ब्लैकमेलिंग के मामले में फिर फंसे इंडिया टीवी के मीडियाकर्मी, डॉक्टर से मागी थी फिरौती

दर्शकों के बीच इंडिया टीवी की छवि चाहे जैसी भी हो, दिल्ली पुलिस की क्राइम डायरी में चैनल की प्रसिद्धि दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है। अभी दक्षिण दिल्ली में चैनल की क्राइम रिपोर्टर भूमिका शर्मा की ब्लैकमेलिंग का केस ठंडा भी नहीं पड़ा था कि इसके और दो मीडियाकर्मी ऐसे ही एक दूसरे मामले में पूर्वी दिल्ली जिला पुलिस के हत्थे चढ़ गये हैं। मामला एक यूनानी डॉक्टर से ब्लैकमेलिंग का है और इनका तीसरा साथी रंगे हाथ पैसा लेते गिरफ्तार हुआ है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक मंडावली इलाके के एक यूनानी डॉक्टर मुकेश कुमार ने रिपोर्ट लिखवायी थी कि कुछ तथाकथित पत्रकारों ने उन्हें मरीजों को अंग्रेजी दवा लिखते हुए फिल्मा लिया है और अब उनसे पांच लाख रुपये मांग रहे हैं। पुलिस के मुताबिक तीनों ने मुकेश कुमार को धमकाया था कि अगर वो पैसे नहीं देंगे तो उनकी वीडियो फिल्म इंडिया टीवी पर प्रसारित कर दी जाएगी। तीनों डॉक्टर को लगातार फेन पर भी धमकी दे रहे थे। 

पुलिस ने जाल बिछा कर डॉक्टर से डेढ़ लाख रुपये पर सौदा निपटाने के लिए कहा। तीनों 'पत्रकारों' ने तय किया कि वे वीडियो क्लिप को पेन ड्राइव में दे देंगे और तयशुदा रक़म ले लेंगे। सौदे के अनुसार ये अदला-बदली मयूर विहार के एक निजी अस्पताल में होनी थी। शुक्रवार को करीब 9:45 बजे रात को इनमें से एक आरोपी हिमांशु मिश्रा को पुलिस ने रंगे हाथ ग़िरफ्तार कर लिया। हिमांशु की निशानदेही पर पुलिस ने फौरन सौरभ त्रिपाठी और सचिन मिश्रा को धर दबोचा। जांच में पता चला कि ये दोनों इंडिया टीवी के मीडियाकर्मी हैं।

पुलिस के मुताबिक़ तीनों ने स्वीकार किया है कि वे डॉक्टर से फिरौती मांग रहे थे। हिमांशु जबलपुर युनिवर्सिटी से पत्रकारिता में स्नातक है और बेरोज़गार जबकि बाकी दोनों इंडिया टीवी के तक़नीकी विभाग में कार्यरत हैं। पुलिस इस जांच में जुटी है कि क्या ये तीनों कहीं इंडिया टीवी के किसी संपादक के इशारे पर तो काम नहीं कर रहे थे? ग़ौरतलब है कि दक्षिण दिल्ली जिला पुलिस ने हाल ही में ऐसे ही एक अन्य मुकदमे में इंडिया टीवी की क्राइम रिपोर्टर भूमिका शर्मा पर मामला दर्ज़ किया है। उस मामले में भी पुलिस चैनल के संपादकों की संलिप्तता की जांच कर रही है।

उधर इंडिया टीवी के जीएम (एचआर) पुनीत टंडन ने मीडिया को बताया है कि पूर्वी दिल्ली में पकड़े गए मीडियाकर्मी उनकी एडिटोरियल टीम का हिस्सा नहीं थे और उन्हें भी भूमिका की तरह ही सस्पैंड कर दिया गया है। उन्होंने ये भी कहा कि रंगे हाथ पकड़े गये आरोपी का भी चैनल से कोई वास्ता नहीं है। टंडन के मुताबिक़ इंडिया टीवी ने इन मामलों की आंतरिक जांच भी शुरु कर दी है।


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