ताल ठोंककर न्यूज चैनल को एंटरटेनमेंट चैनल यानि तमाशा चैनल बना दिया लेकिन शर्म उनको नहीं आ रही

Nadim S. Akhter : क्या आपने फिल्म पीपली लाइव देखी है? Anusha Rizvi की इस फिल्म में टीवी मीडिया (खासकर हिन्दी) की भेड़चाल, खबरों के मामले में जानबूझकर अपनाई जाने वाली कमअक्ली, अनावश्यक कम्पिटिशन और तिल का ताड़ बनाकर टीआरपी बटोरने की फितरत को बहुत ही चुटीले अंदाज में दिखाया गया है. साथ ही पत्रकारों और न्यूज रूम के अंदर की खींचतान को अनुषा ने रियलिस्टक तरीके से बड़े पर्दे पर उतारा है.

यह भारतीय मीडिया जगत का दुर्भाग्य ही है कि सब कुछ जानते-समझते हुए देश के हिन्दी टीवी मीडिया में आज पीपली लाइव, पार्ट-2 दुहराया जा रहा है. वह भी डंके की चोट पर. साधु के तथाकथित सपने की आड़ लेकर खजाना ढूंढने-खोदने का फूहड़ नाटक टीवी स्क्रीन पर जारी है. 24 घंटे. लगातार. महाखजाने की महाखोज.

यह बेशर्मी नहीं तो और क्या है कि एक-दो हिन्दी चैनलों ने पीपली Live की तर्ज पर अपनी कवरेज का नाम ही रख दिया है–डोडाखेड़ा Live. एक हिन्दी चैनल तो इससे भी एक कदम आगे निकल गया. स्क्रीन पर दो विंडो काट दिए. एक तरफ पीपली Live लिखा था और दूसरी तरफ डोडाखेड़ा Live. एक विंडो में फिल्म पीपली लाइव के शॉट चलाए जा रहे थे और दूसरे विंडो में खजाने की खोज.

लेकिन प्रोड्यूसर का मन इतने से भी नहीं भरा. उसने इसमें मसाला भी छौंका. फिल्म पीपली लाइव का गाना डालकर. —देश मेरा रंगरेजिया बाबू, घाट-घाट यहां घटता जादू— वाह! परफेक्ट! लग रहा था कि प्रोड्यूसर महोदय ने वाकई में टीआरपी पाने के लिए घाट-घाट का पानी पिया हुआ है, तभी इतनी क्रिएटिविटी दिखा रहे थे. लेकिन सच कहूं तो यह सब देखकर मुझे गुस्सा भी आ रहा था और चैनल की सोच पर तरस भी.

चैनल पर जिस तरह ये दिखाया जा रहा था, उसका मतलब साफ है. यानी आपको पता है कि आप तमाशा दिखा रहे हैं. तमाशा कर रहे हैं. पीपली लाइव की नकल है खजाने की खोज का कवरेज. फिर भी आप बने हुए हैं इस खबर पर. जानबूझकर. 24 घंटे. लगातार. स्क्रीन पर लिख रहे हैं तमाशा Live. लेकिन आपको शर्म नहीं आ रही. ताल ठोंककर न्यूज चैनल को एंटरटेनमेंट चैनल या यूं कहें कि तमाशा चैनल बना दिया लेकिन गम नहीं है. आप ऑन एयर मान रहे हैं कि फिल्म पीपली लाइव की तरह ये टीआरपी के लिए कर रहे हैं, भेड़चाल में रंगे हैं, non-sense दिखा रहे हैं, तमाशा क्रिएट कर रहे हैं, फिर भी सीना ठोंक रहे हैं. महाकवरेज जारी है. बहुत बड़े वाले बेशर्म हैं आप.

लेकिन ये अकेला चैनल नहीं था, जो पीपली लाइव का नाम लेकर महाकवरेज की धुनी रमा रहा था. दो-तीन और हिन्दी चैनल भी हैं, जिनके एंकर्स ने ऑन एयर कहा कि महाखजाने की खोज में जिस तरह वहां मीडिया का जमावड़ा लगा है, लोगों की भीड़ जुटी है, ऐसा लग रहा है कि ये फिल्म पीपली लाइव का पार्ट-2 हो रहा है. लेकिन शर्म तो उनकी आंखों में भी नहीं नजर आई. पीपली लाइव का नाम लेकर, उसका मजाक उड़ाकर वे भी इस पीपली लाइव, पार्ट-2 में शामिल थे. बहुत दिलेरी से. वे ये साबित करने पर तुले थे कि किस तरह हंस-हंसकर हम अपना मजाक खुद उड़ा सकते हैं. दर्शकों को बताकर कि हम आपके सामने पीपली लाइव, पार्ट-2 परोस रहे हैं, छिछोरापन कर रहे हैं, लेकिन आप बने रहिए हमारे साथ. ब्रेक के बाद बताएंगे कि साधु शोभन सरकार ने किस-किस जगह से एएसआई को खजाना खोदने को कहा है, कहां-कहां कितना खजाना है, ये सब, बस ब्रेक के उस पार. सभी चैनलों के एंकर्स (जिनमें कुछ बड़े गंभीर चेहरे भी थे) ये सारी बातें ऐसे बता रहे थे कि मानों उन्हें सब पता है. खुदाई हुई नहीं कि खजाना बस निकलने ही वाला है. हमें सब पता है. आप सिर्फ हमें टीआरपी दे दीजिए. इसीलिए ये सारी मेहनत हो रही है. आप बने रहिए हमारे साथ. प्प्प्ल्लीज्ज. plzzzzzz. एंकर्स के चेहरे पर आप उनकी प्लीज वाली विनती पढ़ सकते हैं.

तथाकथित महाखजाने की खोज में सारे चैनल के ओवी वैन्स और दिल्ली-राज्य की राजधानियों से भेजे गए तेज-तर्रार पत्रकार किले में डेरा-डंडा जमा चुके थे. एक चैनल का पत्रकार कुछ अलग करना चाह रहा था. सो उसने अपने कैमरा मैन को किसी ऊंचे टीले पर खड़ा कर दिया. लॉन्ग शॉट से कैमरा रिपोर्टर के चेहर पर जूम करता है. फिर रिपोर्ट वॉक थ्रू करना शुरू कर देता है. भाग-भागकर एक दुकान से दूसरे दुकान.

वहां कुकुरमुत्ते की तरह उग आए एक ठेले से दूसरे ठेले की तरफ जाता है. सब से पूछता है कि –ऐ भइया, ई काहे आप इहां दुकान लगाए हैं, कबे से लगाए हैं, का सोच के लगाए हैं. बताओ,बताओ हमरे दर्शक सब को. फिर एंकर कहती है कि ये सब नजारा, ये भीड़ किसी मेले से कम नहीं. ये फिल्म पीपली लाइव की याद दिलाता है. बने रहिए हमारे साथ. और ज्यादा जानकारी के लिए. (वैसे वह कहना ये चाह रही थी कि इस तमाशे में आपका ये सम्मानित चैनल भी शामिल है, सो तमाशा जारी है, अगर फोकट में देखना है तो बने रहिए हमारे साथ)

एक कमाल के रिपोर्टर भी वहां पहुंचे. इनका भी बड़ा नाम है टीवी के अंगने में. अपनी आवाज और दमदार पीटीसी के लिए जाने जाते हैं साहब. उन्होंने एक और ही तमाशा दिखाया. दर्शकों को बताया कि कैसे खजाना और सोना देखने के लिए एक स्कूल में छुट्टी हो गई है. छोटे-छोटे बच्चे अपने टीचर्स के साथ वहां किले में पहुंचे हुए हैं. कोई मसाला नहीं है तो बच्चों से ही बात कर ली. छोटे-छोटे बच्चों से साहब पूछने लगे, —बेटा, बताओं खजाना दिखा तुमको, सोना दिखा, सोना!! अब मासूम बच्चों को क्या समझ आता. हंस दिया बच्चे ने. मुंडी हिला दी नहीं अंकल नहीं. कहां है सोना!!! कमाल के रिपोर्टर भी हंस पड़े. समझ गए कि टीवी करे इस तमाशे ने उनकी छवि का भी तमाशा बना दिया. जय हो. लेकिन वो बेचारे भी क्या करें, दिल्ली हेडक्वार्टर से आदेश मिला होगा लखनऊ से सीधे वहां पहुंचने के लिए.

ये सारी तस्वीरें देखकर महाखजाने की खोज की कवरेज करने गए पत्रकारों पर तरस ही आ रहा था. बेचारे. अब इसमें खबर है ही क्या. यही ना कि एक सनकी साधु के सनक भरे तथाकथित सपने ने सरकार से लेकर एएसआई और बड़े-बड़े धीर-गंभीर संपादकों तक को हिला दिया है. सबने फैसला किया है कि महाकवरेज कराई जाए. रिपोर्टर भी क्या करे. जगह दिखा दी, कहां खुदाई होनी है, एएसआई के अफसरों की बाइट ले ली घटना स्थल से, पब्लिक की बाइट ले ली, खुदाई के लिए आए औजारों के विजुअल्स और मंदिर-किले परिसर के विजुअल्स भेज दिए.

बेचारे भरसक कोशिश कर रहे हैं कि कुछ नया मिल जाए ताकि हेडक्वार्टर से शाबाशी मिल जाए. महाखजाने की खोज में लगे रिपोर्टर्स खबर में किसी नए एंगल की खोज में लगे हैं. उन्हें देखकर मुझे फिल्म पीपली लाइव का वह सीन याद आने लगा जब एक तेज-तर्रार रिपोर्टर नई कहानी गढ़ता है. नत्था के पाखाने के रंग पर स्टोरी बनाता है और ये बताता है कि उसके पाखाने का अलग-अलग रंग किस तरह उसकी बदलती मानसिक स्थिति का विवरण देता है. तो समझ गए ना आप.

पीपली लाइव-2 की इस मौजूदा कवरेज में भी कुछ भी हो सकता है. रिपोर्टर्स परेशान हैं कि क्या नया ऐसा भेजें जिससे दूसरे

नदीम एस. अख्तर
नदीम एस. अख्तर
channels से आगे निकल सकें. तो हम दर्शकों को कभी भी स्टोरी में नया ट्विस्ट देखने को मिल सकता है. धमाकेदार. शानदार. वैसे एक चैनल ने कल रात इसकी भी कोशिश की. दावा किया कि शोभन सरकार ने उनसे EXCLUSIVE बातचीत की है. Breaking News की पट्टी चलाई. अब क्या थी वो ब्रेकिंग खबर, जिसने सबकुछ तोड़-फोड़ डाला!!. इसका ब्यौरा दूंगा, अगली कड़ी में. बने रहिए महाखजाने की महाकवरेज पर. लौटते हैं अल्प विराम के बाद.

लेखक नदीम एस. अख्तर युवा और तेजतर्रार पत्रकार हैं. कई अखबारों और न्यूज चैनलों में वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं. नदीम से संपर्क 085 05 843431 के जरिए किया जा सकता है.


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