आईबीएन7 न्यूज चैनल पर निर्मल बाबा के पाखंड का प्रसारण जारी है. इस प्रसारण के दौरान कहीं भी विज्ञापन या स्पांसर्ड प्रोग्राम या पेड प्रोग्राम नहीं लिखा होता. अंधविश्वास फैलाने और नागरिकों की चेतना कुंद करने वाले इस कार्यक्रम के खिलाफ ढेर सारी बहस, विवाद, विरोध के बावजूद आईबीएन7 पर प्रसारण जारी रखना दर्शाता है कि नेटवर्क18 समूह अब पूरी तरह जनविरोधी हो चुका है. सीएनएन-आईबीएन, आईबीएन7 समेत इसके कई चैनल कहने को मीडिया हाउस हैं लेकिन दरअसल ये पैसे कमाने के लिए खुली हुई फैक्ट्रियां हैं.
अगर इस ग्रुप के मालिक राघव बहल, कथित महान संपादक राजदीप सरदेसाई और डंके की चोट पर बात कहने का दावा करने वाले आशुतोष में थोड़ी भी समझ होती तो इस प्रोग्राम को बंद कर देते या फिर प्रोग्राम के दौरान लगातार पट्टी चलाते रहते कि यह एक प्रायोजित कार्यक्रम है, विज्ञापन है, जिसके दावों से चैनल का कोई लेना देना नहीं है, कृपया अपने विवेक का इस्तेमाल करें…. सेमिनारों, आयोजनों में पत्रकारिता को लेकर लंबा चौड़ा भाषण देने वाले राजदीप सरदेसाई और आशुतोष से अब हर उस जगह पूछा जाना चाहिए जहां वे मंच से बोलने के लिए खड़े होते हों कि आपके चैनल पर आखिर निर्मल बाबा का प्रसारण बिना विज्ञापन के क्यों जारी रखा गया, जबकि सबको ये पता है कि यह पूरी तरह पेड प्रोग्राम है पर कहीं भी विज्ञापन नहीं लिखा गया. क्या जनता को ठगकर पैसे बनाने वाले बाबा की कृपा से ही आप लोगों के घर का राशन खरीदा जाता है, और क्या यही पत्रकारिता है?
सबको पता है कि लाखों रुपये सेलरी लेने वाले इन महानुभावों की चमड़ी पर कतई असर नहीं पड़ने वाला क्योंकि ये लोग मान चुके हैं कि इनका काम सिर्फ मालिक और कंपनी के हित में ज्यादा से ज्यादा पैसा बटोरना है, कोई पत्रकारीय कार्य करना नहीं. अगर इनके भीतर पत्रकार की आत्मा होती तो जरूर ये अब तक प्रोग्राम बंद कर चुके होते. द हिंदू अखबार में जैकेट प्रकाशित होने के बाद उसके संपादक ने जिस तरह अपनी नीति बताई और बयान दिया, वह काबिलेतारीफ है. इससे राजदीप और आशुतोष को सबक लेना चाहिए पर इन्हें सबक लेना होता तो कबका निर्मल बाबा का प्रोग्राम बंद कर चुके होते. इसलिए मानकर चलिए कि इन्हें आइना दिखाने का काम आप पत्रकारों और दर्शकों को करना है. ये जब कहीं मिलें तो इन्हें घेरकर पूछना चाहिए कि आखिर निर्मल बाबा ने आपको प्रोग्राम बंद न करने के लिए कितने पैसे दिए?

इस बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने देश के विभिन्न टीवी चैनलों पर निर्मल बाबा के 'सत्संग' कार्यक्रमों के प्रसारण पर रोक लगाने संबंधी जनहित याचिका पर मंगलवार को केंद्र सरकार के वकील को 16 जुलाई को अपना पक्ष पेश करने के निर्देश दिए. वरिष्ठ न्यायमूर्ति उमानाथ सिंह और न्यायमूर्ति वीरेंद्र कुमार दीक्षित की खंडपीठ ने यह आदेश स्थानीय वकील के. सरन की जनहित याचिका पर दिया है. याची ने निर्मलजीत सिंह नरूला उर्फ निर्मल बाबा के कथित सत्संग कार्यक्रमों का टेलीविजन चैनलों पर प्रसारण पूरी तरह से रोकने और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है.
याची का दावा है कि टेलीविजन चैनलों पर ऐसे कार्यक्रमों का प्रसारण 'केबल टीवी नेटवर्क रेगुलेशन अधिनियम 1995' और 'केबल टीवी रूल्स 1994' का पूरी तरह उल्लंघन है. याची का आरोप है कि इन नियम-कानूनों के बावजूद केंद्र सरकार ऐसे कार्यक्रमों के प्रसारण पर रोक नहीं लगा रही है. लिहाजा केंद्र को इस पर अंकुश लगाने के निर्देश जारी करने चाहिए. वहीं केंद्र सरकार की ओर से सहायक सॉलिसिटर जनरल आई. एच. फारूकी पेश हुए. अदालत ने उनके आग्रह पर मामले की केंद्र से जानकारी प्राप्त करने के लिए उन्हें समय दिया. मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई को होगी.
उधर, पटना उच्च न्यायालय ने बिहार की एक अदालत द्वारा धोखाधड़ी के एक मामले में निर्मलजीत सिंह नरूला उर्फ निर्मल बाबा के खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट पर बुधवार को रोक लगा दी. निर्मल बाबा के अधिवक्ता राहुल कुमार ने बताया कि पटना उच्च न्यायालय ने अररिया न्यायालय द्वारा निर्मल बाबा के खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट पर तत्काल रोक लगा दी है. अदालत ने सरकार को इस मामले में जवाब देने और निर्मल बाबा को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है. मामले पर अगली सुनवाई 18 जून को होगी. उल्लेखनीय है कि अररिया के मुख्य न्ययायिक दंडाधिकारी सत्येंद्र रजक ने फारबिसगंज थाने में दर्ज एक मामले में एक अनुसंधानकर्ता द्वारा न्यायालय में दिए गए अनुरोध पत्र के बाद निर्मल बाबा के खिलाफ शनिवार को गैर जमानतीय वारंट जारी कर दिया था. निर्मल बाबा के अधिवक्ता विंध्याचल सिंह ने सोमवार को पटना उच्च न्यायालय में इसके खिलाफ अर्जी दायर की थी. फारबिसगंज थाने में राकेश कुमार सिंह ने निर्मल बाबा पर भाग्य बदलने के नाम पर रुपये ऐंठने का आरोप लगाते हुए 21 अप्रैल को उनके खिलाफ एक मामला दर्ज कराया था.
निर्मलजीत सिंह नरूला उर्फ निर्मल बाबा के बारे में यह भी पता चला है कि इन्होंने डेढ़ महीने के भीतर 70 करोड़ से ज्यादा की प्रॉपर्टी खरीदी है. बताया जा रहा है कि उन्होंने रीयल एस्टेट कंपनी डीएलएफ रेजीडेंसी से एक प्रॉपर्टी की डील की है. इसके एवज में कंपनी को ड्राफ्ट के जरिए एक माह में 49 करोड़ रूपये दिए हैं. बाबा ने इस कंपनी को एक ही दिन में 34.12 करोड़ का भुगतान किया है. कंपनी का कहना है कि बाबा ने उनसे प्रॉपर्टी खरीदी है, लेकिन बाबा की ओर से अभी इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं आई है. ड्राफ्ट पंजाब नेशनल बैंक में निर्मलजीत सिंह नरूला के नाम से खोले गये खाते (नंबर 1546000102129694) से बनवाए गए हैं. यह बाबा का निजी खाता है. निर्मल बाबा ने डीएलएफ को भुगतान के लिए गत सात से 28 अप्रैल के बीच पांच बैंक ड्राफ्ट बनवाए. सात अप्रैल को 14.88 करोड़ रूपये का ड्राफ्ट बनवाया गया. इसके बाद 28 अप्रैल को चार ड्राफ्ट बनवाए गए. इनमें दो ड्राफ्ट 2.06-2.06 करोड़ रूपये के थे, जबकि दो अन्य बैंक ड्राफ्ट 15-15 करोड़ के थे.
निर्मल बाबा ने अपने इसी निजी खाते से 2.05 करोड़ और नौ करोड़ के दो और बैंक ड्राफ्ट बनवाए. दोनों ड्राफ्ट गोवा की राजधानी पणजी भेजे गए थे. बाबा के पास आने वाली रकम का एक मात्र जरिया उनके भक्तों द्वारा दिया गया दान है. ऐसे में भक्तों द्वारा दिए गए पैसे का इस तरह निजी इस्तेमाल किया जाना कहां तक उचित है, इस पर बहस होनी चाहिए और जरूरी हो तो कानून भी बनना चाहिए. बाबा ने पिछले सप्ताह ही भोंडसी में छह एकड़ 11 कनाल जमीन की रजिस्ट्री कराई थी. निर्मल दरबार ट्रस्ट के नाम पर निर्मलजीत सिंह नरूला द्वारा खरीदी गई जमीन की कीमत तहसील के सरकारी दस्तावेज में 21 करोड़ 11 लाख 92 हजार 500 रूपए में दिखाई गई.
Related News- Fraud Nirmal Baba





