पासवर्ड न पता होने से दिल्ली पुलिस आठ साल में 667 शिकायतें नहीं देख पाई

Abhishek Srivastava : मेरे साथ इंटर पास किए 10 में से 8 सहपाठी आइटी में हैं। ग्रेज़ुएशन किए 10 में 6 आइटी में हैं। जिन्‍होंने गणित या भौतिकी में आगे की पढ़ाई की, वे भी देर-सबेर आइटी में चले गए। मेरे रिश्‍तेदारों के बच्‍चे भी आइटी में हैं। मेरे जानने वालों के बच्‍चे भी आइटी में हैं। पिछले बीस बरस में जिसने भी इंटर पास किया, आइटी क्षेत्र में चला गया या जाते-जाते रह गया।

20 साल में सूचना क्रांति हो गई। अमेरिका में सिलिकॉन की घाटी बन गई। हमारे जैसे लोगों को परिवार-मोहल्‍ले में निकम्‍मा समझने का चलन आइटी के आने के बाद ही शुरू हुआ। और मज़ाक देखिए, कि पिछले आठ साल के दौरान केंद्रीय सतर्कता आयोग की भेजी कुल 667 शिकायतें सिर्फ इसलिए दिल्‍ली पुलिस नहीं देख सकी क्‍योंकि शिकायतों के ऑनलाइन पोर्टल का पासवर्ड उसे नहीं मालूम था। एक पासवर्ड और आठ साल? मेरा भारत महान! गुडमॉर्निंग!

Vigilance complaints pile up as Delhi Police doesn’t know password

http://indianexpress.com/article/india/crime/vigilance-complaints-pile-up-as-delhi-police-doesnt-know-password/

पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से.

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