धीरे-धारे बंद होगा मीडियम वेव रेडियो, एफएम को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली। प्रसार भारती ने ऑल इंडिया रेडियो के लोकप्रिय चैनल विविध भारती को एफएम मोड पर करने का फैसला किया है। इसके साथ ही प्रसार भारती मीडियम वेव चैनलों की समीक्षा करने जा रहा है क्योंकि उसे लगता है कि वर्तमान में बहुसंख्यक श्रोता एफएम चैनलों को सुनते हैं। प्रसार भारती बोर्ड ने 14 फरवरी को हुई एक मीटिंग में मुख्य कार्यकारी अधिकारी जवाहर सरकार के एक प्रस्ताव को स्वीकार किया है जिसमें कहा गया है कि मीडियम वेव अब बीते समय की बात हो गई है। नई पीढ़ी ऑडियो वेव्स के लिए कार रेडियो और मोबाइल पर निर्भर है, जो अधिकतर एफएम मोड पर उपलब्ध हैं।

सरकार का कहना है कि अब मीडियम वेव चैनल्स को खत्म कर देना चाहिए। जब तक ये प्रक्रिया पूरी हो तब तक मीडियम वेव चैनल्स को समानांन्तर रूप से एफएम पर चलाया जा सकता है। सरकार ने बोर्ड से आग्रह किया है कि नए डीआरएम(डिजिटल रेडियो मोन्डायल) को, जो मीडियम वेव से संबंधित होते हैं, 'फ्रीज़' कर देना चाहिए। उनहोने कहा कि एफएम को मज़बूत करने की ज़रूरत है, देश भर के दूरदर्शन ट्रांसमिटिंग टॉवर्स का इसके लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। वे बहुत से टॉवर्स में ऐसा कर भी चुके हैं। सरकार ने यह भी सुझाव दिया है कि विविध भारती की एफएम सेवा को, जो अभी सिर्फ दिल्ली में उपलब्ध है, को अन्य तीन मैट्रो शहरों में उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

प्रसार भारती बोर्ड देश के 50 रेडियो ट्रांसमीटर्स से आस-पास की भूमि, जिसका उपयोग आय के लिए नहीं हो पा रहा है, के आर्थिक उपयोग पर भी विचार कर रहा है। पूर्व में सरकार ने सुरक्षा कारणों से भूमि के उपयोग की अनुमति देने से इंकार कर दिया था। प्रसार भारती का कहना है कि इस भूमि को सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनियों को या बैंको को दिया जा सकता है। विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर एआईआर के कार्यक्रम में बोलते हुए सरकार ने कहा कि संसद की स्टैंडिंग समेटी ने भी ऐसी भूमि के आर्थिक उपयोग का सुझाव दिया है।

सरकार ने यह भी कहा कि शार्ट वेव प्रसारण के श्रोताओं की संख्या बहुत ही कम है इसलिए इन्हे बन्द कर देना चाहिए। शार्ट वेव प्रसारण को बंद कर देने से 100 से 110 करोड़ रुपए की बचत की जा सकती है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि ऐसा करना संभव नहीं है क्योंकी शार्ट वेव प्रसारण का मक़सद विदेशी श्रोताओं और विदेशों में रह रहे भारतीयों तक पहुंचना है, लेकिन जहां-जहां श्रोता संख्या कम है वहां इस प्रसारण सेवा को बंद करने पर विचार किया जा सकता है।

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