पत्रकार संगठनों से अपील है, वे आगे आयें और यूएनआई को मरने से बचायें

यूएनआई और इसकी हिंदी शाखा यूनिवार्ता की हालत खस्ता है। दूसरों की खबर देने वाली यह राष्ट्रीय न्यूज एजेंसी खुद खबरों में हैं। समस्त कर्मचारियों को पिछले आठ महीने से वेतन नहीं मिला है। किराये के मकान में रह रहे कर्मचारियों को मकान मालिकों ने मकान खाली कराने की नोटिस दे दिया है। किराना दुकानदारों ने उधार देना बंद कर दिया है। फीस का भुगतान न करने के कारण बच्चों के स्कूल से नाम कट रहे है। कर्मी धन संकट के कारण बेटियों के हाथ पीले नहीं कर पा रहे हैं लेकिन निष्ठुर प्रबंधन को इसकी कोई चिंता नहीं। हाल ही में चेयरमैन के एक नोटिस से कर्मियों के होश फाख्ता है। नोटिस संलग्न है। यूनियन की क्या हालत है किसी से छिपी नहीं।

    
यूएनआई की स्थापना कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने की थी। आज सारे नेता चुनाव में लाखों-करोड़ों फूंक रहे हैं लेकिन कर्मियों के पेट में लगी आग को शांत करने की दिशा में किसी की कोई दिलचस्पी नहीं। धन्य हैं कांग्रेस के सूरमा नेतागण।

मेरी विनम्र अपील पत्रकार संगठनों से है। वे आगे आयें और इस संस्था को मरने से बचायें। कर्मचारियों के वेतन भुगतान की दिशा में जुझारू संघर्ष करें। जब बकाया वेतन मिलने के ही लाले पड़े हो तो मजीठिया वेज बोर्ड की अनुशंसाओं के आर्थिक फायदे की उम्मीद करना ही बेकार है। एक चुनौती है पत्रकार यूनियनों के समक्ष। देखना है कर्मियों के हित में आन्दोलन का कौन बीड़ा उठाता है।

यूएनआई के चेयरमैन का नोटिस

प्रिय साथियों,
                    यह संवाद अप्रैल 2013 से कर्मचारियों के वेतन के सिलसिले में मेरे कार्यालय को मिले विभिन्न ई मेल के संदर्भ में किया जा रहा है. कुछ पत्रों में मेरे हवाले से वेतन के बारे में बयान दिया गया है जिनका मैं पूरी तरह से खंडन करता हूं. मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि सारी स्थिति से आप सभी को अवगत कराया जाना चाहिए.

सबसे पहले हमें यह मालूम होना चाहिए कि यूनाइटेड न्यूज आफ इंडिया सेक्शन 25 की कंपनी ..अब नए कंपनी अघिनियम के तहत सेक्शन आठ की कंपनी… है जिसका स्वरूप धर्मार्थ संगठन के रूप में है जिसके मुनाफे को शेयरघारकों में भी वितरित नहीं किया जा सकता है. निदेशक मंडल के सदस्य न्यासी के तौर पर काम करते हैं और यथा संभव अपनी क्षमता का इस्तेमाल कंपनी की बेहतरी के लिए करते हैं.

कुछ साथी निदेशक मंडल/शेयर घारकों द्वारा नियुक्त सदस्यों को प्रबंधन के रूप में ले रहे हैं और उन्हें लगता है कि निदेशक मंडल/शेयर घारकों कर्मचारियों के वेतन तथा अन्य खर्च के भुगतान के लिए जिम्मेदारी है. मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह धर्मार्थ संगठन है इसलिए कर्मचारियो पर ही संगठन को आर्थिकरूप से मजबूत बनाने के लिए राजस्व की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी है. आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि यूएनआई के जरिए आर्थिक लाभ अर्जित नहीं होना है इसलिए ज्यादातर शेयर होल्डरों की रुचि इस संगठन को चलाने में नहीं है. शेयर धारकों की इस अरुचित के कारण कंपनी की सालाना आम बैठक में भी कोरम को पूरा करने में दिक्कत आती है. मै जब से कंपनी का चेयरमैन बना हूं निदेशक मंडल के किसी सदस्य ने कभी कंपनी को चलाने के लिए अपने स्तर पर पूरा प्रयास नहीं किया है. यह भी स्पष्ट करना चाहता हूं कि निदेशक मंडल की बैठक में शामिल होने के लिए हमने एक पैसा भी नहीं लिया है. यात्रा खर्च जैसा अन्य किसी तरह का खर्च भी नहीं लिया है और निदेशक मंडल की बैठक में अपने खर्च पर आते रहे हैं.

हमने जिन लोगों को कर्मचारियों के वेतन तथा कंपनी के अन्य खर्च की जिम्मेदारी सौंपी थी उन्होंने निराश किया है. निदेशक मंडल ने इसके लिए एक समिति बनाई थी और समिति के सभी 9 सदस्यों को कई बार स्पष्ट रूप से कहा गया था कि संगठन में वेतन और अन्य दैनिक खर्च को जुटाने की जिम्मेदारी संगठन के कर्मचारियों की है. मैं उस वस्तुस्थिति को स्पष्ट करना चाहता हूं कि कंपनी में चाहे लाभ हो या घाटा यह सब यूएनआई और इसके कर्मचारियों का ही है.

निदेशक मंडल ने पिछले दो साल में कंपनी के हित के लिए जो भी कदम उठाए हैं उसका विवरण भी आपके सामने रखता हूं.

1. निदेशक मंडल ने न्यायालय में कंपनी के खिलाफ चल रहे मीडिया वेस्ट प्रा.लि. के मामले को सफलतापूर्वक निबटाया है.यदि ऐसा नहीं हुआ होता तो संगठन को और समस्याओं का समना करना पडता.
2. पिछले एक साल से …इस माह को छोडकर… हर माह कम से कम एक बार कर्मचारियों के वेतन का भुगतान किया गया. निदेशक मंडल व्यक्तिगत पहल करके लगातार यह प्रयास करता रहा है. इस माह के वेतन में देरी निदेशक मंडल के खिलाफ प्रोविडेट फंड का पैसा जमा नहीं करने पर आपराघिक मामला दर्ज होने के कारण हुई है. यह शिकायत उन भटके हुए लोगों ने की है जो यूएनआई को चलते हुए नहीं देखना चाहते हैं. यूएनआई को बचाने के लिए 95 लाख रुपए प्रोविडेंट फंड में जमा कराए गए हैं और यह पैसा कर्मचारियों का ही जमा हुआ है.
3. लंबे समय से निश्चित अवघि के प्रोमशन लंबित पड़े थे उन प्रमोशन को मंजूरी दी गई है.
4. पहले जिन कर्मचारियों ने वीआरएस लिया था उनमें प्रत्येक के खाते में 25000 रुपए जमा कराए गए हैं.
5. संगठन के 9 वरिष्ठ कर्मचारियों की एक समिति बनाई गई थी जिसको निर्णय लेने और यूएनआई की उन्नति के लिए अपनी अनुषंसाएं देने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.
6. समाचारों में सुघार लाकर तथा उर्दू वेबसाईट विकसित करने जैसे कई कदम कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए उठाए गए.
7. निदेशक मंडल की सहायता से पिछले एक साल के दौरान वेबसाइट के लिए 70 लाख रुपए से अघिक का राजस्व जुटाया गया हेै.
8. सेक्शन 80 जी के तहत सरकार से मंजूरी हासिल की गई जिसके कारण यूएनआई को यदि कोई चंदा मिलता है तो उस पर कर में छूट मिल सके.
9. संगठन में कई स्तर पर खर्च में बडी कटौती इस तरह से की गई कि इसके संचालन पर इसका कोई विरीत असर नहीं पडे.

अब में आपके सामने संगठन के संचालन के संबंध में उस कड़वी सच्चाई को रखूंगा जिसे प्रत्येक कर्मचारी को व्यक्तिपरक ढंग से न लेकन निश्पक्षता से लेने की जरूरत है.

1. यूएनआई को साल दर साल भारी नुकसान हो रहा है. पिछले तीन साल का घाटा 23.67 करोड रुपए है. हर माह हम घाटे में चल रहे हैं और हमारा भुगतान आय की तुलना में कम है. हर माह हो रहे इस घाटे के कारण पीएफ. सर्विस टैक्स. कई बार वेतन का भुगतान तथा अन्य खर्चो के भगुतान में देरी हो रही है.

2. िदेशक मंडल ने जो 9 सदस्यीय समिति बनाई थी उसने अनुमान दिया था कि वे ग्राहक राजस्व को हर माह कम से कम 25 लाख रुपए बढाएंगे और ब्यूरो को और प्रभावी बनाकर संगठन को आर्थिक मजबूती प्रदान करेंगे लेकिन यह समिति इस उम्मीद पर खरी नहीं उतरी इसलिए उसे भंग करना पडा.

3. ज्यादातर ब्यूरो आफिस धाटे में चल रहे हैं और कंपनी में राजस्व को बढाने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहे हैं. यह ब्यूरोचीफ की जिम्मेदारी है कि वह ब्यूरो कार्यालय में वहां होने वाले खर्च से अघिक राजस्व अर्जित करे.

4. कई कर्मचारी अपने निजी लाभ के लिए यूएनआई ब्रांड का इस्तेमाल कर रहे हैं और यूएनआई को इस लाभार्जन के लिए उपयोग कर रहे हैं लेकिन यूएनआई के लिए कुछ भी मदद नहीं कर रहे हैं.

5. संगठन में अनुशासनहीनता तेजी से बढ़ रही है. कुछ कर्मचारी समय पर वेतन नहीं मिलने का हवाला देकर कंपनी को अपना पूरा समय नहीं दे रहे है. उन्हें जरूर यह आत्ममंथन करना चाहिए किं जिस माह उन्हें समय पर वेतन का भुगतान किया जा रहा है क्या उस माह उन्होंने अपना पूरा समय यूएनआई के लिए दिया है.

यह सब तथ्य नोटिस में लाकर मैं उन कर्मचारियों के साथ हूं जो ज्यादा संख्या में हैं. जो हर माह यूएनआई पर अपनी आजीविका के लिए निर्भर हैं. ऐसे समर्पित कर्मचारियों के लिए यूएनआई का चलते रहना आवश्यक है न कि उन कर्मचारियों के लिए जो अपने निजी स्वार्थ के लिए उसी पेड की षाखा को काट रहे हैं जिस पर वे बैठे हुए हैं. यूएनआई से जुडे हम सभी लोगों को इस सिद्धांत का पालन करना है कि …लोग आते जाते रहेंगे लेकिन यूएनआई को हमेशा चलते रहना है…

अंत में मैं आप सभी से कहूंगा कि अपने निजी पूर्वाग्रहों से उपर उठ और कंपनी के हित को ज्यादा महत्व दें. यूएनाई चलेगी तो हमारें भविष्य की उम्मीद बंधी रहेगी अन्यथा हम इतिहास का हिस्सा बन जाएंगे.

इसके साथ ही मैं सभी ब्यूरो आफिस के आय व्यय तथा संबद्ध ब्यूरो आफिस के जरिए ग्राहकों से आने वाले लंबित पैसे का विवरण पेश कर रहा हूं. मैं मुख्यालय के वरिष्ठ सहयोगियां ब्यूरो चीफ तथा यूएनआई के सभी सदस्यों से अनुरोध करूंगा कि वे कंपनी की आय बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रयास करें.

आइए हम सब मिलकर फिर से यूएनआई की सफलता के लिए काम करें और उन लोगों के अरमानों पर पानी फेरे जो संगठन से बाहर हैं ओर यूएनआई को नुकसान पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं. मैं यूएनआई में काम रहे सभी कर्मचारियों से अपील करता हूं वे कि किसी भी तरह से उन ताकतों के हाथों में खेलकर उन्हें समर्थन नहीं दें जो यूएनआई के बाहर खड़े होकर इस महान संगठन को बर्बाद करने पर तुले हैं. यह ताकते यूएनआई के खिलाफ काम करके यहां के कर्मचारियों और इस महान संगठन के साथ न्याय नहीं कर रहे हैं इसलिए किसी भी स्तर पर विघ्वंसक ताकतों का समर्थन नहीं करे और उनके बहकावे में नहीं आएं.

मैं निदेशक मंडल की तरफ से आप सभी को आश्वस्त करता हूं कि यूएनआई को फिर से उसकी पुरानी गरिमा लिाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जाएगी लेकिन यह काम सिर्फ यूनाइटेड न्यज आफ इंडिया के हितैशी कर्मचारियों के सहयोग से ही संभव हो सकता है.

घन्यवाद
विश्वास त्रिपाठी
चेयरमैन. यूएनआई निदेशक मंडल

 

पटना से एक पत्रकार की रिपोर्ट।

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