सीरियली हीरो छाप एंकर और ऑनसाइकल सीएम

रेलम पेल मची है। जिसको देखिए वही मुंह उठाए भागा जा रहा है। हंफरी छूट रही है तो छूटे अपन तो भइया सबसे तेज़ हैं। हम सबसे अलग करेंगे। अच्छा? फलां ने इंटरव्यू फलाने सीएम का किया? कैसे किया? सोफे पर उल्टा बइठके? अच्छा रुको हम कुछ सोचते हैं। ज़रा कहो न यार सीएम लंगड़ी खेलते हुए इंटरव्यू देंदे मज़ा आ जाएगा। ज़मीनी नेता के तौर पर छवि बनेगी सो अलग।

यही चल रहा है आजकल। विकास मॉडल प्रश्नपत्र से सबने सवालों को टीप लिया है। सबके पास वही-वही सवाल है। नेताओं के पास वही-वही जवाब है। ज़ुबां दाएं फिसले तो आज़म बाएं फिसले तो शाह। करामात बस यही है। बेनी टेनी तो हैं ही उनको गिना नहीं जाता चुनावों में, वहां पर गटर बारहो महीने ओवर फ्लो रहता है क्या गिनना।

अपन तो मीडिया तक ही रहें। तो मीडिया मद में है। रिपोर्टर एंकर टैंकर वैंकर सब तामझाम एक साथ चले रहे हैं। इतना तामझाम तो सिकंदर के पास भी नहीं था जब वो विश्व विजय पर निकला था। एक एंकर कम संपादक भकभकाते हुए चुनाव एक्सप्रेसनुमा गाड़ी से निकलते हैं। कैमरा सनसनाता हुआ उनके पास से दूर चला जाता है। भीड़ भकभका रही है। चॉकलेटी फेस के सिरियली हीरो टाइप एंकर भीड़ में घुस जाते हैं। "बोलिए, बताइए, समझाइए, क्यों, कैसे, कहां, किसको वोट…" वो कहां गए नहीं मालूम कैमरा उनको खोज रहा है। आवाज़ बस आ रही है। भीड़ लपट गई है।

अगले दिन वो सुबह उठ गए हैं। गुसल गए या नहीं? नहीं मालूम पर लकदक होकर मि. सीएम का इंटरव्यू कर रहे हैं। सीएम साइकिल पर हैं। एंकर कम संपादक भी साइकिल पर हैं। दोनों साइकिल ऐसे चला रहे हैं जैसे एक घंटा पहले सीखी हो। वो सवाल पूछ रहे हैं डगमगाती हैडिल के साथ। सीएम साहब जवाब दे रहे हैं सकपकाती साइकिल के साथ। एंकर-संपादक नीले रंग की पतलून में हैं। सीएम पजामे में। एंकर ने टफ लुक वाली शर्ट पहनी है। सीएम ने समाजवादी कुर्ता।

सीरिलयली हीरो टाइप एंकर-संपादक साइकिल का बैंलेस बनाते सवाल पूछते हैं। समाजवाद…लोहिया…विकास? सीएम पैडल मारते जवाब देते हैं। समाजवाद…नेताजी…लैपटॉप…।

समाजवादी सीएम और आम जनता के जानिब से सवाल पूछते सिरियली हीरो टाइप एंकर के पीछे पिछले एक घंटे से सुरक्षा में लगे जवान तेज़ धूप में दौड़े जा रहे हैं। पीछे कुछ सफारी सूट में भी हैं जो तेज़ कदमों से उनके साथ चल रहे हैं। ऊपर कैमरा है शायद हवा में कहीं। नीचे कैमरा है साइकिल पर…सामने चलती गाड़ी में कैमरा है। सारा खेल दिखना है। समाजवाद से लेकर पत्रकार तक दिख रहा है। पूरी पारदर्शिता। पूरा जमीनी खेल। मजा लीजिए ये लोकतंत्र का चौथा मजूबत खंभा है। सीरियली हीरो टाइप एंकर-संपादक का तो नहीं मालूम पर समाजवादी सीएम की साइकिल महज साढ़े तीन लाख की है। लोहे की नहीं है शायद…कुछ अउरै मटैरियल है। अब लोहा-टोहा कहां चलता है…माफ कीजिए मैने लोहा कहा आपने लोहिया कहां से सुन लिया?

 

राकेश पाठक। संपर्कः rakesh.mahuaanews@gmail.com

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