IRS 2012 Q4 : राजस्‍थान-एमपी में सर्वाधिक बढ़त वाला अखबार बना राजस्‍थान पत्रिका

मुम्बई। अपनी विश्वसनीय खबरों व निर्भीकता के कारण देश भर में पहचान रखने वाला पत्रिका वर्ष 2012 की चौथी तिमाही में 36 हजार औसत पाठक जोड़कर देश के 10 शीर्ष अखबारों में सर्वाधिक बढ़त वाला समाचार पत्र बना है। भारतीय पाठक सर्वेक्षण (आईआरएस) की मुम्बई में जारी ताजा सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक पत्रिका समूह की कुल पाठक संख्या 1 करोड़ 97 लाख 25 हजार है।

राजस्थान पत्रिका को इस रिपोर्ट में फिर राजस्थान का सिरमौर घोषित किया गया है। वहीं मध्यप्रदेश में अन्य प्रमुख अखबारों की पाठक संख्या में इस अवधि आई गिरावट के बीच पत्रिका ने करीब 3 हजार औसत पाठक जोड़े।

पत्रिका समूह ने जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा व बीकानेर समेत शहरी क्षेत्रों में 58.83 लाख कुल पाठकों के साथ अपना शीर्ष स्थान बनाए रखा है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी पत्रिका ने पहले से ही बढ़त ले रखी है। ऑडिट ब्यूरो आफ सर्कुलेशन की रिपोर्ट (जनवरी- जून 2012) के हिसाब से जयपुर शहर में राजस्थान पत्रिका नम्बर 1 अखबार है। प्रदेश के कुल हिन्दी पाठकों में से लगभग 81 प्रतिशत पत्रिका समूह के अखबार पढ़ते हैं। जोधपुर संस्करण में तो प्रतिस्पर्धी से पत्रिका 3.48 लाख तथा कोटा संस्करण में 1.62 लाख कुल पाठक संख्या ज्यादा है। इस रिपोर्ट के अनुसार पत्रिका का रेडियो स्टेशन 95 एफएम तड़का जयपुर और कोटा शहरों में नम्बर 1 रेडियो स्टेशन घोषित किया गया है।

मध्यप्रदेश में तेज रफ्तार : अल्प समय में ही मध्यप्रदेश में धाक जमाने वाली पत्रिका ने 2012 की चौथी तिमाही में प्रदेश में करीब 3 हजार नए औसत पाठक जोड़े हैं। वहीं छत्तीसगढ़ में 6.28 लाख कुल पाठकों के रूप में धमाकेदार उपस्थिति दी है। इस सर्वे के अनुसार छत्तीसगढ़ के प्रमुख समाचार पत्रों में पत्रिका ही ऎसा है जिसकी औसत पाठक संख्या इस तिमाही में 14 हजार बढ़ी है। मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में पाठक संख्या के ये आंशिक आंकड़े ही हैं।

मध्यप्रदेश- छत्तीसगढ़ में अल्प समय में ही पत्रिका को पाठकों का जो स्नेह मिला है वह पाठकों का पत्रिका की निर्भीक लेखनी पर भरोसा दर्शाता है। वहां पत्रिका ने हर मुद्दे पर जनता की आवाज उठाई तथा पीडितों को राहत दिलाने का काम किया। मध्यप्रदेश में पत्रिका के प्रति पाठकों के रूझान का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसी तिमाही में वहां दैनिक जागरण के 1 हजार, नई दुनिया के 75 हजार, नवभारत के 9 हजार, दैनिक भास्कर के 10 हजार, राज एक्सप्रेस के 22 हजार, नव दुनिया के 23 हजार और हरिभूमि के 22 हजार औसत पाठक संख्या में गिरावट आई है। इस प्रकार 1 लाख 62 हजार औसत पाठकों ने इन अखबारों से मुंह मोड़ा है। उल्लेखनीय है कि ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन (जनवरी- जून 2012) के आंकड़ों के अनुसार पत्रिका समूह देश के दूसरे सबसे बड़े हिन्दी दैनिक अखबार समूह के रूप में उभर कर आया है।

एकाधिकार ध्वस्त : आईआरएस के इस सर्वे की विशेष बात यह है कि पत्रिका ने मध्यप्रदेश में अभी तक छाए एकाधिकार को जबर्दस्त तरीके से ध्वस्त कर दिया। उल्लेखनीय है कि ऑडिट ब्यूरो आफ सर्कुलेशन की रिपोर्ट (जनवरी- जून- 2012) के अनुसार पत्रिका भोपाल व इन्दौर जैसे प्रमुख शहरों में नम्बर वन है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि कितनी तेजी से मध्यप्रदेश के पाठक पुराने अखबार से नाता तोड़ कर पत्रिका से जुड़ रहे हैं। पाठकों के स्नेह और विश्वास के दम पर अर्जित यह सफलता हम अपने पाठकों को ही समर्पित करते हैं। (पत्रिका)

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