Fraud Nirmal Baba (43) : बाबा की बैंड बजाने वाला मेनस्ट्रीम मीडिया में पहला चैनल रहा न्यूज़ एक्सप्रेस

Sandeep Verma इन्टरनेट पर चिल्लाने का सबब …कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं होता ..एक पत्थर तो उछालो यारों ….. बाबा की मुश्किलें अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने भी बढ़ा दी हैं। समिति का कहना है कि निर्मल बाबा दैविक शक्ति का दावा करके लोगों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं। यहां जारी बयान में समिति के कार्याध्यक्ष उमेश चौबे व हरीश देशमुख ने आरोप लगाया कि निर्मल बाबा का दैविक शक्ति का दावा खोखला, निराधार व धार्मिक प्रवृत्ति के कट्टरपंथी लोगों के लिए मानसिक रूप से गुमराह करने वाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीवी चैनलों पर नकली भक्तों को पेश कर बाबा अपनी वाहवाही कराते हैं। समिति ने टीवी चैनलों पर चल रहे इन विज्ञापनों पर पाबंदी लगाने की मांग केंद्र सरकार से की है। उन्‍होंने कहा कि यदि बाबा के पास वास्तव में चमत्कारिक शक्तियां हैं, तो वह अपनी शक्तियों के बल पर एक पापड़ भी तोड़ कर दिखा दें तो समिति उन्‍हें 15 लाख रु. इनाम देगी।

        Sandeep Verma जूनियर आर्टिस्ट निधि के हवाले से भी मीडिया में खबर आई है कि निर्मल बाबा प्रारंभिक दिनों में ठगी का धंधा चमकाने के लिए ठग नोएडा की फिल्म सिटी स्थित एक स्टूडियो में अपने प्रोग्राम की शूटिंग करवाते थे। उसमें बाबा के सामने जो लोग अपनी समस्या हल होने का दावा करते थे, वे लोग असली न होकर जूनियर आर्टिस्ट हुआ करते थे। निधि ने बताया कि उन जूनियर आर्टिस्टों की लिस्‍ट में उसका भी नाम था। निधि का कहना है कि निर्मल बाबा सवाल पूछने के लिये उसे 10 हजार रुपये देते थे। बाबा की पोल खोलते हुए निधि कहती हैं कि शुरू के दो महीने तक निर्मल बाबा ने अपने ही आदमियों और जूनियर आर्टिस्टों से प्रश्‍न पुछवाया।
 
        Ramendra Jenwar Aaj Dilli me bhi 2 bachchon ne Nirmal baba ke khilaf Police ko tahreer di hai aur mukadma darj karne ki mang ki hai .
 
        Ramendra Jenwar Aaj Dilli me bhi 2 bachchon ne Nirmal baba ke khilaf Police ko tahreer di hai aur mukadma darj karne ki mang ki hai .
   
        Alok Joshi माफ कीजिए रामेंद्र जी ये बच्चों का कदम सराहनीय है, मगर ये भी एक किस्म के निर्मल बाबा का चमत्कार जैसा ही है। थोड़ा ब्यौरा पढ़ेंगे तो समझ जाएंगे। पटना के एक पिता ने अपने बच्चे को जीनियस बनाने का बीड़ा उठाया और बनाकर दिखाया वो किस्सा याद है न? ये उसी का सोशल एक्टिविज़्म संस्करण है।
    
        Nilakshi Singh आपने एकदम सही पहचाना आलोक जी, ये उसी का सोशल एक्टिविज़्म संस्करण है.
     
        Sumant Bhattacharya आलोक भाई….इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से निकले छात्र धीरज भारद्वाज ने अपने मीडिया पोर्टल मीडिया दरबार से निर्मल बाबा और मीडिया के नकारात्मक गठबंधन के खिलाफ सबके पहले और अकेले ही जंग का एलान किया। बदले में निर्मल बाबा ने देश की सबसे बड़ी लॉ फर्म से नोटिस थमा दिया। फिर इलाहाबाद से ही निकले छात्र यशवंत ने भड़ास4मीडिया पोर्टल से जंग को थमने नहीं दिया..इसके बाद हम आए मैदान में । मेन स्ट्रीम मीडिया में पहला चैनल रहा न्यूज़एक्सप्रेस, जिसने निर्मल बाबा के सामने हारते शिक्षित भारत को संबल दिया। अब विचार की पौध आंधी में तब्दील हो चुकी है। स्टार न्यूज़ ने भी कल इस संघर्ष में उतरने का एलान कर दिया है। तो आइए इलाहाबाद यूनिवर्सिटी और हिंदी पट्टी के दूसरे नॉलेज कैंपस से निकले छात्र अंधविश्वास के साथ मीडिया की साजिश के गिरफ़्त में फंसते भारत की रिहाई की लड़ाई में अपने अपने हिस्से का कर्ज़ अदा करे। ।।। आमीन ।।।
     
        Alok Joshi जितने लोगों ने भी इस अंधेर के खिलाफ जंग छेड़ी सब काबिले तारीफ हैं। आपने अपने अलावा जो भी नाम लिए मैं उनपर व्यक्तिगत टिप्पणी करने में असमर्थ हूं, एक पर कर नहीं सकता, और दूसरे पर करना नहीं चाहता। लेकिन इस वक्त आप सबने ये बेहद शानदार काम किया है। जितनी तारीफ की जाए कम है। मैंने स्टार न्यूज का नाम लिया उसका कारण ये है कि उसने विज्ञापन बंद करने का और साथ ही पोल खोलने का साहसिक फैसला किया। साफ दिखाता है कि संपादकीय विभाग के लोगों में इसपर असंतोष था और आखिरकार उन्होंने विज्ञापन विभाग पर दबाव बनाया।… मैं पहले भी लिख चुका हूं, जिन चैनलों पर ये विज्ञापन चल रहा है, उन सभी के भीतर पत्रकारों में यकीनन इसे लेकर नाराजगी औऱ चिंता होगी, औऱ आज नहीं तो कल सामने आएगी..अब आने लगी है। उम्मीद करें कि जल्द ही ये चमत्कारी कार्यक्रम एक बुरे सपने की तरह खत्म होगा.. और कुछ दिनों में ही हम आप इसे भूल जाएंगे। …
    
        Alok Joshi ‎.मगर इस मामले में और ऐसे किसी भी और मामले में अंतिम सत्य पंचतंत्र का वो कथन ही है – जब तक इस धरती पर एक भी लालची और मूर्ख व्यक्ति रहेगा, कोई भी धूर्त भूखा नहीं मरेगा!… वरना एक निर्मल बाबा जाएगा तो कल दूसरा कोई खड़ा हो जाएगा।
    
        Sumant Bhattacharya आलोक जी. विज्ञापन तो हम भी ले सकते थे..मार्केटिंग डिपार्टमेंट तो हमारे पास भी है..भले ही छोटा ही सही..लेकिन क्रेडिट उसको मिलना ही चाहिए, जिन्होंने अंधों की बस्ती में आईना दिखाने का जोखिम मोल लिया। इसीलिए मैंने धीरज और यशवंत का नाम लिया। मेरी नज़र में वो किसी नायक से कम नहीं..कम पूंजी पर बड़ा जोखिम…और वो भी उस वक्त जब तमाम दिग्गज अपनी बोली लगा कर माल वसूल चुके थे या फिर आपराधिक तौर पर खामोश थे।..जिंदा और मुर्दों की शिनाख्त करने का साहस नहीं करेंगे आलोक भाई, तो हम भी जनख़ों की फौज में शामिल हो जाएंगे। मुझे मंजूर नहीं। हां आपकी पंचतंत्र वाले कथन से बिल्कुल सहमत हूं..
     
        Sandeep Verma हमारे समाज में सिर्फ एक निर्मल बाबा नहीं हैं .सिर्फ इतना है कि यह तो टीवी कि वजह से जल्दी बड़ा हो गया .हर चौथी गली में एक निर्मल बाबा का संस्करण बैठा है .एक आंदोलन कि पूरी श्रंखला चाहिए होगी इन लोगों से निपटने की .मीडिया की जिम्मेदारी सतत जागरूक करते रहने की है .लड़ाई अभी जारी है ….
       
        Arvind Vidrohi क्या यह सत्य नहीं है कि जब तक निर्मल ने स्टार न्यूज़ को विज्ञापन दिया तब तक उसका प्रचार किया और जब विज्ञापन आगे बढ़ाने से मना कर दिया गया तब स्टार न्यूज़ भी दावा करने लगा है कि हम भी सत्य दिखायेंगे | धन के लालच में जनता को गुमराह करने में बराबर के दोषी व भागीदार है ये सभी लोग जिन्होंने निर्मल का प्रचार किया , महिमा मंडन किया
        
        Sumant Bhattacharya Arvind Vidrohi भाई दरअसल मेरा Alok Joshi भाई से सिर्फ इतनी सी गुजारिश है कि सतह से उठते नायकों को भी तवज्जों दें..बड़ा मारे तो भी धन्यवाद..दुलराए तो भी धन्यवाद। वैसे भी देश की राजनीति जनांदोलनों से निकले नेतृत्व को खारिज करती जा रही है..अब प्रबुद्ध पत्रकार भी यही करेंगे तो करें हम सब मिल कर बोलो राम…
         
        Arvind Vidrohi पहले काटी खूब मलाई अब देते है खूब सफाई — ये हाल है उन न्यूज़ chainalo का जिन्होंने निर्मल के भ्रम जाल को विस्तार रूप देने में अपना महती योगदान दिया है और अब सच्ची पत्रकारिता का स्वांग रच रहे है
         
        Sandeep Verma सही कहा सुमंत ,वैसे भी हर बड़ा आन्दोलन किसी छोटी सी चिंगारी से ही शुरू हुवा है .जब आग लग जाति है तो बड़े नेता आदि अपना बैनर लगा देते हैं .
         
        Sandeep Verma अरविन्द जी सहमत हूँ आपसे .वैसे क्या स्टार न्यूस वाले माफ़ी भी मांग रहे हैं क्या पूर्व में विज्ञपन दिखाने का ?
         
        Arvind Vidrohi संदुपुर – बाराबंकी की घटना में दैनिक जागरण लगातार प्रशासन के पक्ष में लिख रहा था जबकि गलती पुलिस कर्मियों व प्रशासन की ही थी | अब जब न्यायलय ने लताड़ा दिया प्रशासन को तब से खिसियाये है प्रशासन के दलाल पत्रकार और कल तो एक सुधि जन कह रहे थे की ब्लॉग और फेसबुक पे लिखने का कोई मतलब नहीं , लोग तिल का ताड़ बना देते है | मैंने कहा और आप लोग तिल को तिल भी नहीं लिखते , क्या कारण है ? तब नाराज़ हो गये , कहने लगे की तुम तो किसी अख़बार में नौकरी कर नहीं रहे हो क्या जानो- पत्रकारिता क्या है ?
         
        Alok Joshi सुमंत मैंने ये कहने में कोई कोताही नहीं बरती कि जो भी इसकी पोल खोल रहा है वो हिम्मत कर रहा है, अच्छा काम कर रहा है, उसकी तारीफ होनी चाहिए। जिंदा, मुर्दा, मर्द. जनखे, जैसे विशेषण जिस भीड़ को प्रभावित करते हैं मैं उनमें शामिल नहीं हूं। मेरे लिए जनखे भी उतने ही सम्माननीय और इनसान हैं जितने मर्द और औरत! –आपके पास भी विज्ञापन विभाग है, वो भी विज्ञापन ला सकता था.. इससे कब इनकार है। लेकिन जिनका विज्ञापन विभाग ले आया था, वो उसे रोककर पोल खोलने का दबाव बनाने में कामयाब हुए, मैं आजके दौर में इसे एक बड़ी कामयाबी मानता हूं। मैनेजमेंट और पत्रकारों के रिश्ते आप भी कई संस्थानों में देख आए हैं.. शायद मुझसे ज्यादा। आप नहीं मानते? और इसी में मुझे दूसरे मीडिया चैनलों में काम कर रहे ऐसे साथियों के लिए भी आशा की किरण दिखती है, जो हमारे आपके जैसे लोगों के बीच बातचीत करने से भी कतरा रहे हैं क्योंकि उन्हें डर लगता है कि कहीं कोई निर्मल बाबा का सवाल न उठा दे, उन्हें शर्म आ रही है। आज शायद उनका भी हौसला बढ़ा होगा, आज एक ने बंद किया, कल दूसरा करेगा।। इसलिए…

        .. और विद्रोही जी का तो नाम ही विद्रोही है..मैं उनकी बात पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता क्योंकि मैं यहां किसी चैनल का वकील नहीं हूं। न ही बनने का इरादा है.. मै भी आपकी ही तरह एक स्वतंत्र नागरिक हूं, जो ठीक लगता है वो सामने रखता हूं।.. आपने कसम खा रखी है कि किसी की सीमाओं का आदर नहीं करेंगे, वो अच्छा करे तब भी नहीं तो मेरा कोई आग्रह भी नहीं है कि आप ऐसा करें।.. और जो भी सवाल हैं उनके जवाब हम आप खुद भी तलाश सकते हैं… मैं इस प्रकरण में जो कह सकता था कह चुका हूं। निर्मल बाबा का धंधा बंद होना चाहिए, जितनी जल्दी हो जाए अच्छा है।… मगर अब मैं इस प्रकरण पर और कुछ नहीं कहूंगा.. आप लोग बात आगे चलाने के लिए स्वतंत्र हैं। ….
 
        Sumant Bhattacharya आप सभी दोस्तों को याद होगा कि इस मंच पर मैंने दो सवाल उठाए थे, खबर क्या है और हिंदी पट्टी की मीडिया का दिवालिया हो चुका बौद्धिक दायरा। तब काफी तीखी बहस हुई थी और कुछ लोगों ने कहा था कि मैं नसीहत देने की कोशिश कर रहा हूं..निर्मल बाबा या फिर शिक्षा के बरक्स जारी बहस में एक बार फिर मेरे उठाए सवालों पर गौर कीजिएगा। वैसे भी इस तंत्र में आप और हमारे लिए बस आखिरी उम्मीद मीडिया बचा है..और वो भी संगठित गिरोहों और तंग जहेनियत की गिरफ्त में आ चुका है। अगर बेहतर लगे तो बहस को एक बार फिर मीडिया की ओर लेकर चलें क्या..वैसे भी हमारा आपका यहां जारी संवाद भी एक तरह का मीडिया ही है..
 
        Arvind Vidrohi किसी को भी आदर देने में मैं कभी संकोच नहीं करता हूँ लेकिन किसी के गलत काम को सही भी नहीं कह सकता | एक और सूचना जो हो सकता है किसी दिन सुर्खिया बने और सभी पत्रकार साथी लपके उस गाँव की तरफ ,, आज की तारीख में वहा जाकर सुचना कि सत्यता या प्रशासन से कार्यवाही की प्रगति दोनों से कतरा रहा है यहाँ का मिडिया जगत
 
        Sandeep Verma अरविन्द जी मीडिया की परिभाषा नए सिरे से लिखने का समय आ चूका है .
   
        Alok Joshi स्वागत है। आप महानुभाव लिखना शुरू करें। जब लिख जाए तो बता दें। यथासंभव पालन करने का प्रयास करूंगा।
    
        Sumant Bhattacharya Alok Joshiचलिए इसको अभिजात्य भाषा में कहते हैं..जिसे संस्कृतनिष्ठ अभिजात्य वर्ग पुरुषार्थ कहता है। इस शब्द का आशय स्त्री और पुरुष के बीच का विभेद नहीं बल्कि उन नैतिक मानदंडों को स्थापित करता है..जो समाज को समावेशी नैतिक और वैचारिक विकाश की ओर ले जाता है… दूसरी बात मुझे नहीं लगता है कि कोई मालिक इतना खुरेंजी है। मैंने भी बतौर लीडर काम किया है..बस उसको यह आश्वासन होना चाहिए कि उसकी पूंजी सुरक्षित है और उसका कोई कर्मचारी अपने लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं कर रहा है। मैं आपको यकीन के साथ बताता हूं कि भास्कर के सुधीर अग्रवाल और राजस्थान पत्रिका के नीहार कोठारी वैचारिक और बौद्धिक रूप से इतने सशक्त हैं कि इनके सामने दशकों से पत्रकारिता कर रहे हिंदी पट्टी के संपादक पानी भरें। दरअसल दिक्कत ये है कि हिंदी पट्टी के संपादक को मालिक थोड़ा झुकने को बोलता है तो वो दंडवत हो जाता है। विचारिए…एकतरफा पूंजी निवेश करने वाले के खिलाफ भी फतवा जारी करना दुरुस्त और संतुलित सोच नहीं है..
      
        Arvind Vidrohi दिक्कत ये है कि हिंदी पट्टी के संपादक को मालिक थोड़ा झुकने को बोलता है तो वो दंडवत हो जाता है ,, vaah kya baat hai ,,,
      
        Sumant Bhattacharya Sandeep Verma भाई..मीडिया की परिभाषा नए सिरे से लिखने की नहीं..स्थापित करने की आवश्यकता है।
       
        Pramod Joshi आलोक जी वास्तव में पत्रकारिता तब होगी जब सारे बाबाओं की पड़ताल होगी। निर्मल बाबा के धंधे से बाकी बाबाओं के धंधे को ठेस लगी है। इसका फल दिखाई पड़ रहा है। मेरा अनुमान है। गलत भी हो सकता है।
       
        Arvind Vidrohi ‎Pramod Joshi Sir ji — पाखंड के कारण ही आज धर्म की हानि हो रही है | पाखंडियो का बेनकाब होना समाज के हित में है और ये काम पत्रकारिता जगत का है कि सच को सामने लाया जाये ना की झूठ को महिमा मंडित किया जाये
        
        Sumant Bhattacharya Pramod Joshi भाई, क्या बाजार अपने को इस तरह से संशोधित नहीं कर रहा है।
         
        Tahira Hasan sumant since 1990 india opened market government became agent of corporate, media started promoting baba amma mullah ….now very thing is salable do not expect ethics ..no media is not paying attention to fundamental duties …it is really great the way you exposed to nirmal baba on NEWS EXPRESS …..it is true journalism..

फेसबुक से साभार.

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