अरिंदम चौधरी के IIPM को लेकर तीखा हुआ यूजीसी का रुख

नई दिल्ली। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन (यूजीसी) ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ प्लानिंग एड मैनेजमेंट (आईआईपीएम) को लेकर रुख कड़ा कर लिया है। यूजीसी ने जुलाई 2012 के नोटिस को एक बार फिर अपनी वेबसाइट पर पोस्ट किया है। इस नोटिस में स्टूडेंट्स को चेताया गया है कि आईआईपीएम को यूजीसी की मान्यता नहीं मिली है। यह इंस्टीट्यूट डिग्री नहीं दे सकता। यूजीसी आईआईपीएम के खिलाफ लीगल ऐक्शन का भी मन बना रहा है।

आईआईपीएम ने आरोप लगाया था कि यूजीसी के अधिकारी रिश्वत लेते हैं और उसके प्रतिस्पर्धियों का पक्ष लेते हैं। ग्वालियर कोर्ट के आदेश पर कदम उठाते हुए सरकार ने इंटरनेट सर्विस प्रवाइडर्स को निर्देश दिया था कि वे आईआईपीएम और इसके चेयरमैन अरिंदम चौधरी से संबंधित आर्टिकल वाले 73 वेबपेज ब्लॉक कर दें। सरकार के निर्देश में जुलाई 2012 के यूजीसी के नोटिस का भी संज्ञान लिया गया है। इसमें कहा गया है, 'आईआईपीएम यूजीसी ऐक्ट के हिसाब से यूनिवर्सिटी नहीं है। इस इंस्टीट्यूट को यूजीसी के ऐक्ट के तहत डिग्री बांटने का अधिकार नहीं है।'

यूजीसी के सीनियर अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने कोर्ट के आदेश की एक कॉपी यह देखने के लिए मांगी है कि इसमें यूजीसी का जिक्र किया गया है या नहीं? अरिंदम चौधरी ने कहा है कि उनका इंस्टीट्यूट ग्लोबल स्टैंडर्ड का एजुकेशन दे रहा है। चौधरी ने आरोप लगाया था यूजीसी और उसके टेक्निकल एजुकेशन रेग्युलेटर ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) ऐसे संस्थान हैं, जो करप्ट लोगों से भरे हए हैं। चौधरी ने यह भी कहा था कि यूजीसी और एआईसीटीई के एजुकेशन स्टैंडर्ड शर्मनाक हैं। चौधरी के मुताबिक, आईआईपीएम को इनके साथ अफिलिएशन नहीं होने का गर्व है। यूजीसी और एआईसीटीई के अधिकारियों ने चौधरी के स्टेटमेंट को गैर-जिम्मेदाराना करार दिया था। चौधरी ने यह भी आरोप लगाया कि यूजीसी जानबूझकर आईआईपीएम के बारे में गुमराह करने वाली सूचनाएं फैला रहा है, ताकि इसके कारोबारी हितों को नुकसान पहुंचाया जा सके। (एनबीटी)

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