सोनभद्र का सूचना विभाग बना लायज़निंग का अड्डा, दस साल से सूचना अधिकारी की तैनाती नहीं

सोनभद्र। एक दशक से जिला सूचना अधिकारी की नियुक्ति की बाट जोह रहा जिला सूचना विभाग, सोनभद्र इन दिनों जिले में तैनात अधिकारियों की कारगुजारियों को छिपाने में मशगूल है। इनमें मजदूरों की हत्या तक के मामले शामिल हैं। ऐसे ही एक मामले का खुलासा दैनिक जागरण ने बुधवार को किया।

 
अखबार के मुताबिक, रॉबर्ट्सगंज मंडी समिति में तैनात मंडी इंस्पेक्टर राम प्यारे के भवन का निर्माण छपका में रॉबर्ट्सगंज ब्लॉक कार्यालय और विद्युत ट्रांसमिशन उपकेंद्र के बीच स्थित जमीन पर हो रहा था। इसी दौरान सरिया ले जाते समय तीन मजदूर हाइटेंशन तार की चपेट में आ गए। इसमें एक मजदूर की मौत हो गई जबकि दो गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को उपचार के लिए वाराणसी भेज दिया गया जबकि मृतक मजदूर के शव को गायब कर दिया गया। इस खबर को दबाने के लिए राम प्यारे ने जिला सूचना विभाग में कार्यरत एक कर्मचारी की मदद ली। उस कर्मचारी ने इसके लिए कोशिश भी की। हालांकि उसकी कोशिश कामयाब नहीं हो पाई।  

अखबार ने अपने वाराणसी संस्करण के सोनभद्र जागरण पेज (पेज-3) पर "मजदूर की मौत, शव को लगाया ठिकाने" शीर्षक से खबर प्रकाशित की है जिसमें संवाददाता ने स्पष्ट लिखा है कि मजदूर की मौत के लिए जिम्मेदार मंडी इंस्पेक्टर राम प्यारे खबर का प्रकाशन रुकवाने के लिए सूचना विभाग के एक कर्मचारी से पैरवी कराने में भी पीछे नहीं रहे। इससे स्पष्ट है कि जिला सूचना विभाग में तैनात कर्मचारी ने मंडी इंस्पेक्टर राम प्यारे की करतूतों को छिपाने के लिए पत्रकारों पर दबाव बनाने की कोशिश की। हालांकि उसकी कोशिश दैनिक जागरण के संवाददाता की दृढ़ता के आगे बेकार हो गई। संभावना है कि उसने अन्य अखबारों के संवाददाताओं को भी प्रभावित करने की कोशिश की थी जिसमें उसे सफलता मिल गई।

ऐसा हो भी क्यों नहीं। सोनभद्र में जिला सूचना अधिकारी का पद करीब एक दशक से खाली है और वर्तमान में अपर जिलाधिकारी मनीलाल यादव के पास जिला सूचना अधिकारी का प्रभार है। इसके अलावा वे बतौर सचिव, शक्तिनगर विकास प्राधिकरण (साडा), सोनभद्र का भी कार्य कर रहे हैं। साथ ही वह जिले में हो रहे खनन के कार्यों के प्रभारी भी हैं। इसके अलावा उन्हें जिला प्रशासन के विभिन्न कार्यों का संपादन भी करना होता है। इन हालातों में वह जिला सूचना विभाग में व्याप्त अनियमितताओं पर ध्यान नहीं दे पाते। इसका फायदा उठाकर विभाग में कार्यरत एक कर्मचारी जिले में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ लाइजनिंग के कार्यों को अंजाम देता है।

वैसे इस विभाग में ऐसा हो भी क्यों नहीं जब पूरे विभाग का दारोमदार एक उर्दू अनुवादक-सह-लिपिक के कंधों पर टिका हो। ईमानदारी से पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों के साथ अभद्रता करना जिला सूचना विभाग में तैनात कर्मचारियों का शगल बन गया है क्योंकि पत्रकारों को हारकर अपने कार्यों के लिए उन्हीं से बात करनी पड़ती है। प्रभारी जिला सूचना अधिकारी कभी भी कार्यालय में बैठे नहीं मिलते। इसका फायदा उठाकर वहां तैनात कर्मचारी पत्रकारों से बार-बार बदततमिजी करते नजर आते हैं। कुछ दिनों पहले पूर्व जिलाधिकारी नरेंद्र सिंह पटेल पत्रकार वार्ता कर रहे थे। एक पत्रकार ने जब उनसे सवाल पूछने की कोशिश की तो उर्दू अनुवादक-सह-लिपिक ने उस पत्रकार को रोकने की कोशिश की। पत्रकार द्वारा इसका विरोध किए जाने के बाद भी वह नहीं माना। जब एडीएम ने उसे डांटा तो वह शांत हुआ।

सूत्रों की मानें तो विभाग में कार्यरत एक कर्मचारी ने कुछ ऐसे पत्रकारों को मान्यता प्राप्त पत्रकार का दर्जा दिला दिया है जो मानकों को पूरा नहीं करते। अगर उनके दस्तावेजों की जांच करा दी जाए तो उसमें अधिकतर के दस्तावेज फर्जी मिलेंगे।

खबरः मजदूर की मौत, शव को लगाया ठिकाने

सोनभद्र : घटना दो दिन पुरानी है लेकिन चौकाने वाली है। राबर्ट्सगंज मंडी समिति में तैनात मंडी इंस्पेक्टर के भवन निर्माण के दौरान हाईटेंशन तार की चपेट में आने से दम तोड़ने वाले मजदूर के शव को ठिकाने लगा दिया गया। हादसे में घायल दो अन्य मजदूरों का उपचार वाराणसी में चल रहा है। मामले का खुलासा सोमवार की देर शाम हुआ तो लोग चौंक गए।

छपका स्थित राबर्ट्सगंज सदर ब्लॉक कार्यालय व ट्रांसमिशन उपकेंद्र के बीच मंडी इंस्पेक्टर का मकान बन रहा है। जिस स्थान पर भवन का निर्माण हो रहा, ठीक उसी के ऊपर से हाईटेंशन तार गुजरा है। घटना रविवार को तीसरे पहर तीन बजे की है। दुद्धी के किसी गांव से काम करने आए श्रमिकों में तीन मजदूर सरिया ऊपर पहुंचा रहे थे। सरिया चढ़ाते समय हाईटेंशन तार की चपेट में आ गए। सूत्रों ने बताया कि गंभीर रूप से झुलसे एक मजदूर की घटनास्थल पर ही मौत हो गई जबकि दो अन्य झुलस गए। हैरत की बात तो यह कि मंडी इंस्पेक्टर ने इस मामले पर पर्दा डाल दिया। पड़ोसियों के मौके पर पहुंचने से पहले ही शव को घटनास्थल से हटा दिया गया। इतना ही नहीं, घायलों का जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार कराने की बजाय उन्हें वाराणसी पहुंचा दिया गया ताकि किसी को इसकी भनक भी न हो।

नाम न छापने के अनुरोध के साथ एक पड़ोसी ने बताया कि घटना के बाद वह मौके पर पहुंचे थे लेकिन मंडी इंस्पेक्टर यह कहकर उस मजदूर को वाहन में रखकर ले गए कि अचेत हो गया है। हैरत की बात तो यह कि घटना के बाद दुद्धी क्षेत्र के इन मजदूरों को काम से ही हटा दिया गया ताकि पोल न खुल सके। कोन इलाके के मजदूरों से अब काम कराया जा रहा है। मंडी इंस्पेक्टर रामप्यारे यह कहकर मामले को टालते रहे कि वह जिले से बाहर हैं और आने पर ही कुछ बता सकते हैं। खबर प्रकाशित न हो, इसके लिए सूचना विभाग के एक कर्मचारी से पैरवी कराने में भी पीछे नहीं रहे।

बिना नक्शा बन रहा भवन

हादसे के बाद परत दर परत विभागों की पोल भी खुलने लगी है। छपका में बन रहे मंडी इंस्पेक्टर के भवन का मास्टर प्लान से नक्शा पास नहीं कराया गया है। इस बात की पुष्टि मास्टर प्लान के अवर अभियंता एबी सिंह ने भी की। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले वह निर्माणाधीन भवन पर गए थे। काम करने वाले मजदूरों से भवन मालिक का नाम पूछा लेकिन किसी ने नहीं बताया। जेई से जब यह पूछा गया कि एक तल्ला मकान बनकर तैयार हो गया है तो वह बस इतना ही कह सके कि दो अप्रैल को काम बंद कराने के साथ ही निर्माणाधीन भवन मालिक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।

उपजिलाधिकारी सदर राजेंद्र तिवारी को जब घटना की जानकारी हुई तो वह हैरत में पड़ गए। उन्होंने बताया कि मामले की जांच कराई जाएगी। मंडी इंस्पेक्टर आरोपी मिले तो कार्रवाई होगी। इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि बिना नक्शा बन रहे भवन का निर्माण कार्य रोक दिया जाएगा और भूमि मालिक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।

 

सोनभद्र से शिवदास प्रजापति की रिपोर्ट। संपर्कः thepublicleader@gmail.com

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