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बनारस

बनारस में फल-फूल रही है आस्था और पाखंड की दुकानदारी

वाराणसी। धर्म, आस्था एवं ज्ञान की खान बनारस (काशी) ज्योतिषियों के लिए भी प्रसिद्ध है। अपने आप में इतनी महत्ता समेटने के बावजूद आज आस्था और पाखंड की दुकानदारी चलाने वाले तथाकथित ज्योतिषियों के कारण यह शहर अपनी महत्ता खोता चला जा रहा है। दिन-प्रतिदिन आस्था और पाखंड का बाज़ारवाद बनारस में बढ़ता ही चला जा रहा है, जहाँ भी देखो वहाँ ये अपनी-अपनी दुकानें खोले बैठे हैं। आस्था एवं पाखंड के इस बाज़ारवादी घुड़दौड़ में एक-दूसरे को पछाड़ने के लिए इनमे होड़ सी मची है।

वाराणसी। धर्म, आस्था एवं ज्ञान की खान बनारस (काशी) ज्योतिषियों के लिए भी प्रसिद्ध है। अपने आप में इतनी महत्ता समेटने के बावजूद आज आस्था और पाखंड की दुकानदारी चलाने वाले तथाकथित ज्योतिषियों के कारण यह शहर अपनी महत्ता खोता चला जा रहा है। दिन-प्रतिदिन आस्था और पाखंड का बाज़ारवाद बनारस में बढ़ता ही चला जा रहा है, जहाँ भी देखो वहाँ ये अपनी-अपनी दुकानें खोले बैठे हैं। आस्था एवं पाखंड के इस बाज़ारवादी घुड़दौड़ में एक-दूसरे को पछाड़ने के लिए इनमे होड़ सी मची है।

इसी होड़ का नतीजा है कि विश्व प्रसिद्ध संकट मोचन मंदिर के समीप कई तथाकथित ज्योतिषाचार्यो ने अपनी-अपनी दुकाने सजाएँ रखी हैं, ताकि भक्तजनो को ठगा जा सके। कहा जाता है कि 'भेष से भीख़ मिलती' है सो ये सब चोंगाधारी पाखंडी पंडित टिका-फटीका, माला-झाला, मणि-फणि धारण कर आस्था के बाज़ार में भीख मांग रहे हैं। बनारस के इन तथाकथित ज्योतिषियों में सबसे ऊपर डॉ. ज्योतिष जी महाराज चल रहे हैं, वजह अपना सतही ज्ञान और ठग विद्या के प्रचार-प्रसार हेतु मीडिया पर करोड़ो रूपये खर्च करना है। इनका प्रचार-प्रसार भी बड़ा हास्यपद होता है, विवाह बाधा, संतान-पक्ष, आर्थिक तंगी, रोज़गार तथा कोर्ट-कचहरी संबन्धी सभी समस्याओ का समाधान करने का बड़ा-बड़ा दावा करते हैं। मान ले कि यदि आप दुःखी, पीड़ित और परेशानियों के अंधेरो में डूबे हुए हैं। उम्मीद और सहयोग के सभी दरवाजे बंद हैं तो फ़िक्र की कोई बात नहीं डॉ. ज्योतिष जी महाराज इन सब से आपको उबार लेंगे बस उनके आस्था एवं पाखंड के सुरंगी दुकान में में घुसने की देर मात्र है।

महाराज जी एक और अद्भुत कार्य करते है। वर्ष में एक बार भविष्यवाणी, जो आम आदमी भी कर सकता है, सुरंगी दुकान पर आने के पश्चात् किसी का कोई कार्य पूर्ण हो गया, फिर तो महाराज जी की चाँदी ही चाँदी है। अंध भक्त का पूरा परिवार इनकी अंध भक्ति में शामिल हो जाता है। सब के सब महाराज जी की टीआरपी बढ़ाने में लग जाते है। फलस्वरुप अंध भक्तो के झुण्ड में दिन प्रतिदान इजाफा होता रहता है, जो आस्था एवं पाखंड के बाजारीकरण को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त है।

वाराणसी में तीव्र गति से उभरते इस बाज़ारवाद को देखा जाए तो इसके जिम्मेदार ये चोंगाधारी ज्योतिषी ही नहीं आम जनता भी है, जो इनकी निर्थक एवं तर्कहीन बातों को अपनाकर अपने धन व समय को बर्बाद करती है, साथ-साथ अपने धर्म व आस्था से कोसो दूर होती चली जा रही है। शासन-प्रशासन को इस दिशा में आवश्यक कार्यवाही करते हुए बाज़ारीकरण की इस प्रवृत्ति पर रोक लगानी चाहिए ताकि ऐसे तथाकथित पाखंडी ज्योतिषियों के कारण खोती जा रही बनारस की महत्ता को बचाया जा सके।

 

वाराणसी से आशुतोष त्रिपाठी की रिपोर्ट। संपर्कः [email protected]

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