अर्नव selective journalism करते हैं?

Nadim S. Akhter :  अपने वादे के मुताबिक क्या इस ईमानदार महिला पुलिस अफसर को न्याय दिलाने की मुहिम छेड़ेंगे अर्नव? कल टाइम्स नाऊ पर 'मेधावी वाक योद्धा' अर्नव गोस्वामी खूब जुगाली कर रहे थे. मामला तरुण तेजपाल और यौन शोषण का था. पैनल में बैठे लोग भी चहक-बहक रहे थे. सुहैल सेठ और महिला अधिकारों पर काम करने वाली कवित कृष्णन ने अच्छा बोला. कविता ने तो अर्नव को बगलें झांकने को मजबूर कर दिया.

हुआ यूं कि अपनी हमेशा की आदत की तरह जब अर्नव अपने 'फिक्स्ड लाइन' के खिलाफ बोलने वालों को 'बोलती बंद' करने की कोशिश कर रहे थे (ये काम वह लगातार गेस्ट को टोककर और अपनी बात बार-बार दुहराकर करते हैं) तो कविता ने बहुत जायज सवाल उठाया. कविता ने कहा कि आप आसाराम और तेजपाल पर स्टैंड ले रहे हैं, लगातार कवरेज कर रहे हैं, ये अच्छा है लेकिन असम से लेकर कई ऐसे मामले हैं, जहां न्याय दिलाने का आपका यह 'युद्ध' दिखाई ही नहीं पड़ता. जब सेना के जवान रेप करते हैं, पुलिस वाले इसमें शामिल होते हैं और भी कई मामले हैं, जहां पीड़िता के प्राइवेट पार्ट्स में गोली मारी गई, तब आप लोग क्यों चुप रहते हैं. निर्भया के मामले में तो बहुत बड़ी-बड़ी बातें कर रहे थे सारे टीवी चैनल्स. तेजपाल पर भी कर रहे हैं लेकिन बाकी महिलाओं के साथ जब ऐसा ही अन्याय होता है इस देश में, तब उन खबरों को आप तवज्जों क्यों नहीं देते अर्नव? उसकी लगातार कवरेज क्यों नहीं करते, उनको न्याय क्यों नहीं दिलाते? क्या वे मामले तेजपाल और निर्भया-आसाराम के मामले से कम वजदार हैं, news worthy हैं??!!

कविता के इन सवालों पर अर्नव को जवाब नहीं सूझ रहा था क्योंकि वह एक आंधी की तरह बहस सिर्फ और सिर्फ तेजपाल पर कराना चाह रहे थे. कविता को टोकने लगे, मुद्दे पर बात करने को कहने लगे. लेकिन जब कविता ने जोर डाला तो अर्नव को कहना पड़ा कि हां, जितने मामले आपने बताए हैं वो सब news worthy हैं. उन सबको भी वैसे ही तवज्जो मिलनी चाहिए. हम सभी मामलों में ऐसा करते हैं और फिर तुरंत तहलका-तेजपाल विषय पर आ गए.

अभी जब भड़ास पर एक बहादुर महिला पुलिस अधिकारी की खबर पढ़ी कि किस तरह ईमानदारी से ड्यूटी करते वक्त चुनाव आयोग के एक अफसर ने उन्हें जलील किया और उन्हें हटवा दिया. मानसिक और सार्वजनिक रूप से प्रताड़ित इस महिला पुलिस अफसर ने विरोध में अपना इस्तीफा भेज दिया है. उम्मीद करता हूं कि अर्नव के असाइनमेंट डेस्क और इनपुट वालों को ये खबर मिल गई होगी और उन्होंने इसे अपने आज के न्यूज एजेंडे में शामिल कर लिया होगा. और ये भी उम्मीद करता हूं कि ईमानदार अफसर अशोक खेमका को कवरेज देने वाले अर्नव इस ईमानदार महिला पुलिस अफसर की खबर को भी उतनी ही तवज्जो देंगे. आज का News hour debate इस मुद्दे पर भी होगा.

और अगर ऐसा नहीं होता है तो फिर ये माना जाएगा कि अर्नव selective journalism करते हैं. खेमका को उन्होंने तवज्जो इसलिए दी कि मामले में रॉबर्ट वड्रा का नाम आ गया था. आसाराम-तेजपाल जैसे हाई-प्रोफाइल लोग ही उनके एजेंडे में होते हैं. और यदि ऐसा नहीं है, वो वाकई में true spirit में पत्रकारिता करते हैं तो इस ईमानदार महिला अफसर की पीड़ा भी देश के सामने रखी जानी चाहिए. और ये उम्मीद सिर्फ अर्नव से नहीं है, उन सभी सम्पादकों से है, जो स्क्रीन पर पत्रकारिता और सरोकार पर बड़ी-बड़ी बातें करते हैं. देखते हैं कि उनका सरोकार इस मामले को कितनी शिद्दत से उठाता है और इस बहादुर महिला पुलिस अफसर को न्याय दिलाने के लिए कितने दिन का अभियान चलाता है, जैसा उन्होंने तेजपाल के मामले में पीड़ित लड़की को इंसाफ दिलाने के लिए चलाया हुआ है. पूरी खबर इस लिंक पर पढ़ें

http://bhadas4media.com/article-comment/16175-2013-11-28-10-46-16.html
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