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नेटवर्क10 बिका, अशोक पांडेय हुए बेहोश

मीडिया की दुनिया में कब क्या हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता. अपने ढेरों गैर-पत्रकारीय स्किल के लिए मशहूर अशोक पांडेय उस वक्त बेहोश हो गए जब उन्हें बताया गया कि जिस चैनल के वे संपादक हैं, वह बिक चुका है और नए मैनेजमेंट की तरफ से बुलाई गई स्टाफ की मीटिंग में आपको संबोधन देना है. मीटिंग में मौजूद कुछ लोगों ने बताया कि पांडेयजी संबोधन देते देते बेहोश हो गए. हालांकि उन्होंने बेहोशी के पहले मिले दिव्य ज्ञान के आधार पर राज्य के डीजीपी और अपने नए-पुराने मालिकों को एसएमएस कर दिया था कि अगर मेरे साथ कुछ होता है तो इसके लिए जिम्मेदार ये मालिक लोग होंगे.

मीडिया की दुनिया में कब क्या हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता. अपने ढेरों गैर-पत्रकारीय स्किल के लिए मशहूर अशोक पांडेय उस वक्त बेहोश हो गए जब उन्हें बताया गया कि जिस चैनल के वे संपादक हैं, वह बिक चुका है और नए मैनेजमेंट की तरफ से बुलाई गई स्टाफ की मीटिंग में आपको संबोधन देना है. मीटिंग में मौजूद कुछ लोगों ने बताया कि पांडेयजी संबोधन देते देते बेहोश हो गए. हालांकि उन्होंने बेहोशी के पहले मिले दिव्य ज्ञान के आधार पर राज्य के डीजीपी और अपने नए-पुराने मालिकों को एसएमएस कर दिया था कि अगर मेरे साथ कुछ होता है तो इसके लिए जिम्मेदार ये मालिक लोग होंगे.

बैठक में बेहोश होते ही पांडेय जी को आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया जहां बताया जाता है कि वे आईसीयू में एडमिट हैं. उधर, नए मालिक ने पुराने मालिक को फोन कर कहा कि भई, ये चैनल तो बेचा पर साथ में किसको भेजा जो ऐसा कर रहा है. पुराने मालिक ने नए मालिक को भरोसा दिया है कि चिंता न करो, जल्द ही पांडेयजी को टर्मिनेट कर देंगे. सूत्र कह रहे हैं कि पांडेय जी के अस्पताल से बाहर निकलने का इंतजार हो रहा है.

नेटवर्क10 के मालिक अब तक राजीव गर्ग हुआ करते थे. अब नए मालिक देवेंद्र नेगी हैं. अशोक पांडेय जी नेटवर्क10 के नाम पर देश भर में लंबा चौड़ा नेटवर्क बना लिया था. उनके करीबी कहने लगे थे कि नेटवर्क10 को पांडेयजी का ही चैनल समझो, पूरी तरह यहां पांडेयजी का कब्जा है. पांडेय जी ने यूपी में नेटवर्क10 की फ्रेंचाइजी ज्ञान स्वामी को दे दी. कुछ आन द रिकार्ड, कुछ आफ द रिकार्ड डील हुई हैं कई जगह. अब सब कुछ आंखों के सामने खत्म होता दिख रहा है पांडेयजी को.

हालांकि पांडेयजी को बहुगुणा जी से उम्मीदें हैं जो उनके कहने पर नए या पुराने मालिक को परेशान करें पर जानकार कहते हैं कि नेता सबसे ज्यादा समझदार होता है. वह जब देख लेता है कि संपादक जी की कुर्सी गई तो फिर वह अपने यहां भी भाव देना बंद कर देता है. पर पांडेयजी ठहरे कुशल खिलाड़ी, सो वह कहां चैन से रहने वाले. देखते रहिए, आगे-आगे होता क्या है. फिलहाल तो लोग पांडेय जी की भरपूर तरक्की, संपत्ति, जलवे की चर्चा करते नहीं अघा रहे हैं, साथ ही उन पर आए ताजे संकट की भी. (कानाफूसी)


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