ये कोई नई बात नहीं है। आप कुछ अच्छा करने जाएंगे तो भी आपकी नीयत पर सवाल उठाए ही जाएंगे। उसमें भी कोई ऐसी बात खोजी जाएगी जिससे आपको कठघरे में खड़ा किया जा सके। ये ठीक भी है, क्योंकि बिना स्वार्थ के आजकल कोई भलाई नहीं करता। न्यूज़ एक्सप्रेस ने भी जब निर्मल बाबा की पोल खोलने का बीड़ा उठाया और उनके गोरखधंधे के ख़िलाफ़ अभियान छेड़ा तो उसमें भी स्वार्थ तो था ही
न्यूज एक्सप्रेस से जुड़े एक वरिष्ठ पत्रकार बताते हैं कि अभियान छेड़ने के पीछे स्वार्थ ये था कि अंधविश्वास के ख़िलाफ़ जो संपादकीय नीति लेकर वो चल रहा है उसे और भी पुख्ता ढंग से रखा जाए और अगर निर्मल बाबा इसके लिए अवसर उपलब्ध करवा रहे हैं तो क्यों चूका जाए। हाँ, ऐसा करते समय उसके मन में एक चिंता भी थी। जब उसने देखा कि टॉप 10 कार्यक्रमों में से आठ निर्मल बाबा के हैं तो उसे लगा कि ये तो न्यूज़ के साथ व्यभिचार हो रहा है। न्यूज़ चैनलों के कार्यक्रमों की सूची में न्यूज़ के कार्यक्रमों का न होना किसी भी पत्रकार के लिए शर्मनाक बात है। इससे न्यूज़ चैनलों से न्यूज़ और भी बाहर होती जाएगी। ये शर्म हमने महसूस की और तय किया कि इसका विरोध करना चाहिए।
न्यूज एक्सप्रेस के वरिष्ठ पत्रकार के मुताबिक कुछ लोगों को लगता है कि न्यूज़ एक्सप्रेस को निर्मल बाबा की कृपा नहीं मिली होगी इसलिए उसने उनके ख़िलाफ़ अभियान छेड़ दिया होगा…. उनकी जगह मैं होता तो शायद एकबारगी मैं भी यही सोचता। मगर इन लोगों की जानकारी के लिए बता दें कि एक नहीं कई-कई बार ऐसे प्रस्ताव आए। ये प्रस्ताव ज़ुबानी थे इसलिए इनका कोई प्रमाण हमारे पास नहीं है। लेकिन चैनलों की दुनिया का कोई भी व्यक्ति जानता है कि कुल आठ महीनों में ही न्यूज़ एक्सप्रेस ने ठीक-ठाक मुकाम बना लिया है और निर्मल बाबा टाइप लोग उसका इस्तेमाल ज़रूर करना चाहेंगे।
सीधी सी बात है कि जब ऐसे-वैसे चैनलों पर बाबा कृपा कर रहे थे तो न्यूज़ एक्सप्रेस तो उनके लिए और भी कारगर ज़रिया होता। हमारे मार्केटिंग विभाग को भी लगा था कि ये रेडीमेड प्रोग्राम मोटे पैसे भी दे रहा है और टीआरपी भी इसलिए इसे चलाना चाहिए, मगर हमने दोनों का ही लोभ नहीं किया। यहाँ तक कि मुहिम शुरू होने के ठीक बाद प्रलोभन का आकार भी बड़ा हो गया मगर हम डिगे नहीं।
अगर आप न्यूज़ एक्सप्रेस देखते रहे होंगे तो आपको पता होगा कि इस चैनल पर आज तक किसी बाबा का कार्यक्रम नहीं चला, अंध विश्वास पर आधारित कोई कार्यक्रम या ख़बर नहीं चली, ज्योतिष आदि के नाम पर चलाए जाने वाले कार्यक्रम भी इस पर कभी नहीं चले। यहाँ तक कि लाल किताब आदि जैसे अंध विश्वासी प्रोडक्ट्स के विज्ञापनों तक से हमने सख़्ती से परहेज़ किया है। लिहाज़ा हमारे लिए स्वाभाविक था कि हम ऐसी किसी भी मुहिम को चलाते जो पहले से ही सोशल मीडिया पर चल रही थी और जिसमें बहुत दम था। हम उस मुहिम के हिस्सा बने।
न्यूज एक्सप्रेस के वरिष्ठ पत्रकार ने बताया कि न्यूज़ चैनलों में सबसे पहले न्यूज़ एक्सप्रेस ने ये काम किया और फिर बड़े कहे जाने वाले चैनलों को उसका अनुसरण करना पड़ा। पूरी न्यूज़ एक्सप्रेस की टीम को इसका फख्र है। सभी शंकालुओं से विनम्र निवेदन है कि वे जो भी राय बनाएं, सुनी सुनाई बातों या अनुमान के आधार पर न बनाएं। तथ्यों को जाँचकर राय बनाना ही वैज्ञानिक समझ कहलाती है, वर्ना ये भी एक तरह का अंध विश्वास ही कहा जाएगा।
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