कोई बता सकता है कि IIMC किस बीमारी से ग्रस्‍त है?

Abhishek Srivastava : किसी पत्रिका को अंग्रेज़ी और हिंदी जानने वाले एक समझदार पत्रकार की ज़रूरत थी। उसी सिलसिले में एक मित्र ने सलाह दी कि क्‍यों न IIMC से कैम्‍पस कर लिया जाय। अचानक याद आया कि सबसे ज्‍यादा बिकने वाली हिंदी की पत्रिका इंडिया टुडे और नील्‍सन के संयुक्‍त सर्वे में शीर्ष दस जनसंचार कॉलेजों में IIMC कहीं है ही नहीं। गोकि ऐसे सर्वेक्षणों की विश्‍वसनीयता संदिग्‍ध होती है, बावजूद इसके अगर फैशन डिज़ाइनिंग में NIFT और इंजीनियरिंग में शीर्ष पांच Indian Institutes of Technology जैसे सरकारी स्‍वायत्‍त संस्‍थान हो सकते हैं, तो आखिर भारतीय जनसंचार संस्‍थान में कौन सी दीमक लग गई है कि उसका कोई नामलेवा भी नहीं? ऊपर से पिछले कुछ वर्षों के दौरान इंडस्‍ट्री में आए IIMCians अनौपचारिक बातचीत में तूमार ऐसा बांधते हैं कि पिछला पुलित्‍ज़र पुरस्‍कार उन्‍हें ही मिला हो। क्‍या कोई साफ-साफ बता सकता है कि IIMC किस बीमारी से ग्रस्‍त है?

    Samar Anarya IIMC को आत्मश्लाघा रोग है.
 
    Abhishek Ranjan Singh एको अहम, द्वितयो नास्ति की मानसिकता से निकलना होगा.
 
    Anand Pradhan Abhishek Srivastava ji: जहाँ तक मेरी जानकारी है, ‘इंडिया टुडे’ का सर्वे सिर्फ स्नातक स्तर के पाठ्यक्रमों (अंडर ग्रेजुएट कोर्सेस) के लिए है. आई.आई.एम.सी में सिर्फ स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम (पी.जी. डिप्लोमा प्रोग्राम) हैं. इस कारण सर्वे में आई.आई.एम.सी को शामिल नहीं किया गया है. जाहिर है कि इस कारण उसका नाम ‘इंडिया टुडे’ की सूची में नहीं है. संभव है मेरी जानकारी गलत हो और मैं उसमें तुरंत सुधार करने के लिए तैयार हूँ. हालाँकि मैं खुद इस तरह के सर्वे और रैंकिंग पर विश्वास नहीं करता और इसे बेमानी मानता हूँ. दूसरे, यह भी स्वीकार करता हूँ कि आई.आई.एम.सी में हर लिहाज से सुधार और बदलाव की जरूरत है.
     
    Rajneesh Prakash Samar Anarya आत्मश्लाघा सामाजिक समस्या है … आईआईएमसी की जीन संरचना की कोई विशिष्ट विशेषता नही है …
     
    Subhash Gautam फर्जी सर्वे है ये सर्वे मुझ लगता है. बनिया और दुकानी शैशिक संस्थावो द्वारा किया गया है. टॉप टेन कांलेज की बात की गयी है. जिसमे "फ़ाईन आर्ट" के बेहतरीन कांलेज शान्तिनिकेतन विश्व भारती को बताया गया है. सर्वे वाले और संपादक को यही नहीं पता की शान्तिनिकेतन विश्व भारती कांलेज है की विश्वविधालय. ये पुरा सर्वे बनिया और शिक्षण संस्थानों के विज्ञापन (बेचवापन) को धयान में रख कर किया गया है, जो पूरी तरह से फर्जी है. पर एक बात के लिए इंडिया टुडे को सराहा जाना चाहिए की आज कल सेक्स सर्वे नहीं कर रहा है…

आईआईएमसी से पढ़े पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से.

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