छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में पुलिस और भ्रष्ट पत्रकारों की मिलीभगत का एक नया नमूना सामने आया है। पुलिस बलात्कार के आरोपी पत्रकार का नाम छिपा कर पीड़िता का नाम सार्वजनिक करने में जुट गयी है।
पिछले 13 दिसंबर को चैनल इंडिया नाम के अखबार के संपादक रजत बाजपेयी पर उसकी एक महिला संवाददाता ने बलात्कार का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज़ करवा दिया था। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि पुलिस ने भारी हील-हुज्जत के बाद मुकदमा तो दर्ज़ कर लिया, लेकिन इस बात का पूरा ध्यान रखा कि आरोपी संपादक रजत बाजपेयी की इज्जत उछलने न पाए।
बताया जाता है कि रजत के पिता भी एक राष्ट्रीय चैनल के पत्रकार हैं और पिता-पुत्र की पुलिस में अच्छी जान पहचान है। इसी का असर रहा कि पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज़ करने में न सिर्फ़ आनाकानी की बल्कि जो प्रेस विज्ञप्ति जारी की उसमें भी आरोपी का नाम गायब कर दिया। दिलचस्प बात ये है कि पुलिस नियमावली में दिये गये दिशा-निर्देशों को ताक पर रख कर प्रेस विज्ञप्ति में पीड़िता का असली नाम और पता डाल दिया।
खबर है कि पीड़िता पर पुलिस अधिकारी अप्रत्यक्ष तौर पर ये दबाव बना रहे हैं कि वो ये मामला वापस ले ले। इतना ही नहीं, स्थानीय मीडिया को भी खबर न छापने की सख्त हिदायत दी गयी है।
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