मुंबई समारोह में हरेप्रकाश उपाध्याय को कविता सम्मान, शरद सिंह की कस्बाई सिमोन भी पुरस्कृत

मुंबई 4 जनवरीः श्री राजस्थानी सेवा संघ सभागार, अंधेरी पूर्व, में हेमंत फाउंडेशन के तत्वावधान में विजय वर्मा कथा सम्मान एवं हेमंत स्मृति कविता सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. दामोदर खड़से थे। कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्वलन तथा शास्त्रीय गायक नीरज कुमार के द्वारा गायी सरस्वती वंदना से हुआ। आयोजन की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए सुपरिचित कथाकार संस्था की सचिव प्रमिला वर्मा ने विजय वर्मा और हेमंत की स्मृतियों को ताजा किया और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

 

विजय वर्मा कथा सम्मान, चयनित पुस्तक 'कस्बाई सिमोन' को डॉ.दामोदर खड़से के कर कमलों द्वारा लेखक शरद सिंह को दिया गया। दिनकर जोशी द्वारा हेमंत स्मृति कविता सम्मान हरेप्रकाश उपाध्याय को प्रदान किया गया। पुरस्कार स्वरूप ग्यारह हज़ार रुपए की धनराशि स्मृतिचिन्ह, शॉल एवं श्रीफल प्रदान किया गया। शरद सिंह ने कहा कि विजय वर्मा ने अपना छोटा सा जीवन साहित्य को समर्पित किया आज उनकी स्मृति का पुरस्कार पाकर वे खुद को धन्य मानते हैं। हरेप्रकाश उपाध्याय ने कहा कि हेमंत अत्यंत संवेदनशील कवि थे उनकी कविताओं को पढ़कर मैवे बेचैन हो उठते हैं। आज अगर हेमंत होते तो निश्चय ही युवा पीढ़ी के सिरमौर होते।


 

 

कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्था की अध्यक्ष सुप्रसिद्ध साहित्यकार संतोष श्रीवास्तव ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि शरद सिंह ने लिव-इन-रिलेशनशिप की आंच से गर्माए गांव-कस्बे के बदलते परिवेश का वर्णन किया है वहीं हरेप्रकाश उपाध्याय ने ग्रामीण परिवेश में रची बसी कविताओं से समय की समस्याओं को उभारा है। कवयित्री संस्था की कार्याध्यक्ष सुमीता केशवा ने कहा कि 'कस्बाई सिमोन' में पश्चिमी सभ्यता को भारतीय संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है। पितृसत्ता को चुनौती देने वाले कई प्रश्न शरद सिंह ने अपने उपन्यास में उठाए हैं। कविता पर बोलते हुए सुमीता ने कहा कि हरे प्रकाश उपाध्याय के अन्दर का कवि हर वक्त सचेत और चौकन्ना रहता है। इससे पता चलता है के कवि के अपने समाज से जुड़ा हुआ है।

समारोह के विशिष्ट अतिथि डॉ.विनोद टीबड़ेवाला ने लिव इन रिलेशन का शहरी दृष्टिकोण से खुलासा करते हुए कहा कि भरतीय संस्कृति अक्षुण्ण है ग्लोबलाइजेशन इसे कभी मिटा नहीं सकता। समारोह के अध्यक्ष गुजराती के वरिष्ठ साहित्यकार दिनकर जोशी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा –'मैं गुजराती का लेखक हूं लेकिन आज हिन्दी लेखकों के बीच स्वयं को हिन्दी से जुड़ा हुआ पाता हूं। साहित्य कभी अच्छा या बुरा नहीं होता। साहित्य केवल साहित्य होता है।'

समारोह में मुम्बई के जाने माने लेखक, पत्रकार, साहित्य प्रेमी उपस्थित थे। जिनमें सूरजप्रकाश, मधु अरोड़ा, कवि पुनीत पांडेय, ब्रजभूषण साहनी, खन्ना मुजफ्फरपुरी, शाहिद खान, रवीन्द्र कात्यायन, प्रेमजनमेजय, दिव्या वर्मा, मीनू मदान, प्रमिला शर्मा, लक्ष्मी यादव, ज्योति गजभिए, प्रभा शर्मा, सुषमासेन गुप्ता, प्रवीण खन्ना, आनंदी गैरोला, सरोज लिंगवाल, कमाला बड़ोनी, विजया पन्त तुली, प्रवीण खन्ना आदि उपस्थित थे।

संतोष श्रीवास्तव
सुमीता केशवा
(हेमंत फाउंडेशन)

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