देवरिया में जन सन्देश अखबार का कार्यालय बन्द, कर्मचारी सड़क पर

गोरखपुर 14 जनवरी। जन संदेश समाचार पत्र का हर जगह बुरा हाल है। देवरिया में भी इसका व्यूरो पिछले एक सप्ताह से कार्यालय बन्द है। सिविल लाइन्स रोड स्थित कार्यालय में ताला लग गया है। इससे जुड़े कर्मचारी सड़क पर आ गए है और दूसरों अखबारों में अपनी रोजी रोटी के लिए जुगाड़ लगा रहे है।
सुना जा रहा है कि जन सन्देश देवरिया में कक्कू टाईप के कुछ घाघ किस्म के पत्रकारों ने लाखों रूपया मार्केट से विज्ञापन के नाम पर वसूल लिया है और वे लापता हो गये है। मकान मालिक ने भी किराया न मिलने पर कार्यालय में ताला जड़ दिया दिया है तथा कम्प्यूटर तथा अन्य सामान अपने कब्जे में ले लिया है।

उल्लेखनीय है कि कभी दैनिक जागरण गोरखपुर यूनिट के सर्वेसर्वा कहे जाने वाले शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी का बारह साला राज समाप्त हुआ तो उन्होने जन सन्देश के मालिक पोददार बन्धुओं को पटाकर गोरखपुर से जन सन्देश का प्रकाशन प्रारम्भ कराया। शैलेन्द्र मणि की सोच थी कि अपने चाटूकारों की बदौलत वे दैनिक जागरण को टक्कर देने में समर्थ हो जाएगें। देवरिया में तो उसी कार्यालय में जन सन्देश का कार्यालय खुलवाया जिसमें दैनिक जागरण का कार्यालय हुआ करता था। लेकिन शायद शैलेन्द्र मणि जी भूल गए थे जिन स्वार्थी और चाटूकारों को उन्होने दैनिक जागरण में लखपति करोड़पति बनाया वे दगाबाज भी हो सकते है। और हुआ भी वही।

अपने चंद चाटुकार साथियों की फौज के साथ शैलेन्द्र मणि ने जनसन्देश को शुरू कराया। शैलेन्द्र मणि के बेशर्म और निर्लज्ज साथियों ने उनका साथ नहीं दिया।। कुछ ही महीनों में शैलेन्द्र मणि को अपनी औकात का पता चल गया और वे जनसन्देश से बड़े बेआबरू होकर रूखसत हो गए। उनकी इस रूखसती में शायद उन लोगों की बददुओं ने बड़ा काम किया जिनको शैलेन्द्र मणि ने अपने दैनिक जागरण के कार्यकाल के दौरान उनकी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा को अपने चाटूकारों के कहने पर अपने जूतों से रौंदा था और उनकी पेट पर लात मारी थी। तमाम ऐसे पत्रकार और जागरण में काम करने वाले लोगों को शैलेन्द्र मणि ने अपने गुरूर में खून के आंसू रूलाए है। अब यदि शैलेन्द्र मणि जी किसी कोने में बैठे अपने पुरानों दिनों को याद को बेजार हो रो रहे हैं तो उन्हे यह नही भूलना नही चाहिए था कि हर व्यक्ति की इज्जत और सम्मान बराबर होती है। समय बड़ा बलवान होता है।

 

भड़ास4मीडिया को भेजे गए ईमेल पर आधारित।

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