कर्मचारियों को इनपुट-आउटपुट के फेर में फंसा मजीठिया की काट ढूंढ रहा जागरण

जिस प्रकार का पूर्वानुमान लगाया जा रहा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद तमाम मीडिया संस्थान इतनी आसानी से अपने कर्मचारियों को मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों का लाभ नहीं देंगे, वैसे ही होता दिखाई दे रहा है| वेजबोर्ड की सिफारिशों की काट ढूँढने के लिए तिकड़म लगायी जाने लगी हैं।

दैनिक जागरण आगरा से ख़बर आ रही है कि वहां सम्पादकीय विभाग के अधिकाँश कर्मचारियों को इनपुट-आउटपुट विभाग के फेर में फँसाकर मजीठिया की सिफारिशों से वंचित करने की तैयारी पूरी कर ली गयी है| आउटपुट के फेर में फँसाने का सीधा सा कारण बताया जा रहा है कि ऐसा करने से कर्मचारियों के ग्रेड में अंतर आ जायेगा, उनकी वेतन वृद्धि न के बराबर होगी और कईयों के वेतन में शायद कोई बदलाव भी न आये| मंशा साफ़ है कि जो नौकरी करना चाहता है करे, अन्यथा छोड़कर चला जाये। दोनों ही सूरतों में प्रबंधन ही लाभ की स्थिति में है। यूनिट मैनेजर और संपादक प्रबंधन की नजर में अपने अंक बढ़ाने के लिये मुँह पर ताला लगाकर बैठे हैं।

चूँकि मजीठिया की सिफारिशें केवल पत्रकारों के लिए ही नहीं गैर पत्रकारों के लिए भी हैं, इसलिए इनका सीधा सा उद्देश्य है कि जितना पैसा बचाया जा सकता है, बचा लिया जाये। एक ओर तो कर्मचारियों को वेतन वृद्धि का पूरा लाभ संस्थान नहीं देना चाहता और वहीं दूसरी ओर एरियर के नाम पर भी अभी यहाँ किसी को एक धेला भी नहीं मिला है। फिलहाल संस्थान के इस गैर जिम्मेदाराना रवैये के कारण कर्मचारियों में रोष व्याप्त है, किन्तु परिवार की खातिर वे अपने शोषण को झेल रहे हैं। असुरक्षा की भावना तमाम कर्मचारियों के मन में हैं और किसी को भी अपना भविष्य यहाँ सुरक्षित नजर नहीं आ रहा।

वैसे भी जागरण प्रबंधन का रवैया शुरू से ही कर्मचारी विरोधी रहा है और ये भी किसी से छुपा नहीं है कि वेजबोर्ड की सिफारिशों को लागू होने से रोकने के लिए तमाम मीडिया संस्थानों के मालिकों ने अपना पूरा जोर लगा लिया था। उसी का नतीजा था कि मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशें सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुँचने के बाद ही लागू हो पायीं। किन्तु इसके बावजूद अपने कर्मचारियों का खून चूसकर पैसा बनाने वाले ये लोग उन सिफारिशों का लाभ अपने कर्मचारियों को नहीं देना चाहते क्यूँकि ऐसा करने पर इनका 'फायनेंशियल स्ट्रक्चर' चरमरा जायेगा और इन्हें एक अच्छी खासी रकम वेतन वृद्धि एवँ एरियर के रूप में अपने कर्मचारियों को देनी पड़ेगी।

 

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित।

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