जादूगोड़ा में भी है महाठग चार्ल्स पोंजी का अवतार

जादूगोड़ा में एक साधारण युवक कमल सिंह द्वारा किया गया महा-घोटाला अमेरिकी महाठग चार्ल्स पोंजी  के याद दिलाता है जिसने  १९१९-२० के काल में अमेरिका के अप्रवासी इटालियन चार्ल्स पोंजी ने ९० दिनों में  लगभग ४० हजार लोगो से १५ मिलियन डॉलर से अधिक की राशि एकत्रित करके पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया था। लेकिन जादूगोड़ा जैसे छोटे लेकिन महत्वपूर्ण जगह से अरबो लेकर गायब हुए कमल सिंह की चर्चा उतनी नहीं हो रही है। 
क्या वह आसमान में चला गया या पाताल में समा गया या देश छोडकर चला गया ? यह किसी को पता नहीं है। सरकार को इसकी तनिक भी फिक्र नहीं है ,पूरी सच्चाई उजागर करने के लिए सरकार की और से अबतक कोई पहल नहीं की गयी है। वहीं नारायण साईं को खोजने के लिए गुजरात में सरकार ने हर दिन लाखों रुपये खर्च किये। लेकिन जादूगोड़ा और आसपास के क्षेत्रो के असंख्य लोगो के जीवन से दुराचार और खिलवाड़ करने वाले को ढूंढने के प्रति झारखंड सरकार को कोई चिंता नहीं है। सरकार की सोच में यह कोई मामला ही नहीं दीखता कमल सिंह का सारा नाम पता  ठिकाना भारत सरकार के पास  दर्ज है। मजे की बात यह है की कमल सिंह एक सरकारी उपक्रम का कर्मचारी भी है। वह अपनी पोंजी स्कीमे चला चला कर लोगो को ठगता भी रहा और उपक्रम से वेतन भी उठाता रहा और लोगो को आकर्षित करने के लिए कुछ व्यावसायिक उपक्रम का उद्घाटन बड़े-बड़े लोगो और अधिकारियों से कराता रहा। लोग इस कदर झांसे में आ गए की प्रति माह लाख में पांच हजार और बीस माह में दुगना के चक्कर बैंको से कर्ज लेकर और यहां तक की बीवी के गहने और जमीं बेचकर भी इन स्कीमो में पैसा लगा दिया। कमल सिंह ने गुवाहाटी ,कोलकाता , थाणे , मुंबई , अहमदाबाद , नई दिल्ली , धनबाद , जैसे शहरो के पतों पर कई कंपनियां बनायी  और इन कंपनियों में कई लोग  निर्देशक बनाए गए लेकिन सरकार  एक भी निदेशक को अभी तक पूछताछ के लिए खोज नहीं पायी है। क्या सभी एक साथ गायब हो सकते है ?
 
चारा घोटाले में महज अनुशंषा या पैरवी पत्र लिखने की वजह से डॉ जगन्नाथ मिश्र जैसे लोग जेल की हवा खा सकते है तब कमल के साथ गलबाहीं लगाने और नौकरी से लेकर धंधा में संरक्षण देने वालो की पहचान भी नहीं की जा सकती ? सरकार , प्रशासन ,पुलिस और जादूगोड़ा में यूरेनियम जैसे जरुरी धातु के प्रोसेसिंग से प्रदुषण पर पूरी दुनिया में हंगामा मचानेवाले एनजीओ और मानवाधिकार संगठनो की चुप्पी बहुत कुछ बता रही है की सभी आम आदमी को सिर्फ धोखा देने जानती है और आम आदमी के नाम पर सिर्फ रोटियां सकने का काम करती है।
जादूगोड़ा के युवक देवाशीष सेन जो वर्तमान में युके में काम करते है उन्होंने बताया की उन्होंने कमल के कंपनी में विपुल भकत  के माध्यम से १२ लाख रुपय जमा किये थे वो उसकी जिंदगी भर की कमाई थी , उसने बताया की उनके पिताजी की मौत बचपन में ही हो गयी थी और उन्होंने जिंदगी में बहुत मेहनत की ट्यूशन पढ़ाये और अपनी पढ़ाई भी की और टाटा कम्युनिकेशन सर्विस युके में काम कर रहें है उनका बचपन से ही सपना था की अपनी मां के लिए अपना घर खरीदूंगा और युके से आकर  भारत में ही कहीं नौकरी  कर अपनी मां की सेवा करूंगा लेकिन कमल सिंह के झांसे  में आकर मेरी जिंदगी तबाह हो गयी है और मेरा सपना टूट गया है , देवाशीष सेन चाहते है की कमल और उसका पूरा ग्रुप उसके संरक्षक और उसके जितने भी कंपनियां है वो सही है या फर्जी है इसकी जांच सरकार द्वारा आयोग बनाकर किया जाए।  

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