मुलायम के रास्ते पर ही चले हैं केजरीवाल !

अरविंद केजरीवाल ने कल दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। भ्रष्टाचार और फिजूल खर्ची के खिलाफ सरकारी यानी जनता के धन का दुरुपयोग जैसे तमाम मुद्दों को लेकर जनता के बीच आवाज बुलंद करके ही केजरीवाल आज इस स्थिति  में आये हैं। यहां तक तो सब ठीक है। 
मगर अपने  शपथ ग्रहण समारोह को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित करके वह दिल्ली और देश को की जनता को क्या संदेश देना चाहते हैं? अपना आशय उन्हें पहले स्पष्ट करना चाहिए था! आखिर एक सादे समारोह में जो काम बिना किसी अतिरिक्त खर्चे के हो सकता था उसके लिए इतने बड़े पैमाने पर दिखावा करने की क्या जरुरत थी? यह उनकी कथनी और करनी का वह पहला फर्क है जो किसी भी राजनीतिक  दल या नेता में सत्ता आने के बाद आ ही जाता है। 
 
मुझे याद है कि सन १९८९ में जब सपा मुखिया कांग्रेस के खिलाफ एक लंबे और जबरदस्त आंदोलन के बाद पहली बार उत्तरप्रदेश जनता दल-भाजपा  की सरकार के मुख्यमंत्री बने थे, तब उन्होंने भी राजभवन के बजाये लखनऊ के केडी सिंह बाबू स्टेडियम में ही शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया था। मुलायम सिंह यादव एक घोषित राजनेता और राज़नीतिकं दल के मुखिया थे ,उनका दल सत्ता में आया था उन्हे अपनी विजय का परचम अपने ही तरीके से लहराना था सो उन्होंने किया। 
उन्होंने भ्रष्टाचार और फिजूलखर्ची और सादगी का वह लबादा नहीं ओढ़ा था,जो आज केजरीवाल ने ओढ़ा है। फर्क इतना है कि मुलायम के साथ भाजपा थी और केजरीवाल के साथ आज कांग्रेस है। तब मुलायम के लिए भाजपा साम्प्रदायिक थी और आज केजरीवाल के लिए कांग्रेस भ्रष्ट ! 
 
जाहिर सी बात है कि लालबत्ती से सरकारी धन की बर्बादी नहीं रुकेगी। सुरक्षा नहीं लेने से सरकारी पैसे का सदुपयोग नही होगा ,आखिर जो सुरक्षा कर्मी उनकी सुरक्षा में आते वह उनकी सुरक्षा में न आने के बाद भ नौकरी पर रहेंगे और वेतन लेंगे ही,कहीं भी उनको तैनात किया जाए! केजरीवाल की सादगी तब थी जब वह चुप-चाप उपराजयपाल के समक्ष बेहद सादगी से बिना किसी तमाशे के शपथ लेते और अपना जनता को रहत देने का,बिजली सस्ती और पानी मुफ्त देने का ऐलान करते,ऐसे तमाम फैसले करते जिनसे सरकारी धन कि बर्बादी रूकती और न केवल जनता को बल्कि अन्य राजनीतिक दलों को भी लगता कि वाकई यह आदमी कुछ करके दिखाने वाला है! हो सकता मेरा इस समय यह कहना जल्दबाजी कहा जाए मगर इस सच को ठुकराया नहीं जा सकता कि रामलीला मैदान आंदोलन का स्थान तो हो सकता है किसी संवैधानिक सरकार के अस्तित्व में आने के लिए नहीं,हो सकता है उन्होंने यह सोचा हो जिस रामलीला मैदान ने उन्हें दिल्ली का मुख्यमंत्री बना दिया उस भूमि को इस तरह से अपना आभार प्रकट करें ,मगर इसके लिए केवल शपथ ग्रहण ही उपयुक्त नहीं कहा जा सकता। 
 
आखिर मौजूदा राजनीतिक दलों के काम और नीतियों से खुली असहमति जता कर फिर उनका ही अनुसरण करके केजरीवाल ने वोटों के बाजार में एक और दुकान का शुभारंभ नहीं कर दिया? इस विचार को खारिज करने के लिए मजबूत तर्क की जरुरत है ,जो उन्हें आज नहीं तो कल देना ही होगा! अरविंद केजरीवाल को आज पूरा देश शुभकामनाएं दे रहा है,दिल्ली उनकी तरफ आखें फाड़ कर देख रही है ,आखिर बाकी राज्यों की सरकारें भी यह जानना चाहत हैं कि केजरीवाल क्या ऐसा करते हैं जो सबसे अलग होगा! मगर रामलीला मैदान का नाटक समझ से  परे है! उन्हें वाकई कुछ करना है और जनता की  राय लेकर काम करना है तो मैं भी उन्हें कुछ सुझाव देना चाहता हूं:-
 
 
दिल्ली के नए मुख्यमंत्री को इन सुझावों को पढ़ने  से पहले यह संकल्प लेना जरुरी है कि  PR.,Advertising ,इमेज building करने वाली कंपनियों से दूर रहना है। कॉर्पोरेट सिस्टम को जड़ से खतम करके एक ऐसी व्यवस्था बनानी है जिसमे दिखावा नहीं स्थायित्व और सुविधा हो और आम आदमी भी उस व्यवस्था को जान ले।
१- प्रत्येक चुनाव में सभी नागरिको के लिए मतदान अनिवार्य ,समीक्षा के लिए एक आयोग का गठन ,जैसे इनकम टैक्स  करता है कि किस किस ने रिटर्न नहीं भरा, यह आयोग केवल समीक्षा करेगा और मतदान न करने वाले के समस्त नागरिक अधिकार समाप्त, करने तक जैसा दंड।
२-लोकसभा और विधानसभा समेत सभी सहकारी और निकाय चुनावों में मतदान के लिए एक हफ्ते का न्यूनतम समय,चुनाव आयोग को अभी कह दीजिये कि दिल्ली में एक दिन में नहीं होगा मतदान।
३ -मोबाईल एटीम के जैसे वोटिंग मशीनें लिए वैन घर जाकर मतदान लेंगी।
४ -कोई सरकारी मीटिंग किसी फाइव स्टार होटल में नही होगी।
५ -सरकारी दफ्तरों होने वाली बैठकों में चाय नाश्ता प्रति व्यक्ति २५ रुपये से ज्यादा स्वीकार्य  नहीं होंगा । काजू बादाम खाने हैं तो घर जाकर खाइये।  लंच केवल उन अतिथियों के लिए होगा, जिनको सामूहिक रूप में बुलाया गया हो,और इसके लिए अधिकतम ५० रुपये की  अनुमति ,ऐसी मीटिंग बंद जिसमे खाना खिलाना पड़े,आखिर अपने ही मातहत कर्मचारियों और अफसरों को रोज तनख्वाह देकर मेहमान बनाना कहां तक उचित है ?
६ -गैस पेट्रोल डीजल औरआटा, दाल ,चावल ,मसाले, घी ,तेल ,चाय ,काफी, फल सब्जी ,किताबें आदि से वैट और बाकि टैक्स की दरें तुरंत आधी। सरकारी विभागों को चलाने के लिए आखिर टैक्स के जरिये जनता से धन वसूली बंद। भ्रष्टाचगार यदि आधा भी कर दिया तो अतिरिक्त टैक्स नहीं लगाना पड़ेगा।
७- सरकारी डिस्प्ले विज्ञापन अधिकतम एक साल में चार और नेताओं की बरसी के विज्ञापन बंद ,उन्हें सिर्फ इतिहास में पढ़ाया जाए और उन्ही नेताओं को इतिहास में पढ़ाया जाए जिनके चरित्र संबंधी विवाद हों। 
 
८- मीडिया को खुश करने के लिए बड़े-बड़े विज्ञापन  देने का सिलसिला  बंद, सरकारी डिस्प्ले विज्ञापन का अधिकतम साइज १०० सेमी से अधिक नहीं होना चाहिए। सरकारी योजनाओं के प्रचार के लिए विज्ञापन ठीक है मगर योजना से देश कि हालत बदल गयी यह प्रचार अनुचित और जनता के पैसे की बर्बादी है। आखिर बदली हुई हालत जनता खुद बोलेगी।
९-सरकारी समारोह में पत्रकारों को उपहार प्रतिबंधित। इसके बदले श्राम कानूनो को अधिक मज़बूत बनाया जाए जिससे पत्रकारो की आर्थिक स्थिति सुधरे और उनकी सेवाओं संबंधी कानून कड़ाई से लागू हों।
१०- दिल्ली  राज्य के प्रत्येक नागरिक का स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा ,इसकी लिए आधार कार्ड या NPA राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर में नाम दर्ज होते ही मासिक आय का दो प्रतिशत हर नागरिक से शुल्क लेकर बाकि धनराशि सरकार अदा करे, नागरिकों से एक बार ही अंशदान लिया जाए,इस अंशदान से एक कोश बनाया जाए।।
११- झुग्गी झोपड़ियों स्वास्थय सफाई शिक्षा के लिए स्वयं सेवी दलों का गठन।
१२- बिजली की दरें सभी के लिए एक सामान,बिजली चोरी रोकने की दिशा में बड़ा कदम होगा। घरेलु व् व्यावसायिक व् औद्योगिक दरें एक सामान।
१३ – सरकारी अफसरों कर्मचारियों को घर से लाने और ले जाने के लिए बसों की व्यवस्था।
१४- दहेज, विवाह संबंधी विवादों को निपटाने के लिए महिलाओं के लिए विवाह पूर्व समजिक संबंध और व्यवहार प्रशिक्षण संस्थानों कि स्थापना जिसमें युवतियों और युवकों को यह बताया  जाए कि विवाह के बाद कैसे जीवन निर्वाह करना है ,जहां सब एक दूसरे को समझ जान सकें,इससे समाज में यौन हिंसा और विवाह संबंधी विवादों में कमी आएगी और एक स्वस्थ समाज की  रचना की दिशा में बड़ा काम होगा। यह एक ऐसी  पहल होगी जिसमे MSW डिप्लोमा प्राप्त युवक युवतियां और समाज और मनोविज्ञानी विवाह पूर्व इस बात का प्रमाण देंगे कि यह जोड़ा शादी के लिए मानसिक रूप से तैयार है। इससे समाज में विकृति नहीं बढ़ेगी और सरकार का धन व् समय इन विवादों में बर्बाद नहीं होगा ,वर्ना पुलिस अभी इन्ही मामलों  में उलझी रहती है। 
 
१५- अमेरिका की ओबामा सरकार ने अपने यहां एजुकेशन लोन पूरी तरह माफ़ कर दिया है। एक नीति बनाकर कम से कम उन छात्रों का लोन तो माफ कर ही देना चहिये जिन्होंने वाकई इसका सदुपयोग करके अच्छे नंबरों से उच्च शिक्षा प्राप्त की है। 
 
आशीष कुमार अग्रवाल
 

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