एक पर्ची पर SHO नियुक्त हो सकता है लेकिन ठंडी रात में सीएम धरने पर बैठकर भी SHO का तबादला नहीं करा सकता

Sheetal P Singh : पूर्व गृह सचिव के अनुसार केन्द्रीय गृहमंत्री शिन्दे के यहाँ से दिल्ली के थानों में SHO लगाये जाने के लिये पुलिस कमिश्नर के पास पर्चियाँ भेजी जाती थीं। R K singh (पूर्व गृह सचिव) ने इस सूचना को प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों और कैबिनेट सचिव को बताया था। एक पर्ची पर SHO नियुक्त हो सकते हैं पर मुख्यमंत्री ठंडी रात में धरने पर बैठा हो किसी SHO का तबादला तक नहीं करा सकता? जबकि राष्ट्रीय दामाद के ख़िलाफ़ जाँच की बात करने पर खेमका के ख़िलाफ़ CBI जाँच के आदेश दिये गये हैं! (वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी. सिंह के फेसबुक वॉल से.)

Akhilesh Pratap Singh : मेरे एक मित्र हैं….वह एक शब्द का भीषण ढंग से इस्तेमाल करते हैं….भसड़……पहली बार सुना तो मैं भी अचकचाया था……बाद में पता चला कि यह ऐसी स्थिति के लिए है जब चौतरफा कन्फ्यूजन का मामला किसी की वजह से पैदा हो गया हो और अंदाजा नहीं लग पा रहा हो कि इसके बाद क्या होने वाला है……. तो अब आप ने भसड़ कर दिया है…..मैनेजिंग कमेटी और प्रिंसिपल आंय-बांय कर रहे हैं….समझ में नहीं आ रहा कि इस स्टूडेंट यूनियन का क्या करें……… मठाधीश कन्फ्यूज्ड हालत में….ज्ञानी लोग किताब के पन्नों की शरण में…. यह "अराजकता" स्वागत योग्य है….. एक दीवार और गिर जाए तो अच्छा ही है…. (अखिलेश प्रताप सिंह के फेसबुक वॉल से.)

Bunty Tripathi : मेरे साथी और माडल टाउन से विधायक Akhilesh जी को उनके जन्मदिवस के अवसर पुलिस ने एक बार फिर पीटा है… अपनी जनता के लिए चोट अखिलेश भाई के जन्मदिन का तोहफा है… अराजक कौन है, आप देख सकते हैं… जो पुलिस जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियो से इतनी बर्बरता से पेश आती है, वो पुलिस आम जनता के साथ कैसा सलूक करेगी, आप बस अंदाज़ा लगाइये… (बंटी त्रिपाठी के फेसबुक वॉल से)

Neeraj Diwan : बिल्ली के गू पर मोमबत्ती लगाकर तालियां बजाते हम लोग उत्सव मना लेने पर राज़ी है। अब तक तो अपन यही "कलात्मक अराजकता" की राजनीति पसंद करते आए हैं। ये कौन-सा "अराजक इंसान" हमें ज्ञान देने आ गया यार ? ये क्यों नहीं लेने देता 'केक' का मज़ा ? …गतांक से आगे – "अराजक तस्वीर"… अब तक आपने देखा.. सत्ता मिलते ही होता… बामन-क्षत्री मंचों पर लड्डू और सिक्कों में तौलाई-नागरिक अभिनंदन… लक्ष्मीपुत्रों और संघों के आभार-बधाई के फुलपेज विज्ञापन… फीता काटने-नारियल फोड़ने के अंतहीन कार्यक्रम… ठेके-अड्डों के बंटवारे पर लॉबी के गुप्त चिंतन-मंथन… धनपशु वसूलते चुनावी चंदे के एवज अपने कमीशन… ज़मीन से ज़मीर तक होता अवमूल्यन… बजबजाता चिंतन और सड़ता सिस्टम… मगर… अब उठी मरोड़, मगज में टेंशन… देखा हमने आज ''अराजक प्रदर्शन''! आदतन हम 'अराजक' कहां हैं? (नीरज दीवान के फेसबुक वॉल से.)

Arun Maheshwari : पचास साल से ज्यादा हो गये जब इलाहाबाद हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीश आनन्द नारायण मुल्ला ने भारत की पुलिस को वर्दीधारी अपराधियों का सबसे बड़ा गिरोह कहा था। इन तमाम वर्षों में भारत का एक-एक आदमी अपने दैनंदिन जीवन के अनुभवों से इस डरावनी सचाई को प्रत्यक्ष करता रहा है। रक्षक – भक्षक के इस एक समान चेहरे ने देश के हर नागरिक को त्रस्त कर रखा है। भ्रष्ट राजनीतिज्ञों के नग्न संरक्षण से विकृत हो चुके ये चेहरे सिर्फ दिल्ली में नहीं, देश के हर शहर, कस्बे और गांव तक के लोगों के लिये आतंक का रूप ले चुके हैं। पुलिस के खिलाफ आवाज उठाकर ‘आप’ ने देश की जनता की एक और दुखती रग पर अपना हाथ रखा है। वे इस अभियान से भारत के लोगों की गहरी वेदना को वाणी दे रहे हैं। हम सबकों उनके इस अभियान की पूर्ण सफलता की कामना करनी चाहिये। फिर एक बार 'आप' की इस पहल का अभिनन्दन। (अरुण माहेश्वरी के फेसबुक वॉल से)

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