भाषा तथा उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति निरस्त करने के लिए पीआईएल

भाषा शिक्षकों से सम्बंधित उत्तर प्रदेश शिक्षक अर्हता परीक्षा (यूपी-टीईटी) के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में एक पीआईएल दायर की गयी है।

याचिका के अनुसार राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद् (एनसीटीई) शिक्षकों की नियुक्ति हेतु न्यूनतम अर्हता निर्धारित करने के लिए सक्षम प्राधिकारी है, जिसने 11 फ़रवरी 2011 को शिक्षक अर्हता परीक्षा हेतु गाइडलाइंस जारी किया। इन गाइडलाइंस के अनुसार टीईटी के लिए बाल विकास और अध्यापन कला, दो भाषाएँ, गणित तथा पर्यावरण विज्ञान के पांच विषय अनिवार्य हैं।

इन नियमों के विपरीत उत्तर प्रदेश में भाषा शिक्षकों की एक नयी श्रेणी बना कर उनके टीईटी में मात्र बाल विकास एवं अध्यापन कला एवं सम्बंधित भाषा के प्रश्न पूछे जा रहे हैं।

डॉ. ठाकुर ने इन्हें एनसीटीई गाइडलाइन के पूर्णतया विपरीत और प्राथमिक शिक्षा के लिए हानिपरक बताते हुए भाषा शिक्षकों के सभी एनसीटीई परीक्षाओं और इनके आधार पर किये जा रहे उर्दू शिक्षकों की भर्ती को निरस्त करने का निवेदन किया है।

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