इलाहाबाद। सूबे में कानून व्यवस्था की धज्जियां अपने ही उड़ा रहे हैं। मंत्री और विधायक पर अगुंली उठती है पर सरकार इसे कम नहीं कर पा रही है। आए दिन कभी कुंडा कांड, कभी कैबिनेट मंत्री का अमेठी की महिला डीएम की खूबसूरती पर सार्वजनिक टिप्पणी… क्या कहा जाए।
सपा सरकार के ‘टीपू सुल्तान’ कहे जाने वाले अखिलेश यादव को सत्ता की गद्दी संभाले एक साल हो गए हैं इसके बावजूद चारों ओर हाहाकार मचा हुआ है। सामान्य आदमी से लेकर पुलिस अफसर तक की हत्या की जा रही है। सपाई और प्रशासन की कुर्सी पर बैठे सीनियर अफसर हो सकता है न मानें पर आमजन तो इसे जंगलराज से भी बदतर मान रही है। 14 मार्च को इलाहाबाद जिले के नवाबगंज थाना क्षेत्र स्थित मुबारकपुर गांव में सपा विधायक अंसार अहमद के समर्थकों ने दबंगई का जमकर नंगा नाच खेला। कई घंटे तक हुए तांडव में इलाहाबाद की ‘बहादुर-पुलिस’ बैकफुट पर रही।
मुबारकपुर में दबंगों ने रईस धोबी नामक दलित का दिनहाड़े मकान फूंक दिया। घर में मौजूद बूढ़ी मां, बहन समेत तीन महिलाओं ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई। दिनदहाड़े हुई इस घटना से गांव में दहशत है। गांव के ही तीन लोगों के खिलाफ नामजद तहरीर दी गई है। पुलिस ने घटना की पुष्टि तो की है पर अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है। रईस अहमद बसपा का पुराना स्थानीय नेता है। मौजूदा समय में रईस अहमद मुस्लिम भाईचारा कमेटी के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। गांव के कुछ लोगों से रंजिश चल रही है।
बसपा के पूर्व विधायक गुरुप्रसाद मौर्य के कार्यकाल में करीब दो साल पहले रईस अहमद को विधायक निधि से इंडिया मार्का टू हैंडपंप दिया गया था। इस हैंडपंप को रईस अहमद ने अपने दरवाजे के सामने लगाया। रईस अहमद की मां के मुताबिक बुधवार को पड़ोसियों ने उसके हैंडपंप का हत्था जबरन निकाल लिया था। इसकी शिकायत नवाबगंज थाने में की गई। पुलिस ने मामले को हल्के में लिया। कोई कार्रवाई न होने पर भुक्तभोगी ने बसपा नेता व पूर्व विधायक गुरुप्रसाद मौर्य से शिकायत की। बताया जा रहा है कि गुरुप्रसाद मौर्य ने नवाबगंज पुलिस से बात की।
गुरुवार को भोर में मनबढ़ पड़ोसियों ने रईस अहमद के मकान में आग लगा दी। देखते ही देखते दलित रईस अहमद का घर धू-धू कर जल गया। आरोपियों के दबंगई को देखते हुए गांव के लोग आग बुझाने की मदद तक नहीं कर सके। थाने पहुंचकर रईस अहमद की मॉ ने गांव के ही तीन लोगों के खिलाफ नामजद तहरीर दी है। अभी तक पुलिस ने मामले में रिपोर्ट तक दर्ज नहीं किया है। उधर, पूर्व विधायक गुरुप्रसाद मौर्य ने लखनऊ से फोन पर बातचीत करते हुए बताया कि मामले को पार्टी गंभीरता से लेगी। नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य को घटना से अवगत कराया जाएगा। जरूरत पड़ने पर विधानसभा में भी इस मामले को उठाया जाएगा।
सत्ता बदलते ही हुआ था जानलेवा हमला : विधानसभा चुनाव के बाद बसपा सरकार के जाते ही रईस अहमद पर जानलेवा हमला हुआ था। हमलावरों ने इसका हाथ पैर तोड़कर उसे मरणासन्न हालत में छोड़ा था। उसी समय रईस अहमद ने स्थानीय पुलिस से सुरक्षा मांगी थी। उस समय भी कोई कार्रवाई न होने पर रईस अहमद को स्थानीय पुलिस चौकी डांडी में रहकर वक्त काटने को मजबूर होना पड़ा था। इस घटना के बाद से ही रईस अहमद भयवश घर छोड़कर बाहर रह रहा है।
इलाहाबाद से शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट.





