Rising Rahul : वो दिन मुझे शायद ही जिंदगी भर भूलें। मैं मेनस्ट्रीम मीडिया में आने की जद्दोजहद कर रहा था और Yashwant भाई मेनस्ट्रीम से बाहर निकलने का जोर लगा रहे थे। उस वक्त हमारे पास (हमारे इसलिए क्योंकि हिंदी ब्लॉगिंग में भड़ास ब्लॉग अपनी तरह का पहला प्रयोग था) जो आधार था, वह एकमात्र भड़ास ब्लॉग ही था जिसमें हम सभी पत्रकार अपना सुख-दुख ठीक उसी तरह शेयर करते थे, जैसा अब फेसबुक पर करते हैं।
लगभग रोज शाम को यशवंत भाई नोएडा सेक्टर 12 की तंग गली में अपनी लाल कार से आते थे और हम दोनों आधी रात के बहुत बाद तक शराब पीते, भड़ास निकालते। शायद वही वक्त था जब भड़ास गर्भस्थ हुआ। आज पांच साल के भड़ास को देखकर मुझे यशवंत भाई से ज्यादा खुद पर फख्र है कि हिंदी मीडिया में अपनी तरह का पहले सफल प्रयोग की शुरुआत में मैं साथ रहा। अभी भड़ास4मीडिया.कॉम में अपार संभावनाएं हैं जिसे लेकर मैं अक्सर यशवंत भाई को चिकोटी काटता रहता हूं और ये उनकी दिलनवाजी है कि वो मानते भी हैं। पांच साल के उतार चढ़ाव के बाद भड़ास अब दौड़ने लगा है, इसके लिए भड़ास की मां यशवंत सिंह को अनगिनत बधाइयां। सामने होते तो सशरीर बधाइयां देता.
पत्रकार राहुल के एफबी वॉल से साभार.
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