानून की तलवार बढ़ती जा रही है, अभियुक्तों की ओर से नया-नया ड्रामा शुरू कर दिया गया है। वर्ष 2001 के 03 अगस्त से दैनिक हिन्दुस्तान का भागलपुर और मुंगेर संस्करण शुरू हुआ। तब से आज तक मुंगेर जिले के विकास के लिए दैनिक हिन्दुस्तान के संपादकीय प्रबंधन ने कभी भी किसी प्रकार का विशेष आयोजन ‘मुंगेर के विकास‘ के मुद्दे पर नहीं किया।

पूरे 12 वर्षों तक दैनिक हिन्दुस्तान ने मुंगेर के विकास की सुधि नहीं लीं। परन्तु, जब 200 करोड़ के दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाला में पुलिस जांच की कार्रवाई अंतिम चरण में चल रही है, तो आरोपियों की ओर से मुंगेर प्रमंडल मुख्यालय में 06 मार्च को अचानक ‘संवाद‘ कार्यक्रम के तहत सेमिनार आयोजित किया गया। इस सेमिनार में जिले के राजनीतिक दलों के प्रमुख, व्यवसायी संघ के प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों को आमंत्रित किया गया और मुंगेर के विकास पर बोलने को कहा गया। दैनिक हिन्दुस्तान ने इस कार्यक्रम को मुंगेर संस्करण के प्रथम पृष्ठ पर शीर्षक ‘मुंगेर के विकास पर सीधा संवाद, तलाशे गए मुद्दे‘ प्रकाशित किया। अखबार ने मुंगेर संस्करण के पृष्ठ 05 पर भी विस्तृत रिपोर्ट शीर्षक ‘पर्यटन क्षेत्र में विकसित हो मुंगेर, प्रशासनिक अनदेखी हो बन्द‘ से प्रकाशित किया।

दैनिक हिन्दुस्तान की ओर से आयोजित इस संवाद कार्यक्रम में उपस्थित रहे दैनिक हिन्दुस्तान (पटना) के वरीय स्थानीय संपादक कृष्णकांत उपाध्याय और भागलपुर संस्करण के स्थानीय संपादक विश्वेश्वर कुमार। मुंगेर जिले के बुद्धिजीवी हतप्रभ हैं कि आखिर अचानक पटना के वरीय संपादक कृष्णकांत उपाध्याय और भागलपुर के स्थानीय संपादक विश्वेश्वर कुमार को मुंगेर के विकास के प्रति अचानक चिंता कैसे उमड़ पड़ी है? मुंगेर के विकास के नाम पर दैनिक हिन्दुस्तान के नामजद आरोपियों के पक्ष में वातावरण तैयार करने की कोई साजिश तो नहीं चल रही है, बुद्धिजीवी लोग आशंका कर रहे हैं?

प्रजातंत्र का हो रहा है मजाक : मुंगेर पुलिस की ओर से दैनिक हिन्दुस्तान के विज्ञापन फर्जीवाड़ा में पर्यवेक्षण टिप्पणी – वन एवं टू जारी हो जाने के बावजूद भी अभियुक्तों ने अवैध ढंग से प्रकाशित हो रहे मुंगेर संस्करण को बन्द नहीं किया है। मुंगेर के वर्तमान जिलाधिकारी कुलदीप नारायण ने भी पटना उच्च न्यायालय को भेजी अपनी रिपोर्ट में  मुंगेर के वर्तमान संस्करण को अवैध घोषित कर दिया है।

आर्थिक अपराधियों के हौसले बुलंद : पटना उच्च न्यायालय को भेजी रिपोर्ट में मुंगेर के जिलाधिकारी कुलदीप नारायण के द्वारा दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर संस्करण को अवैध घोषित किए जाने के बाद भी अभियुक्तों की ओर से मुंगेर में दैनिक हिन्दुस्तान के संस्करण का वितरण करना, मुंगेर प्रमंडलीय मुख्यालय में अवैध ढंग से हिन्दुस्तान कार्यालय को संचालित करना और सार्वजनिक रूप से ‘संवाद‘ कार्यक्रम आयोजित करना संकेत देता है कि अभियुक्तगण देश के कानून का मजाक उड़ा रहे हैं। बिहार सरकार के मंत्रीगण और प्रशासनिक महकमे के लोग भी ‘बेसहारा‘ और ‘लाचार‘ इस मामले में नजर आ रहे हैं। यह भारतीय प्रजातंत्र की खूबियों में एक खूबी है?

मुंगेर से श्रीकृष्‍ण प्रसाद की रिपोर्ट. इनसे संपर्क मोबाइल नं. -09470400813 के जरिए किया जा सकता है.


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क्‍या गालियों से बात करते हैं हिंदुस्‍तान, धनबाद के संपादक?

हिंदुस्‍तान, धनबाद में स्थितियां काफी खराब होती जा रही हैं. खबर है कि संपादक के रवैये से कम से कम एक दर्जन कर्मचारी दूसरे जगहों पर नौकरी तलाश रहे हैं. संपादक के अपशब्‍द बोलने का रवैया इन कर्मचारियों को सबसे ज्‍यादा नागवार गुजर रहा है. छोटी-मोटी गलती होने पर भी कर्मचारियों को अपशब्‍द व गालियां सुननी पड़ रही हैं. वहीं जूनियरों को बड़ी जिम्‍मेदारियां सौंप देने से भी यूनिट के अंदर तनाव फैला हुआ है. अगर प्रबंधन ने ध्‍यान नहीं दिया तो उसे यहां तगड़ा झटका लग सकता है.

सूत्रों का कहना है कि संपादक अपने जाति और रिश्‍तेदारों को पूरी तरह प्रश्रय दे रहे हैं. उन्‍होंने प्रभात खबर, देवघर में कार्यरत अपनी ही जाति के दो सब एडिटरों वरुण सिंह एवं प्रभात पराशर को हिंदुस्‍तान में ज्‍वाइन कराया है. ज्‍वाइन कराने के कुछ समय बाद ही उन्‍होंने पराशर को सिटी इंचार्ज बना दिया, जबकि इनसे सीनियर पदों पर तमाम लोग पहले से हिंदुस्‍तान में कार्यरत थे. वहीं सिटी इंचार्ज की जिम्‍मेदारी संभाल रहे राजकुमार को दुमका पेज देखने के लिए लगा दिया गया.

बताया जा रहा है कि यह यूनिट एक खास बिरादरी का जागीर बन गया है. यूनिट हेड, समाचार संपादक तथा संपादक तीनों एक ही बिरादरी से ताल्‍लुक रखते हैं लिहाजा यहां की कोई भी गलत-सही बातें जल्‍दी यूनिट से बाहर नहीं निकल पाती हैं. अन्‍य कर्मचारियों की कोई बात सुनी ही नहीं जाती है, जिससे वे बुरी तरह परेशान हैं. समाचार संपादक सत्‍यभूषण सिंह ऊर्फ बड़कू सिंह पिछले दस सालों से यहां टिके हुए हैं. उनके चलते यहां की स्थिति और भी खराब हो रही है. वे संपादक के कान भरते हैं और संपादक कर्मचारियों से अपनी शैली में बात करते हैं.

सूत्रों का कहना है कि कुछ लोगों ने यहां की स्थितियों से एचआर के लोगों भी अवगत कराया है. हालांकि इस संदर्भ में जब संपादक गीतेश्‍वर प्रसाद सिंह का पक्ष लेने के लिए बात की गई तो उन्‍होंने सवालों का जवाब देने की बजाय मीटिंग में होने की बात कहते हुए बाद में बात करने को कहा.

हिंदुस्‍तान, बरेली में संजीव गंभीर बर्खास्‍त, नवीन का इस्‍तीफा

हिंदुस्‍तान, बरेली से खबर है कि सीनियर रिपोर्टर संजीव गंभीर को बर्खास्‍त कर दिया गया है. संजीव पर आरोप है कि वे लंबे समय से छुट्टी पर चल रहे थे. वे हिंदुस्‍तान की बरेली में लांचिंग के समय से जुड़े हुए थे. इसके पहले वे अमर उजाला को अपनी सेवाएं दे रहे थे. इनके पहले डीएनई बृजेंद्र निर्मल को भी अनुशासनहीनता के आरोप में बर्खास्‍त कर दिया गया था.

हिंदुस्‍तान, बरेली से ही दूसरी खबर है कि रिपोर्टर नवीन पपने से प्रबंधन ने इस्‍तीफा मांग लिया है. नवीन का संबंध अब अखबार से खतम हो गया है. उन पर काम में लापहरवाही बरतने का आरोप था. नवीन अपनी नई पारी कहां से शुरू करेंगे इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है. समझा जा रहा है कि आने वाले दिनों में काम में लापरवाही करने वाले और लोगों पर गाज गिर सकती है.  

संपादक से अभद्रता करने वाले डीएनई बृजेंद्र निर्मल बर्खास्‍त

हिंदुस्‍तान, बरेली से खबर है कि संपादक कुमार अभिमन्‍यु से अभद्रता करने की गाज डीएनई बृजेंद्र निर्मल पर गिरी है. प्रधान संपादक शशि शेखर के निर्देश पर डीएनई बृजेंद्र निर्मल को बर्खास्‍त कर दिया गया है. इस कार्रवाई से एक मैसेज गया है कि प्रबंधन ने बरेली को सुधारने के लिए फ्री हैंड देकर भेजा है. बरेली में माहौल काफी समय से खराब चल रहा है. आशीष व्‍यास जैसा सुलझा हुआ संपादक भी यहां की रानजीति के आगे टिक नहीं सका.

बताया जा रहा है कि इसी के बाद कुमार अभिमन्‍यु को प्रबंधन ने फ्री हैंड देकर यूनिट को सुधारने की जिम्‍मेदारी सौंपी थी. संपादक के कड़े कदम से तमाम लोगों को दिक्‍कतें हुई, कुछ लोग छोड़कर गए तो कुछ लोगों को निकाला गया. अब डीएनई के बर्खास्‍तगी के बाद विरोधी गुट पूरी तरह सकते में है. संभावना है कि प्रबंधन के इस कठोर कदम के बाद यहां की स्थितियों में कुछ सुधार देखने को मिले.

हिंदुस्‍तान, बरेली में संपादक एवं डीएनई के बीच गाली-ग्‍लौज

हिंदुस्‍तान, बरेली में स्थितियां सुधर नहीं रही हैं. खबर है कि गुरुवार की शाम वेतन के मामले को लेकर संपादक तथा डीएनई के बीच सरेआम गरमा-गरमी हुई. बात अपशब्‍दों से होते हुए हाथापाई की नौबत तक पहुंच गई, परन्‍तु एनई ने बीच बचाव कर मामले को सलटा लिया. इस मामले की जानकारी प्रधान संपादक शशि शेखर तक पहुंच गई है. बताया जा रहा है कि उनके निर्देश पर अनुशासनात्‍मक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है.

खबर के अनुसार बीमार होने के चलते डीएनई बृजेंद्र निर्मल अवकाश पर थे. संपादक कुमार अभिमन्‍यु ने कुछ समय पहले ही उन्‍हें अपकंट्री हेड बनाया था. इस दौरान उन्‍होंने बृजेंद्र निर्मल से कहा था कि आप मेडिकल दे दीजिएगा तो नियमानुसार आपकी सैलरी नहीं कटेगी. परन्‍तु उन्‍होंने मेडिकल नहीं दिया, जब कल बृजेंद्र निर्मल की सैलरी आई तो उसमें दस दिन का वेतन कटा हुआ था. इसी बीच संपादक कुमार अभिमन्‍यु कल शाम पांच बजे परसाखेड़ा स्थि‍त हिंदुस्‍तान कार्यालय पहुंचे तो बृजेंद्र निर्मल उनसे सैलरी काटे जाने की बाबत पूछने लगे.

इसको लेकर गरमा गरमी हो गई. संपादक अपने केबिन में चले गए. बृजेंद्र निर्मल ने मेल से उन्‍हें नोटिस दे दिया. संपादक ने निर्मल को अपने केबिन में बुलाया तथा अपनी बात रखने को कहा, परन्‍तु अमूमन शांत रहने वाले बृजेंद्र निर्मल सैलरी काटे जाने से इतना खफा थे कि वे थोड़ी तेज आवाज में बात करने लगे. इसी को लेकर संपादक कुमार अभिमन्‍यु ने भी कुछ बोला, जिसके बाद बहस तेज हो गई. सूत्रों का कहना है कि बात गाली ग्‍लौज तक पहुंच गई. परन्‍तु एनई योगेंद्र रावत ने बीच बचाव कर मामले को सुलझाया.

इस घटना के बाद बृजेंद्र निर्मल काम छोड़कर घर चले गए. बताया जा रहा है कि उन्‍होंने वरिष्‍ठों को इसकी जानकारी दी. संपादक ने भी इस मामले से सीनियर लोगों को अवगत कराया. यह मामला प्रधान संपादक शशि शेखर के संज्ञान में भी पहुंचा. उन्‍होंने इस मामले की पूरी जानकारी लिया. हालांकि हिंदुस्‍तान, बरेली से पिछले कुछ समय में कई लोगों ने इस्‍तीफा दे दिया है. इस अखबार के भीतर की स्थितियां काफी बिगड़ चुकी हैं.

बरेली में हिंदुस्‍तान ने आयोजित किया ट्रेड फेयर

हिंदुस्‍तान अपने ब्रांडिंग के लिए नए-नए तरीके अपना रहा है. बरेली से खबर है कि यहां पर अपना ब्रांड मजबूत करने के लिए हिंदुस्‍तान अखबार 'इवेंट पैराडाइज' नाम के आर्गेनाइज के साथ मिलकर एक ट्रेड फेयर का आयोजन किया है. 24 फरवरी से 4 जनवरी तक चलने वाले इस फेयर को बरेली में राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान पर लगाया गया है. इस ट्रेड फेयर में डेढ़ सौ से ज्‍यादा स्‍टाल लगाए गए हैं, जिसमें बुक से लेकर ऑटोमोबाइल तक के स्‍टाल लगाए गए हैं.

बताया जा रहा है कि हिंदुस्‍तान ने बरेली में अपनी ब्रांडिंग मजबूत करने के लिए यह प्रयोग किया है. प्रबंधन की सोच है कि इससे ज्‍यादा से ज्‍यादा लोग अखबार के बारे में जाने और समझें. अखबार की दुनिया में यह पहली तरह का प्रयोग है. अब तक तमाम अखबार छोटे मोटे कार्यक्रम आयोजित कर उसके मीडिया पार्टनर बनते थे और कवरेज करते थे, परन्‍तु इस ट्रेड फेयर में हिंदुस्‍तान अखबार की सीधी भागीदारी है. माना जा रहा है कि इससे अखबार को सर्कुलेशन के अलावा मार्केट का भी फायदा मिलेगा. आईआरएस के आंकड़ों के अनुसार बरेली में हिंदुस्‍तान नम्‍बर एक के पायदान पर काबिज है.

हिंदुस्‍तान ने मुरादाबाद के पाठकों को बनाया मूर्ख

यशवतंजी, नमस्‍कार. मुरादाबाद हिंदुस्‍तान अपने पाठकों को कैसे बेवकूफ बना रहा है, इसका उदाहरण देखें. हिंदुस्‍तान में शनिवार को खबर लिखी गई कि विधायक को आज मिलेगी लालबत्‍ती. ये खबर सोमवार के अखबार में छपी. विधायक समर्थक इंतजार करते रहे लेकिन लाल बत्‍ती की घोषणा नहीं हुई. बस फिर क्‍या था, हिंदुस्‍तान के दफ्तर में फोन घनघनाने लगे, लेकिन हिंदुस्‍तान के अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं था.

मंगलवार को लोग इंतजार करते रहे कि शायद आज इस बारे में कुछ खबर छपे लेकिन हिंदुस्‍तान में इस बारे में एक लाइन की भी खबर नहीं छपी. सोचने वाली बात है कि इस तरह की खबर प्रमुख संवाददाता लिखता है और संपादक भी लगाने की अनुमति दे देते हैं. डेस्‍क भी नहीं देखती है. भगवान ही मालिक हैं हिंदुस्‍तान, मुरादाबाद के पाठकों का. नीचे देखिए खबर की कटिंग.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

”हिंदुस्‍तान अखबार में नौकरी पानी है तो कंप्रोमाइज करो या फिर पैसे दो”

यशवंत सिंह जी, भड़ास4मीडिया, महोदय। सविनय निवेदन यह है कि मैं एक कवयित्री हूँ, अपनी कविताओं को सुनाकर कर अपना व अपने परिवार का जीवनयापन कर रही हूँ। मुझे मेरठ में हिन्दुस्तान अखबार में संपादक बताकर एक व्यक्ति, जिनका नाम करण कश्यप है, ने मुझसे हिन्दुस्तान अखबार में नौकरी लगवाने के नाम पर 2 लाख रुपये ठग लिए। मैंने कई जगह शिकायत की पर हर जगह से मुझे बैरंग ही वापस लौटना पड़ा। अब थक हार कर अंत में आपसे मदद मांग रही हूँ कि आप कृपया इसमें किसी स्तर पर मेरी मदद करें।  

कई लोगों ने मुझे बताया कि अब कहीं मदद मिल सकती है तो वो सिर्फ आपके पास से ही मिल सकती है। मैं काफी दुखी मन से ये लिख रही हूँ।  इस मेल में मेरा नाम पता सब है व साथ ही मैं वह शिकायत पत्र भी अटैच कर रही हूँ, जिसमें करण कश्यप के खिलाफ शिकायत पुलिस में की है, पर वहां से मुझे कोई मदद नहीं मिली। पुलिस ने मुझे ही यह कहकर भगा दिया कि वह (करण कश्यप) पत्रकार है, तूझे जीने नहीं देगा। चुपचाप अपने घर जाकर बैठ जा।
 
अस्मि सागर 
कामना, वैशाली,
गाज़ियाबाद, उत्‍तर प्रदेश 

शोभना भरतिया, अमित चोपड़ा, शशि शेखर, अकु श्रीवास्‍तव एवं विनोद बंधु के खिलाफ याचिका दायर

: अवैध प्रकाशन को लेकर मुंगेर में दायर हुआ मुकदमा : मुंगेर। मुंगेर के सामाजिक कार्यकर्ता मंटू शर्मा ने मुख्‍य न्यायिक दंडाधिकारी मनोज कुमार सिन्हा की अदालत में 'द हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड' (एचएमवीएल) की अध्यक्ष शोभना भरतिया, नई दिल्ली, प्रधान संपादक हिन्दुस्तान शशि शेखर, कार्यकारी संपादक हिन्दुस्तान, पटना संस्करण अकु श्रीवास्तव, उप-स्थानीय संपादक, भागलपुर संस्करण विनोद बंधु, प्रकाशक अमित चोपड़ा और मुद्रक के विरूद्ध प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन एवं बुक्‍स एक्ट, 1867 की धारा 8/बी 14 एवं 15 और भारतीय दंड संहिता की धारा 420/471 एवं 476 के तहत 18 अक्‍टूबर को परिवाद-पत्र, जिसकी संख्या- 993सी0/2011 है, दायर किया है।

24 अक्‍टूबर को मुंगेर के वरीय अधिवक्ता अशोक कुमार ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मनोज कुमार सिन्हा के समक्ष परिवाद पत्र को स्वीकार करने, वादी मंटू शर्मा का बयान दर्ज करने और इसे संज्ञान लेकर एचएमवीएल के नामजद सभी लोगों के विरूद्ध सम्मन जारी करने की प्रार्थना की। उन्होंने न्यायालय को बताया कि देश के इस शक्तिशाली मीडिया समूह ने किस प्रकार 2001 से अब तक बिना अखबार का रजिस्‍ट्रेशन कराए भागलपुर स्थित प्रिंटिंग प्रेस से अवैध ढंग से दैनिक हिन्दुस्तान का प्रकाशन किया है और अब तक करता आ रहा है। एचएमवीएल के पक्ष के सभी लोग अवैध ढंग से बिना रजिस्‍ट्रेशन के ही मुंगेर संस्‍करण छापकर वितरित कर कर रहे हैं और केन्द्र और राज्य सरकारों से करोड़ों रुपये सरकारी विज्ञापन के मद में बटोर रहे हैं। यह ससबूत सरकारी लूट का मामला है। इस लूट में सरकार के अधिकारी भी शामिल हैं।

मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने वरीय अधिवक्ता अशोक कुमार से एक प्रश्न का जवाब मांगा– ‘अखबार के अवैध प्रकाशन और राजस्व लूट से संबंधित क्रिमिनल अफेंस की धाराएं कहां हैं?’’ वरीय अधिवक्ता अशोक कुमार ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन एवं बुक्‍स एक्ट की धारा 14 और 15 पेश किया और कहा कि इन धाराओं के तहत अवैध प्रकाशन के लिए 6 माह की सजा और दो हजार रुपए जुर्माना का प्रावधान है। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने संबंधित धाराओं से संबंधित ला बुक को अधिवक्ता से रेफरेंस के लिए सुपुर्द करने का आदेश दिया। अधिवक्ता ने संबंधित धाराएं 14 और 15 से संबंधित प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन एंव बुक्‍स एक्ट की पुस्तक न्यायालय को सुपुर्द कर दिया।

न्यायालय ने इस परिवाद पत्र को स्वीकार करने के बिन्दु पर अपना फैसला 25 अक्‍टूबर तक सुरक्षित रखा। पुनः न्यायालय ने इस परिवाद पत्र को न्यायालय में स्वीकार करने के बिन्दु पर अपना फैसला 29 अक्‍टूबर तक सुरक्षित रखा है। न्यायालय में बहस के दौरान वरीय अधिवक्ता अशोक कुमार के समर्थन में वरीय अधिवक्ता काशी प्रसाद, अजय तारा, बिपिन मंडल एवं अन्य ने सहयोग किया।

परिवाद पत्र के समर्थन में वादी मंटू शर्मा ने 30 जून, 2011 और 01 जुलाई, 2011 का मुंगेर संस्करण का दैनिक हिन्दुस्तान सुपुर्द किया है। 30 जून, 11 के दैनिक हिन्दुस्तान में अखबार ने प्रिंट लाइन में अपने अखबार का रजिस्‍ट्रेशन नं0-44348/86 लिखा है जबकि एक दिन बाद इसी अखबार ने अपने प्रिंट लाइन में रजिस्‍ट्रेशन नंम्‍बर के स्थान पर ‘आवेदित’ लिखा है। परिवाद पत्र में मंटू शर्मा ने लिखा है कि इससे प्रमाणित होता है कि अखबार 2001 से अवैध ढंग से फर्जी रजिस्ट्रेशन नंम्बर छापकर सरकार का करोड़ों रुपए का विज्ञापन गलत तरीके से बटोर रहा था।

वादी मंटू शर्मा ने अपने मुकदमे के समर्थन में भागलपुर के जिला पदाधिकारी की उस रिपोर्ट की प्रति संलग्न की है, जिसमें जिलाधिकारी ने पत्रांक-145/जि0ज0स0/दिनांक-3 अप्रैल, 2010 के जरिए उप-प्रेस पंजीयक, नई दिल्ली को पत्र लिखकर सूचित किया है कि भागलपुर के जिलाधिकारी के कार्यालय में दैनिक हिन्दुस्तान के निबंधन से संबंधित दस्तावेजी सबूत उपलब्ध नहीं है। मंटू शर्मा ने अपने मुकदमे के समर्थन में प्रेस रजिस्‍ट्रार, नई दिल्ली के कार्यालय की अनुभाग अधिकारी पूर्णिमा मलिक के उस पत्र की फोटोप्रति सुपुर्द की है, जिसमें पूर्णिमा मलिक ने स्पष्ट लिखा है कि हिन्दुस्तान समाचार पत्र का मुद्रण केवल पटना से ही हो सकता है, क्योंकि उसने केवल पटना से ही मुद्रण की स्वीकृति ली है। यह पत्र पूर्णिमा मलिक ने 20 अप्रैल, 2006 को बिहार के सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय के सचिव विवेक कुमार सिंह को भेजा था। मंटू शर्मा ने अपने मुकदमे के समर्थन में बिहार सरकार के वित्त जांच विभाग का अंकेक्षण प्रतिवेदन संख्या- 195/05-06 की वह रिपोर्ट संलग्न की है, जिसमें अंकेक्षण दल ने स्पष्ट लिखा है कि दैनिक हिन्दुस्तान किस प्रकार अवैध ढंग से भागलपुर और मुजफ्फरपुर से अखबार प्रकाशित कर रहा है और राज्य सरकार का सरकारी विज्ञापन अवैध ढंग से छाप रहा है, जो राशि वसूलनीय है।

मुंगेर से श्रीकृष्ण प्रसाद की रिपोर्ट.