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सुख-दुख...

कोई भी व्यक्ति मुझ पर खबर न लिखने का दबाव नहीं बना सकता

आपके वेब पोर्टल भडास पर अपने बारे में पढ़ा। धांधली के संबंध में पशुपालन विभाग के  प्रमुख सचिव का कहना था कि बिना लिखित शिकायत के कोई कार्यवाही संभव नहीं है। इस पर मैंने स्वयं शिकायत की। मेरे द्वारा की गई शिकायत पर उप्र के मुख्य सचिव श्री जावेद उस्मानी ने स्वंय जांच के आदेश दिए हैं, जोकि प्रचलित है। साथ ही पशुपालन विभाग के अधिकारियों को हिदायत भी दी गई है कि बसपा नेता की माताजी के नाम पर हाल ही में बने विवि से कापी जांचने का कार्य नहीं कराया जाएगा। किस हद तक गड़बड़ी की जा रही है, इसका अंदाजा मेरी संलग्न् खबर पढ़कर ही लग जाएगा।

आपके वेब पोर्टल भडास पर अपने बारे में पढ़ा। धांधली के संबंध में पशुपालन विभाग के  प्रमुख सचिव का कहना था कि बिना लिखित शिकायत के कोई कार्यवाही संभव नहीं है। इस पर मैंने स्वयं शिकायत की। मेरे द्वारा की गई शिकायत पर उप्र के मुख्य सचिव श्री जावेद उस्मानी ने स्वंय जांच के आदेश दिए हैं, जोकि प्रचलित है। साथ ही पशुपालन विभाग के अधिकारियों को हिदायत भी दी गई है कि बसपा नेता की माताजी के नाम पर हाल ही में बने विवि से कापी जांचने का कार्य नहीं कराया जाएगा। किस हद तक गड़बड़ी की जा रही है, इसका अंदाजा मेरी संलग्न् खबर पढ़कर ही लग जाएगा।

जहां तक निदेशक पशुपालन द्वारा सूचना निदेशक को धमकी से संबंधित पत्र लिखने की बात है, स्वयं को जांच में बचाने के उद्देश्य से ही ऐसा किया गया है। निदेशक पशुपालन द्वारा दिए गए मोबाईल नम्बरों में से सिर्फ 8127786786 मेरा नम्बर है। बाकी दो नम्बरों के व्यक्तियों को मैं जानता तक नहीं और न ही इन नम्बरों पर कभी भी मेरी बात हुई है। निदेशक पशुपालन के अनुसार यदि, ये मेरे साथी हैं तो मेरी बात इन लोगों से अवश्य हुई होगी (कोई भी पत्रकार अथवा जांच अधिकारी कॉल डीटेल से इस तथ्य की पुष्टि कर सकता है)। निदेशक पशुपालन से मेरी सिर्फ एक बार बात हुई है वह भी बीस सेकेण्ड से भी कम समय तक, जिसे मैंने अपने शिकायती पत्र में लिखा भी किया था। कलम चलाना ही मेरा काम है, चाहे वह खबर के लिए चले, अथवा गलत चीजों का प्रतिरोध लिखित में करने के लिए चले, चाहे वह सोशल मीडिया में चले। निदेशक पशुपालन जैसा कोई भी व्यक्ति इस प्रकार से मुझ पर खबर न लिखने का दबाव नहीं बना सकता।

मुख्य बातें यह हैः

1. ओएमआर शीट की कार्बन कापी क्यों नहीं दी गई।
2. कापी जांचने की प्रक्रिया एक माह से अधिक समय तक प्रारम्भ क्यों नहीं की
गई। कापियां ऐसे ही क्यों पड़ी रहीं।
3. मनमाने तरीके से कापी जांचने का ठेका क्यों दिया गया।
4. किसी सरकारी एजेन्सी से सीसीटीवी की निगरानी में लाईव प्रसारण करके ही
धांधली रोकी जा सकती है, जिसे करने को विभाग तैयार नहीं है।

 

असलम सिद्दीकी, ब्यूरो प्रमुख,पंजाब केसरी। संपर्कः 8127786786

मूल खबर:
पंजाब केसरी का पत्रकार पशुपालन निदेशक पर बना रहा दबाव, मित्‍तल से की गई शिकायत

 

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