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सरकारी ज़मीन पर ‘बरिस्ता’ चला रहा है मुंबई प्रेस क्लब

मुंबई प्रेस क्लब अपने साफ सुथरे प्रशासन की बड़ी डींगें हांकता है। लेकिन असलियत में यहां कमेटी मेंम्बर्स की मनमर्जी के चलते नियम कायदों को ताक पर रख दिया गया है। कमेटी ने बिजली बचाने के उद्देश्य से दोपहर 3.30 से शाम 6.00 बजे तक एसी बंद रखने का निर्णय लिया है। तपती गर्मी के दिनों में भी ऐसा उटपटांग निर्णय लागू कर उस पर अमल किया जा रहा है। औऱ बिजली बचाने में अपने योगदान के लिए कमेटी अपनी पींठ खुद ही थपथपा रही है।

मुंबई प्रेस क्लब अपने साफ सुथरे प्रशासन की बड़ी डींगें हांकता है। लेकिन असलियत में यहां कमेटी मेंम्बर्स की मनमर्जी के चलते नियम कायदों को ताक पर रख दिया गया है। कमेटी ने बिजली बचाने के उद्देश्य से दोपहर 3.30 से शाम 6.00 बजे तक एसी बंद रखने का निर्णय लिया है। तपती गर्मी के दिनों में भी ऐसा उटपटांग निर्णय लागू कर उस पर अमल किया जा रहा है। औऱ बिजली बचाने में अपने योगदान के लिए कमेटी अपनी पींठ खुद ही थपथपा रही है।

लेकिन गुरुवार, 27 मार्च को दोपहर में जब कि एसी बंद होने का समय होता है, किसी कमिटी मेम्बर के खास गेस्ट के लिए इस नियम को तोड़ दिया गया। कमेटी मेंबर के खास गेस्ट के लिए बाकायदा एसी चलाया गया। जबकी उस वक्त चार सीट वाले छह और छह सीट वाला एक टेबल पुरी तरह भरे हुए थे। लोग गर्मी में परेशान होकर खाना खा रहे थे। तो क्या ऐसे में वो खास मेहमान महोदय ही एसी की हवा के हकदार थे और बाकी के मेम्बर्स नहीं?

उन महोदय की सेवा में प्रेस क्लब कर्मचारी डेविड को तैनात किया गया। ये सब क्या चल रहा है 'मिस्टर क्लीन' प्रेसिडेंट गुरुबीर सिंह जी? क्या यही आपकी निष्पक्षता है? रुल्स तो सबके लिए समान होने चाहिए। इस मनमानी का जवाब कौन देगा?

वैसे प्रेसिडेंट महोदय या कमेटी का कोई भी अन्य मेंम्बर तपती धूप में प्रेस क्लब नहीं आता। तो उन्हे यह कैसे पता चलेगा कि गर्मी क्या होती है। वो तो बस सदस्यों को तपते छोड़ अपने मेहमानो पर बची हुई बिजली लुटा रहे हैं।
 
इस
प्रेस क्लब में यहां कार्ड स्वाईप पेमेण्ट के लिए तीन पर्सेंट अतिरिक्त शुल्क भी वसूला जा रहा है। जबकि हम ही लोग न्यूज देते है की ऐसा कोई शुल्क पोईंट ऑफ सेल्स/सर्विस (पीओएस) पर वसूलना गैरकानूनी है। जो एग्रीमेंट मास्टरकार्ड, वीज़ा के साथ होता है उसके तहत पीओएस लोकेशन वाले व्यक्ति/ संस्था को प्रोसेसिंग/ सर्विस चार्जेज़ खुद देने होते हैं। और मुंबई प्रेस क्लब में तो कमेटी जर्नलिस्ट मेम्बर्स को ही लूट रही है। कितना कमा लोगे ऐसी गैरकानूनी वसुली से? यह खबर कौन लिखेगा?
 
वैसे आजकल बहुत कुछ गलत हो रहा है मुंबई प्रेस क्लब में। सरकार द्वारा दिए गए भूखंड पर बाहर की ओर 'बरिस्ता' चलाया जा रहा है। कोई  कोर्ट चला जाएगा तो जबाब तो आपको ही देना होगा ना 'मिस्टर क्लीन' प्रेसिडेंट गुरूबीर जी। आपके कमेटी मेम्बर्स की मनमानी आप जैसा क्लीन आदमी ही रोक सकता है।

मूल ख़बर, मराठी में:

मुंबई प्रेस क्लब बनलाय पदाधिकारयांची जहागिरी
 
मुंबई प्रेस क्लब कितीही गमजा मारत असला तरी निव्वळ "पदाधिकारयांची जहागिरी" बनून राहिला आहे. दिवसेंदिवस सत्ताधारी मन मानेल तसा वापर करू लागले आहेत. मराठीची गळचेपी तर या मंडळींनी कधीच सुरू केलीय. त्यांना इंग्रजी दैनिकात गुलामगिरी करणारे मर्द मराठी बटिक बनून सामील झाले आहेत. बाहेर छाती ताणून मिरवायचे आणि इथे शेपूट घालायचे. हे सर्व होयबा मराठीची गळचेपी रोखण्यात सपशेल अपयशी ठरले आहेत. दुसरीकडे नियमांचा बाउ करायचा, मराठी मंडळींना नियम शिकवायचे आणि स्वत:साठी ते मोडायचे, अशा पद्धतीने प्रेस क्लब पदाधिकारी वागू लागले आहेत.
 
गुरुवार
, २७ मार्च रोजी दुपारी साडेतीन वाजता आलेल्या  पदाधिकारयाच्या एका खास पाहुण्यासाठी इतरांना लागू असलेला नियम मोडण्यात आला. दिवसेंदिवस प्रेस क्लबचे बाजारीकरण करून सर्वसामान्य सदस्यांसाठी सोयी-सुविधा महाग करणारया या मंडळींनी वीज बचत या गोंडस नावाखाली दुपारी साडेतीन ते सायंकाळी सहा या काळात एसी बंद ठेवण्याचा निर्णय घेतला आहे. कडाक्याच्या, तापत्या उन्हात असे निर्णय घेणारे हे महाभाग थोरच! कारण ते स्वत: या वेळात इथे येत नाहीत. बचत करायची तर दुसरीकडे करा ना! तर हा वीजबचतीचा नियम करून यांनी स्वत:ची कोण पाठ थोपटून घेतली. मात्र, गुरुवार, २७ मार्च रोजी आलेल्या  पदाधिकारयाच्या एका खास पाहुण्यासाठी दुपारी साडेतीननंतरही एसी खास करून चालू करण्यात आला. कुठे गेले याचे नियम? का ते इतर सर्वसामान्य सदस्यांसाठीच? ज्यावेळी या पाहुण्याच्या सेवेत मिस्टर डेव्हिड यांना कामधाम सोडून गुंतविले गेले तेव्हा चार आसनी सहा व सहा आसनी एक असे सात टेबल्स फुल होते. सर्व मेम्बर्स कडाक्याच्या तापत्या उन्हात जेवण करीत होते. का ती सर्व का जनावरे होती? आणि या पदाधिकारयांचा पाहुणा काय स्वर्गातून आला होता? हे सारे धोरण आणि मनमानी निषेधार्ह आहे. या मनमानीचे उत्तर कोण देणार?
 
मिस्टर क्लीन  प्रेसिडेण्ट गुरूबीरजी कशाला हवेत असे बिनबुडाचे निर्णय? किती वीज वाचवताहेत तुम्ही? आर यु लिसनिंग गुरूबीरजी ?  या पक्षपाताचे उत्तर तुम्हाला द्यावेच लागेल, संबंधितांना विचारावेच लागेल. आता कदाचित असा बचाव केला जाईल की ते बाहेरचे पाहुणे होते, असू देत ना! रूल इज रूल; तो सर्वांना सारखाच. आपल्याकडून चांगल्या प्रशासनाची अपेक्षा आहे; पक्षपाती नव्हे!
 
प्रेस क्लबमध्ये कार्ड स्वाईप पेमेण्ट साठी तीन पर्सेंट अतिरिक्त शुल्क वसूल केले जातेय. आम्हीच पत्रकार बातम्या देतो की, असे कोणतेही अतिरिक्त शुल्क पोईंट ऑफ सेल्स/सर्व्हिस (पीओएस) वर घेणे बेकायदेशीर आहे. जे एग्रीमेंट मास्टरकार्ड, व्हिजा होते, त्यानुसार पीओएस लोकेशनची व्यक्ती/संस्था यांनाच प्रोसेसिंग/सर्व्हिस चार्जेस स्वत: द्यावे लागतात. मग मुंबई प्रेस क्लब पत्रकार सदस्यांनाच लूटतेय! किती कमाई होईल या बेकायदा शुल्कवसुलीतून? मिस्टर क्लीन प्रेसिडेण्ट बंद करा की ही वसुली.
 
तसे खूप काही चुकीचे चाललेय मुंबई प्रेस क्लबच्या प्रांगणात.  सरकारी भूखंडावर व्यावसायिक पोटभाडेकरू 'बरिस्ता' आणलाय. उद्या जर कुणी कोर्टात 'पीआयएल' केली तर उत्तर क्लीन प्रेसिडेण्ट्नाच द्यावे लागेल. तेव्हा गुरूबीर महाराज आवरा आपल्या मनमानी कमिटी मेम्बर्सना! आपल्यासारखा स्वच्छ माणूसच ते करू शकतो.

 

भड़ास को भेजा गया पत्र।
 

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
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