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सतीश के. सिंह, इन्द्रजीत राय और आमोद का पाजिटिव मीडिया के साथ 26 दिन के सफर का सच

बाजार से तमाम खबरें आ रही हैं…. कोई कुछ कह रहा है तो कोई कुछ… लेकिन असल खबर की शुरुआत उस वक्त हुई जब नवीन ज़िंदल पाज़िटिव मीडिया के दफ्तर में पांच दिन पहले 12.30 बजे आए… मैनेजमेंट के टाप अधिकारियों की मीटिंग बुलाई गई… इस मीटिंग में रीजनल चैनल के एडीटर, सीईओ, न्यूज़ डायरेक्टर सतीश के सिंह, डिप्टी एडीटर और एसआईटी व स्पेशल ब्यूरो हेड का काम देख रहे इन्द्रजीत भी शामिल हुए… सभी चैनल को आगे बढ़ाने का ब्लूप्रिंट अपने दिमाग और डायरी में नोट कर के मीटिंग आए थे.. क्योंकि पहली बार मालिक जिंदल साहब पाजिटिव मीडिया के दफ्तर पधारे थे…

बाजार से तमाम खबरें आ रही हैं…. कोई कुछ कह रहा है तो कोई कुछ… लेकिन असल खबर की शुरुआत उस वक्त हुई जब नवीन ज़िंदल पाज़िटिव मीडिया के दफ्तर में पांच दिन पहले 12.30 बजे आए… मैनेजमेंट के टाप अधिकारियों की मीटिंग बुलाई गई… इस मीटिंग में रीजनल चैनल के एडीटर, सीईओ, न्यूज़ डायरेक्टर सतीश के सिंह, डिप्टी एडीटर और एसआईटी व स्पेशल ब्यूरो हेड का काम देख रहे इन्द्रजीत भी शामिल हुए… सभी चैनल को आगे बढ़ाने का ब्लूप्रिंट अपने दिमाग और डायरी में नोट कर के मीटिंग आए थे.. क्योंकि पहली बार मालिक जिंदल साहब पाजिटिव मीडिया के दफ्तर पधारे थे…

मीटिंग शुरू हुई.. मौजूद लोगों ने दर्शकों को जोड़ने वाले कार्यक्रम और न्यूज़ को धार से दिखाने के आईडिया देना शुरू कर दिया… 10 मिनट चुप रहने के बाद जिंदल साहब ने कहा- एसआईटी क्या कर रही है.. मुझे ज़ी न्यूज़ के खिलाफ स्टोरीज़ चाहिए.. स्टिंग आपरेशन चाहिए.. मीटिंग में मौज़ूद सभी के चेहरे उतर गए… जिंदल साहब ने कहा कि सीबीआई मुझसे पूछताछ कर रही है.. जी न्यूज़ पर खबर चल रही है.. हमें उनके खिलाफ बड़ा आपरेशन लांच करना पड़ेगा… इस आपरेशन के लिए एसआईटी और स्पेशल ब्यूरो के हेड इन्द्रजीत राय पर दबाव डाला जाने लगा… ये बात पूरा पाजिटिव मीडिया जानता है…

इस मीटिंग के बाद जब चार-पांच दिन बाद तक सतीश के. सिंह की टीम ने ज़ी के खिलाफ कुछ भी नहीं किया तो जिंदल साहब ने फिर मीटिंग बुलाई.. दबाव और बढ़ाया… ज़ी के खिलाफ गलत तरीके से स्टोरीज़ बनाने और चलाने के लिए कहा… मामला यहीं बिगड़ गया.. सतीश के सिंह की टीम के लोगों को ये कहते सुना गया कि अगर इस चैनल को पेशेवर तरीके से नहीं चलाना था तो मैनेजमेंट को पहले ही बता देना चाहिए था.. हमारे 26 दिन क्यों खराब करवाए… पहले बता देते तो हम सब एक अच्छी नौकरी छोड़ कर यहां नहीं आते… उसी वक्त लग गया था कि सतीश के. सिंह का कार्यकाल यहां एक महीने से भी कम का रहेगा…

एसआईटी और स्पेशल ब्यूरो हेड इन्द्रजीत राय ने पिछले तीन चार दिन से अपनी टीम के लोगों को ज़ी के खिलाफ कुछ करने या ना करने निर्देश देना बन्द कर दिया था… वो अलग बैठने भी लगे थे… ये बात चैनल के लोगों को समझ में नहीं आ रही थी.. सतीश के. सिंह भी जिस उर्जा के साथ चैनल को पहले चला रहे थे, ये तीन-चार दिन उससे बिल्कुल अलग थे… आमोद जो हमार के इनपुट हेड थे, उनके चेहरे पर भी तनाव साफ दिख रहा था… चर्चाएं ये भी थी कि इस्तीफा पहले ही हो गया था… मैनेजमेंट के आग्रह पर इन लोगों को तब तक रुकने के लिए कहा गया था जब तक नए लोगों की न्युक्ति नहीं हो जाती… लेकिन इन लोगों ने तीन-चार दिन से ज्यादा का वक्त नहीं देने की बात मैनेजमेंट से कह दी थी…

बात बात में इन तीनों लोगों को ये कहते भी सुना गया कि नौकरी तो आज नहीं कल मिल जाएगी… अगर इज्जत चली गई तो कैसे मिलेगी… पाजिटिव मीडिया के मैनेजमेंट में इस वक्त खलबली मची हुई है… अरबपति नवीन जिंदल नें करोड़ों रुपए तो लगा दिए लेकिन उनके तीन सबसे महत्वपूर्ण पद इस वक्त खाली हैं और आगे भी कुछ दिन खाली रहेंगे… पैसे की ताकत बड़ी होती है.. ये भी तय है कि कोई ना कोई ज़रूर इन पदों को भरेगा… लेकिन सवाल वही है कि यहां ज़ी न्यूज़ से दुश्मनी निकालने के लिए पत्रकार खरीदे जाएंगे या फिर पत्रकारिता करने का मौका भी ये चैनल पत्रकारों को देगा….। (कानाफूसी)

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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