इंडिया टुडे भी दूसरे मीडिया की तरह कनफ्यूज है गिलानी के मामले में

मुस्लिमों की गिरफ़्तारी पर इंडिया टुडे का नया अंक आया है। संतोष कुमार, मो. वक़ास और Dilip C Mandal की बाइलाइन से पहली स्टोरी है।

अच्छी है, मेहनत करके लिखी गई है, ज़रूर पढ़ी जानी चाहिए, लेकिन पता नहीं स्टोरी करते समय संजीदगी कितनी थी, कितनी नहीं थी, एस ए आर गिलानी (डीयू वाले) को इसमें इफ़्तिख़ार गिलानी (पत्रकार) लिख दिया गया है।

'गिलानी' (एस ए आर, इफ़्तिख़ार और सैयद अली शाह) के मामले में मीडिया जो चूक लगातार करता रहा है इंडिया टुडे ने भी उसे दोहराया!

(राज्यसभा टीवी के रिसर्चर दिलीप खान के फेसबुक वॉल से साभार)

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