सिंगरौली पुलिस गोलीकांड मामले में पीड़ितों से मिला एकता मंच प्रतिनिधि मंडल

सिंगरौली।। सिंगरौली क्षेत्र में बीते 13 दिसंबर को घटित पुलिस गोलीकांड मामले में आदिवासी, सान,विस्थापित एकता मंच की तरफ से एक प्रतिनिधि मंडल मृतकों के परिजनों से मिला. इस दौरान प्रतिनिधि मंडल से शिकायत करते हुए परिजनों ने यह आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय के सेवा निवृत्त न्यायाधिश आर.पी त्रिपाठी के नेतृत्व में कराई जा रही जांच मात्र एक छलावा है और ऐसा सिर्फ गुनाहगार पुलिस कर्मिर्यों को बचाने के प्रयास में किया जा रहा हैं. 
परिजनों ने पूरी घटना की सीबीआई से जांच कराने की मांग दुहराई व कहा कि इलाके की जनता इससे कम कुछ भी स्वीकार नही करेगी. पीड़ित परिवारों से मुलाकात करने गये प्रतिनिधि मंडल से मृतक अखिलेश साह, उम्र 27 वर्ष, के पिता भरतलाल शाह ने कहा कि अखिलेश की मौत पुलिस अभिरक्षा में हुई है और इसके तमाम प्रमाण मौजूद हैं. उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि 5 दिसंबर 2013 को पूलिस की एक टीम ने अमझर स्थित उनके एक रिश्तेदार के आवास से अखिलेश को उठाया था. 6 तारिख को इस बात की तस्दीक जिला एस.पी ने भी फोन पर की थी जब शाम 7 बजकर 47 मिनट पर मोबाइल नंबर 09826861168 से उन्होनें अपने सहयोगी श्री मनराखन साहू की मौजुदगी में एस.पी के मोबाइल फोन पर कॉल किया था. उन्होने मांग की कि एस.पी. के कॉल डीटेल निकलवाने पर इस बात को प्रमाणित भी किया जा सकता है.
श्री भरतलाल ने यह दावा किया कि उनके बेटे की पूलिस अभिरक्षा में हुई मौत दरअसल जिले में डीजल और कबाड़ के अवैध कारोबार में पुलिस की संलिप्तता व हिस्सेदारी को छिपाने का प्रयास है. इस संदर्भ में मृतक का ममेरा भाई विजय शाह का एक बयान आई.जी के कार्यालय में पंजीबद्ध किया जा चुका है.
 
उन्होनें बताया कि आरंभ में पुलिस विजय को ही खोजने अमझर स्थित आवास पर गई थी जहां विजय के न मिलने पर रिश्तेदारी में आये हुए अखिलेश को उठा लिया. अगले दिन 6 दिसंबर की शाम जब एस.पी से भरतलाल ने फोन पर पुलिस द्वारा अपने बेटे अखिलेश के उठाये जाने संबंधी जानकारी लेनी चाही तो एस.पी ने आश्वस्त किया कि अखिलेश फिलहाल पुलिस के पास है और उसे सुरक्षित घर पहुंचा दिया जायेगा. किन्तु 7 दिसंबर को एस.पी अपनी बात से मुकर गये और भरतलाल व अन्य लोगों ने पुरा ब्योरा देते हुए बैढन थाने में पुलिस द्वारा अखिलेश के अपहरण की रिपोर्ट लिखानी चाही तो थानेदार एस.एस राजपूत ने रिपोर्ट लिखने से इंकार कर दिया. बाद में उसने परिजनों पर दबाव बनाते हुए सामान्य गुमशुदगी सम्बंधी एक आवेदन लिखवाकर ही मामला पंजीबद्ध किया और आश्वस्त किया कि शाम तक अखिलेश को घर पहुंचा दिया जायेगा. जब अगले दिन 8 दिसंबर को भी अखिलेश की घर वापसी नही हुई तो परिजनों ने रजिस्ट्री के मार्फत बैढन थाना, एस.पी,कलेक्टर, आई.जी, मुख्य सजिव राज्य सरकार, डी.जी.पी व मुख्यमंत्री कार्यालय को विस्तृत शिकायत भेजी. इस बीच एस.पी जयदेवन ने परिजनो में भय पैदा करते हुए विजय शाह के छोटे भाई संजय शाह को हिरासत में ले लिया और उसे जमकर मारा पीटा गया.
फिलहाल संजय पुलिस की अभिरक्षा में बनारस के एक अस्पताल में भर्ती है और जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहा है. ज्ञात हो कि जिस विजय साह को खोजने के दौरान अखिलेश व संजय को अवैध हिरासत में लिया गया उसी विजय साह ने आई.जी रीवा के समक्ष ये बयान दिया कि सिंगरौली एस.पी के द्वारा डीजल चोरी में होने वाली आमदनी में अपना हिस्सा लेने के लिए उसे व उसके परिवार को प्रताडित किया जा रहा है. अखिलेश की मौत का जवाब मांगने पहॅुचे स्थानीयजनो पर पुलिस फायरिंग के फलस्वरूप मारे गये नकीब उम्र 22 वर्ष के पिता लतीफ उर्फ छोटे ने मंच के प्रतिनिधी मंडल को बताया कि गोली मारने के पश्चात नकीब को पुलिस ने अस्पताल तक नही जाने दिया. अस्पताल ले जाने के प्रयास में लगे नकीब के मामा शमीम खान एवं उन्हे बेरहमी से पीटा गया. शमीम खान आज भी घायल अवस्था में हैं व चलने में असमर्थ हैं. नकीब के परिजनों ने यह मांग की कि पूरी घटना की सी.बी.आई जांच हो तथा एस.पी जयदेवन ए व थानाध्यक्ष एस.एस राजपूत समेत मौके पर मौजूद सभी प्रशासनिक-पुलिस अधिकारियों पर इरादतन हत्या और दंगा कराने का मुकदमा कायम किया जाये. शमीम खान ने यह मांग की कि घटना के तत्काल बाद से जारी क्षेत्र के युवाओं का पुलिस उत्पीड़न रोका जाये तथा फर्जी मुकदमों में न फसाया जाये.
स्थानीय जनता ने प्रतिनिधि मंडल को यह बताया कि नकीब के साथ साथ पुलिस गोलीकाण्ड में गोली खाये अन्य लोगों को बैढन स्थित जिला चिकित्सालय में भर्ती कराने पहुंचे लोगों पर चिकित्सालय के अंदर घुसकर पुलिस ने लाठीयां भांजी. जनता के सामने आई.जी के समक्ष अपने कबुलनामें में कलक्टर सिंगरौली ने यह स्वीकार किया कि चिकित्सालय के भितर घुसकर लाठीचार्ज का आदेश पुलीस को उन्होंने स्वयं दिया था. हालांकि गोली चलाने के आदेश के मामले में वे मुकर गये. मृतक नकीब के परिजनों का यह दावा है कि गोली लगने के बाद समय पर इलाज उपलब्ध करानें में पुलिस ने गतिरोध न पैदा किया होता तो आज नकीब जिंदा होता.
प्रतिनिधि मंडल में शामिल मंच के संयोजक श्री लक्ष्मीचन्द दुबे ने कलक्टर एम. सेलवेन्द्रन पर पुलिस को बचाने की दृष्टि से एकतरफा कार्यवाही करने का आरोप लगाया व कहा कि जिस मामले में पुरा जिला प्रशासन स्वयं जिम्मेदार है उस मामले में जिला प्रशासन से न्याय की अपेक्षा नही की जा सकती. मृतकों के परिजनों द्वारा सी.बी.आई जांच की मांग को जायज करार देते हुए दुबे ने कहा कि पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा तत्काल पंजिबद्ध किया जाय तथा मौके पर मौजूद तमाम अधिकारीयों और कर्मचारीयों को तत्काल निलंबित किया जाय. मंच ने यह न्यायिक अभिरक्षा में एक और युवक संजय साहु की नृशंस पिटाई की भी आलोचना की और कहा कि पुलिस द्वारा संजय की हत्या की भी पुरी आशंका है. फिलहाल संजय को बेरहमीं से पीटने के बाद पुलिस अभिरक्षा में बनारस के एक अस्पताल में रेफर कराया है जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है. ज्ञात हो की संजय साहु को 6 दिसंबर को अखिलेश को छोड़ने के एवज में थाने बुलाया गया था जबकी बाद में अखिलेश को पुलिस अभिरक्षा में ही मार दिया गया.
मंच ने इस मामले में प्रदेश एवं राष्टीय स्तर के शीर्ष मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से हस्तक्षेप का अनुरोध किया है जिसके जवाब में सिंगरौली की जनता के पक्ष में पूरी लड़ाई लड़ने का आश्वासन दिया है. दिल्ली से जारी अपने बयान में राष्टीय उपाध्यक्ष, पी.यु.सी.एल चितरंजन सिंह ने कहा कि दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल बर्खास्त किया जाय व उन पर आपराधिक मुकदमें कायम किया जाय. रालेगढ़ सिद्धि स्थित अन्ना हजारे के अनशन स्थल से जारी बयान में पुर्व विधायक व किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष डा. सुनीलम ने राज्य सरकार से इस घटना की जिम्मेदारी लेने की मांग की और कहा कि सिगरौली की जनता की शहादत बेकार नही जाने दी जायेगी. लोकविद्या जन आन्दोलन की राष्टीय समन्वयक चित्रा सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि पुलिस गोलीकांड की यह घटना निंदनीय है और राज्य सरकार द्वारा निष्पक्ष कार्यवाही की जानी चाहिए. छिन्दवाड़ा से जारी अपने बयान में समाजवादी जनपरिषद के नेता सुनील भाई ने पुलिसिया अत्याचार की तीव्र निन्दा करते हुए कहा कि लगातार अनियंत्रित होती पुलिस के खिलाफ न्यायालय को कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए. अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला संगठन की राष्टीय उपाध्यक्ष व भाकपा (माले) नेता ताहिरा हसन व इलाहाबाद हाईकोर्ट की अधिवक्ता व मानवाधिकार कार्यकर्ता नम्रता तिवारी ने जारी अपने संयुक्त बयान में कहा कि पुलिस के मार्फत सिंगरौली की जनता के अनवरत होते शोषण के खिलाफ देश भर से आवाज उठाने की जरूरत है तभी दशकों से अपने अधिकारों से वंचित जनता को न्याय मिल सकेगा.
7 सदस्यीय प्रतिनिधि मण्डल में लक्ष्मीचन्द दुबे के अलावा अम्बिका नामदेव, मंजु सिहं, एकता, रवि शेखर तथा वेद प्रकाश शामिल हुए।
किसान, आदिवासी, विस्थापित एकता मंच जल्द ही सभी से चर्चा कर के आगे की रणनीति घोषित करेगा.
                                                                                    
                                                                                 मंजु सिहं(प्रवक्ता)
                                                                       एकता किसान, आदिवासी, विस्थापित एकता मंच
                                                                                  08225935599
 
                                                                                    ,
         
                   

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