मामला सीधे तौर पर मुल्क के स्वाभिमान से जुड़ जाए, तो छोटी-सी बात बहुत बड़ी बन जाती है। ऐसा ही कुछ दो इतालवी नौसैनिकों के मामले को लेकर हो रहा है। इटली सरकार भारत के कानून को ठेंगा दिखाने पर उतारू हो गई है। उसने दिल्ली के तमाम राजनीतिक और कूटनीतिक दबाव के बाद भी अपना रवैया बदलने के संकेत नहीं दिए। जबकि इस मुद्दे को लेकर भारतीय संसद में बड़ा बवेला मच गया है।
सभी दलों की चिंता यही हो गई है कि आखिर इटली जैसे देश जब चाहे अपनी सुविधा को देखते हुए हमें ठेंगा दिखाने की हिम्मत कैसे कर लेते हैं? यूं तो प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने हुंकार भरी है कि यदि आरोपी नौसैनिकों को भारत वापस नहीं भेजा गया, तो हठधर्मिता का यह रवैया इटली को बहुत महंगा साबित होगा।
अब अहम सवाल यह बन गया है कि भारत सरकार ने इटली के प्रति जो कड़ा रवैया अपनाया है, वह वाकई में कितना दमदार है? क्योंकि, पहले भी कई मौकों पर यूरोप के इस छोटे से देश ने भारत सरकार की जरूरतों की ज्यादा परवाह नहीं की। इस वजह से कई बार कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकारों को अपने यहां भारी राजनीतिक किरकिरी झेलनी पड़ी है। ‘इटली कनेक्शन’ की बात करके विपक्षी दल कांग्रेस नेतृत्व के रवैए पर वैसे भी तीखे कटाक्ष करने से बाज नहीं आते। पिछले दिनों वीवीआईपी हेलीकॉप्टर खरीद के सौदे में भारी रिश्वतखोरी का मामला उछला है। इसके भी तार इटली से जुड़े हुए हैं। क्योंकि, इटली की कंपनी फिनमैक्कनिका ने 12 हेलीकॉप्टर आपूर्ति का ठेका लिया था। फरवरी 2010 में यह सौदा किया गया था। आरोप है कि यह टेंडर हासिल करने के लिए इटली की कंपनी ने करीब 362 करोड़ रुपए की रिश्वत भारत भेजी थी।
इस मामले में भी यहां भारी राजनीतिक सरगर्मी शुरू हो गई है। इस प्रकरण की जांच के लिए सीबीआई को लगा दिया गया है। पिछले दिनों सीबीआई की एक जांच टीम इटली भेजी गई थी। लेकिन, वहां पर अदालत और सरकार का रवैया सहयोग का नहीं रहा। तमाम अनुरोध के बावजूद इटली का प्रशासन सीबीआई को घोटाले के प्रमाण दिलवाने में मदद नहीं कर रहा। सीबीआई के आलाधिकारियों ने इटली के रवैए की शिकायत भी की है।
विवाद का ताजा मामला दो इतालवी नौसैनिकों का है। पिछले साल फरवरी में इतालवी पोत ‘एनारिका लैक्सी’ के दो पोत रक्षकों ने केरल के तट पर दो भारतीय मछुआरों को गोली मार दी थी। दोनों की मौत भी हो गई थी। दरअसल, इतालवी नौसैनिकों ने भारतीय मछुआरों को समुद्री डाकू समझ लिया था। इस हादसे के चार दिन बाद इतालवी पोत के उन दो नौसैनिकों को गिरफ्तार कर लिया गया, जिनकी गोलियों से मछुआरे मारे गए थे। इन दोनों पर केरल की एक स्थानीय अदालत में हत्या का मुकदमा शुरु हुआ। इतालवी नौसैनिकों के नाम मैसीमिलयानो लैटोर और शैलवाटोर गिरोन हैं।
गरीब मछुआरों की हत्या को लेकर केरल में बड़ा असंतोष भड़कने लगा था। इसको देखते हुए केरल सरकार ने इटली के नौसैनिकों को कोई रियायत न देने का पक्का आश्वासन दिया था। इसके बाद ही मछुआ समाज का गुस्सा कुछ थमा था। पिछले साल क्रिसमस के मौके पर इटली सरकार ने अनुरोध किया था कि त्यौहार मनाने के लिए इन दोनों को पैरोल पर इटली आने की इजाजत दे दी जाए। केरल हाईकोर्ट के निर्देश के बाद इन दोनों को अपने देश में क्रिसमस मनाने के लिए भेज भी दिया गया था। वायदे के अनुरूप ये लोग इटली से लौट भी आए थे।
इस साल 24-25 फरवरी को इटली में आम चुनाव हो रहे थे। ऐसे में, इटली सरकार ने अनुरोध किया था कि उनके दोनों नौसैनिकों को मतदान में हिस्सा लेने के लिए पैरोल पर आने की इजाजत दी जाए। इटली के दिल्ली स्थित राजदूत डेनिली मेनसिनी ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा भी इस बावत दिया था। इसमें उन्होंने गारंटी ली थी कि चार सप्ताह के अंदर दोनों लोग भारतीय न्यायालय का सामना करने के लिए लौट आएंगे। इस वायदे के अनुरूप उन्हें 23 मार्च तक इटली से लौट आना चाहिए। इसी बीच इटली सरकार ने इस मामले में एकदम पैंतरा बदल डाला। 6 मार्च को भारतीय विदेश मंत्रालय को इटली सरकार ने खबर दी कि अब आरोपी नौसैनिकों को भारत वापस नहीं भेजा जाएगा। क्योंकि, इन लोगों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा में मछुआरों को डाकू समझकर गोली मारी थी। ऐसे में, संयुक्त राष्ट्र संधि 1982 के तहत इन पर मुकदमा अंतरराष्ट्रीय अदालत में ही चलाया जा सकता है।
जबकि, केरल सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि गोली बारी की घटना केरल के पास भारतीय समुद्री सीमा में हुई है। ऐसे में, आपराधिक मामला भारतीय अदालतों के आधीन ही चलेगा। इटली सरकार की तरफ से भारत में इस मुकदमे की पैरवी सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे करते आए हैं। साल्वे भी इटली सरकार के हठधर्मी रवैए से हैरान हो गए हैं। उन्होंने कह दिया है कि नौसैनिकों को वापस भेजने से इनकार करके इटली ने सरासर विश्वासघात किया है। जबकि, इस सरकार की ओर से उनके राजदूत ने वापसी गारंटी का हलफनामा दिया था। इससे मुकरना भारत की अदालत का सरासर अपमान जैसा है। उन्होंने नाराजगी में अपने को इस मुकदमे से अलग कर लिया है।
मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने यह मामला दोनों सदनों में उठा दिया है। आरोप लगाया कि इटली सरकार के प्रति भारत इस मामले में दब्बूपन का रवैया दिखा रहा है। इस पर विपक्ष के सभी दलों ने तीखे तेवर अपनाए तो प्रधानमंत्री को भी कड़ा रुख अपनाना पड़ा। उन्होंने ऐलान किया कि इटली का रुख भारत सरकार को मंजूर नहीं है। बुधवार को भी संसद के दोनों सदनों में यह मामला उठा। इस पर प्रधानमंत्री ने यहां तक कह दिया कि यदि इटली वायदे के अनुरूप तय समय सीमा में दोनों आरोपियों को वापस नहीं भेजता, तो इसका उसे बड़ा खामियाजा उठाना पड़ सकता है।
दरअसल, यूपीए प्रमुख सोनिया गांधी का मायका इटली में है। ऐसे में, आरोप लगता है कि सरकार का रुख इटली के प्रति लचीला रहता है। याद कीजिए, बहुचर्चित बोफोर्स तोप घोटाले में इटली के व्यापारी क्वात्रोची का नाम आया था। सीबीआई ने इस मामले में उनकी मुख्य भूमिका भी मानी थी। लेकिन, भारत सरकार की लापरवाही के चलते क्वात्रोची को भारत से इटली भाग जाने दिया गया। इसको लेकर विपक्ष आरोप लगाता रहा है कि सोनिया गांधी परिवार से क्वोत्रोची के निजी रिश्तों के चलते उसे जानबूझकर राहत दी गई।
संसद के सत्र में हेलीकॉप्टर घोटाले में भी ‘इटली कनेक्शन’ को लेकर विपक्ष ने कांग्रेस नेतृत्व पर तीखे कटाक्ष किए हैं। नौसैनिकों वाले मामले में शांत स्वभाव वाले प्रधानमंत्री ने जिस तरह से हुंकार लगाई है, वह भी दुर्लभ किस्म की है। अहम सवाल यह है कि क्या मनमोहन सरकार वाकई में इटली सरकार को सबक सिखाने का हौसला दिखा सकती है? क्योंकि, इटली के रवैए में अभी तक किसी बदलाव के संकेत नहीं मिले। भारत की राजनीति ने इस मामले को सीधे तौर पर देश की राष्ट्रीय अस्मिता से जोड़ लिया है। वैसे भी एकदम से भारत को ठेंगा दिखाने की नीति दादागीरी की ही मानी जाएगी।
इस संदर्भ में लोग लतीनी-अमेरिकी देश वेनेजुएला के राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज की दमदारी की याद करते हैं। शावेज का
पिछले दिनों ही निधन हुआ है। वे 15 साल तक लगातार अमेरिका जैसे बलशाली देश को ललकारते रहे थे। यही कहते थे कि उनका मुल्क छोटा जरूर है, लेकिन उसका स्वाभिमान अमेरिका से कमतर नहीं है। सवाल है कि क्या भारत का नेतृत्व वाकई में इटली को सबक सिखाने की हिम्मत भी कर पायेगा?
लेखक वीरेंद्र सेंगर डीएलए (दिल्ली) के संपादक हैं। इनसे संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है।





