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पटना की गलियों तक सिमटा भास्कर, नये ठिकानों की तलाश में कई जिला संवाददाता

दैनिक भास्कर के बिहार में आने और उसके लांच होने के बाद यहां की पत्रकारिता जगत में काफी उथल-पुथल की स्थिति बन गई थी। कई मीडिया हाउसों के लोग इधर से उधर गये थे। पटना में अखबारों की कीमत भी घटी। कई जिलों के हिन्दुस्तान और जागरण के ब्यूरो प्रभारियों ने दैनिक भास्कर का दामन थाम लिया था। लेकिन आज वे खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। कारण है दैनिक भास्कर का सिर्फ राजधानी पटना में ही सिमट कर रह जाना।

दैनिक भास्कर के बिहार में आने और उसके लांच होने के बाद यहां की पत्रकारिता जगत में काफी उथल-पुथल की स्थिति बन गई थी। कई मीडिया हाउसों के लोग इधर से उधर गये थे। पटना में अखबारों की कीमत भी घटी। कई जिलों के हिन्दुस्तान और जागरण के ब्यूरो प्रभारियों ने दैनिक भास्कर का दामन थाम लिया था। लेकिन आज वे खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। कारण है दैनिक भास्कर का सिर्फ राजधानी पटना में ही सिमट कर रह जाना।

राजधानी पटना में काफी धूमधाम के साथ दैनिक भास्कर की लांचिंग की गई थी। लेकिन लांचिंग के तीन माह बाद भी दैनिक भास्कर राजधानी पटना की गलियों से निकलकर अन्य जिलों तक अपनी पहुंच नहीं बना पाया है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि भास्कर को बिहार से जो उम्मीदें थीं उसमें वह सफल नहीं हो पाई है। अब तो यहां की पत्रकारिता जगत में यह भी कयास लगाये जा रहे हैं कि जब चुनाव के वक्त भास्कर पटना के अलावा अन्य जिलों में अपनी पहुंच बनाने का प्रयास भी नहीं कर रहा है तो हो सकता है कि यह अखबार राजधानी पटना तक ही सिमट कर रह जाए।

ऐसे में कई जिलों के भास्कर संवाददाता अपने लिए नये ठिकाने की तलाश में जुट गए हैं। ऐसा माना जा रहा है कि चुनाव समाप्त होते-होते भास्कर के कई जिला संवाददाता अपने पुराने घर में वापसी कर सकते हैं।

 

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित।
 

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