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झूठे हैं पाकिस्तानी अख़बार, अब नहीं बिकेंगे अफगानिस्तान में

अफ़ग़ानिस्तान हुकूमत ने पाकिस्तान से वहां पहुंचने वाले सारे अख़बारों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं. आंतरिक मंत्रालय ने पुलिस को हुक्म दिया है कि वो मुल्क के पूर्व में पाए जाने वाले सभी पाकिस्तानी अख़बारों की कापियां ज़ब्त कर ले.

 
मंत्रालय का कहना है कि पाकिस्तानी समाचारपत्र "तालिबान के प्रवक्ताओं के विचारों को फैलाने का एक ज़रिया हैं." अफ़ग़ानिस्तान ने अख़बारों के ख़िलाफ़ ये क़दम तब उठाया है जब पाकिस्तान के साथ उसके रिश्तों में पहले से ही तनाव है.
 
अफ़ग़ान आंतरिक मंत्रालय ने पुलिस से कहा है कि वो तोरखाम सीमा प्रवेश पर विशेष रूप से ध्यान रखे. तोरखाम एक व्यस्त बार्डर है. मंत्रालय ने पुलिस को कहा है कि वो तीन पूर्वी प्रांतो नंगरहार, कुनार, और नूरिस्तान में पाकिस्तानी अखबारों ज़ब्त कर ले.
 
मंत्रालय का कहना है कि पाकिस्तानी अखबारों में ख़बर "वास्तविकता पर आधारित नहीं है और यह हमारे देश के पूर्वी प्रांतो में रह रहे शहरियों के लिए चिंता पैदा कर रही हैं."
 
संवाददाताओं का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में सीमा पार से होने वाली हिंसा एक बेहद संवेदनशील मुद्दा बन गया है, ख़ासतौर पर इसलिए क्योंकि पाकिस्तान और तालिबान के संबंध पुराने हैं.
 
गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्री ज़ल्माई रसूल ने कहा कि सीमा पार से हुए हमलों में काफ़ी नागरिकों की मौतें हुई हैं.
 
 
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सीमा के आरपार हुई गोलाबारी से लगभग 4,000 विस्थापित हो गए हैं. पिछले महीने अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई और उनके पाकिस्तानी समकक्ष आसिफ अली जरदारी ने गोलीबारी की जांच के लिए एक संयुक्त सैन्य प्रतिनिधिमंडल भेजने पर सहमति जताई थी.
 
पाकिस्तान का कहना है कि उसके इलाक़े में हिंसा तालिबान के उस समूह के ज़रिए की जा रही हैं जिसने अफ़ग़ानिस्तान में पनाह ले रखी है. उसका कहना है कि वो उन चरमपंथियों को निशाना बना रहा है जिन्होंने पड़ोसी मुल्क में ठिकाने बना लिए हैं. (बीबीसी)
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