एनडीटीवी के कैमरामैन एन रवि का शव नाले में मिला

धर्मशाला : एनडीटीवी के कैमरामैन का शव शुक्रवार को त्रियुंड के पास नाले में मिला है। मृतक की पहचान दिल्ली निवासी तथा एनडीटीवी के गायब कैमरामैन एन. रवि के रूप में हुई है। पुलिस ने पहचान आई कार्ड व पर्स से की है। शव मिलने की सूचना एन रवि के परिजनों को दे दी है। एन रवि की मौत हो जाने की सूचना मिलने पर एनडीटीवी में शोक व्‍याप्‍त हो गया। हालांकि अभी कैमरामैन का शव नाले से निकाला नहीं जा सका है। 

गौरतलब है कि एन रवि 24 नवंबर, 2012 से धर्मशाला से लापता थे। पुलिस कई बार त्रियुंड व आसपास के इलाके में उनकी तलाश कर चुकी थी। विशेष पुलिस कमांडो दल भी कैमरामैन की तलाश के लिए भेजा गया था, लेकिन बर्फ होने के कारण कामयाबी नहीं मिली थी। कैमरामैन का शव शुक्रवार देर शाम त्रियुंड के पास नाले में मिला है। पुलिस अधीक्षक बलवीर सिंह ठाकुर ने क्राइम बैठक में सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए थे कि लापता व्यक्तियों को तलाशा जाए। इसके लिए जो भी प्रयास करने हों वो किया जाए।

एसपी के आदेश के बाद मैक्लोडगंज के थाना प्रभारी गुरबचन सिंह ने लापता कैमरामैन की तलाश के लिए टीम भेजी। टीम काफी देर तक पूरे इलाके में एन रवि की खोज करती रही। उसे देर सायं एन रवि का शव नाले में मिला। पुलिस जवानों ने शव को निकालने का प्रयास किया, लेकिन देर रात तक निकाला नहीं जा सका था। पुलिस अब शनिवार को ही शव निकालेगी। मैक्लोडगंज थाना के प्रभारी गुरबचन सिंह ने बताया कि पुलिस को त्रियुंड के पास नाले में शव मिला है, लेकिन दिक्‍कतों के चलते उसे नाले से निकाला नहीं जा सका। शनिवार को शव नाले से निकाला जाएगा।

एनडीटीवी इंडिया का एक एडिटर कई आरोपों के घेरे में!

प्रिय यशवंत जी, मुझे आपकी वेबसाइट के बारे में अपने एक पत्रकार मित्र के ज़रिए जानकारी मिली। दो-तीन दिन आपके पोर्टल को पढ़ने के बाद ऐसा लगा कि मैं आपके साथ एक खबर को शेयर कर सकता हूँ। खबर को पढ़ने के बाद ये आप पर निर्भर करता है कि आप उस खबर को अपनी वेबसाइट पर जगह देंगे या नहीं। खबर NDTV INDIA न्यूज़ चैनल के एक एडिटर के बारे में है।

NDTV INDIA के इस एडिटर का नाम xyz है और वो फिलहाल xyz ब्यूरो में तैनात हैं। इन महोदय ने तीन सालों में नाजायज तरीकों जैसे वसूली, हवाला से अथाह पैसे कमाएं हैं। मैंने उनकी कारगुजारियों का पूरा ब्योरा चैनल के कर्ता-धर्ता जैसे प्रन्नॉय रॉय, राधिका रॉय, विक्रम चंद्रा और नारायण राव तक ई-मेल के ज़रिये पहुचायी। सभी आरोपों के लिए circumstantial evidence भी मुहैया कराया। मैंने पहला मेल नवम्बर के पहले हफ्ते में किया, दूसरा दिसंबर के पहले हफ्ते में भेज और तीसरा मेल जनवरी के तीसरे हफ्ते में भेजा।

मुझे उनके HR Head का एक जवाब भी दिसम्बर महीने के तीसरे हफ्ते में आया। इस मेल में मुझसे evidence माँगा गया। HR HEAD के इस मेल को मैं हाल ही में पढ़ पाया जिसके बाद मैं evidence जुटाने में लग गया हूँ। मैं अबतक समझ रहा था कि मैंने उन्हें जानकारी देकर अपना काम कर लिया। लेकिन अब उनके हिस्से का काम भी मुझे ही करना है। NDTV के HR Head के मेल पढ़ कर लगा कि वो फिलहाल internal investigation करने के मूड में नहीं है।

मैंने उन्हें ये मेल्स जी-जिंदल मामला सामने आने से पहले लिखा था। न्यूज़ चैनलों को हमेश self-regulation की बात करते सुना है लेकिन पहल करते कभी नहीं देखा है। अगर NDTV चाहे तो मेरे किसी भी point को उठाकर जांच कर सकती है। सच खुद ही सामने आ जायेगा। लेकिन शायद कंपनी evidence के बिना कोई कदम नहीं उठाएगी। खैर, मुझे xyz जी के खिलाफ सबूत जमा करने में ज्यादा टाइम नहीं लगेगा।

एक शख्स के पास xyz जी का एक वीडियो भी है जिसमें वो मोल-भाव करते हुए साफ़ देखे और सुने जा सकते हैं। लेकिन उस शख्स को मैं फिलहाल locate नहीं कर पा रहा हूँ। लेकिन इतना साफ़ है कि जब भी मुझे वो वीडियो मिलेगा मैं उसको आपसे और Broadcast Editors' Association (BEA) से शेयर करूँगा, NDTV को नहीं दूंगा।

मैं आपको इस मेल के साथ दो attachment भेज रहा हूँ जिसमें NDTV के साथ मेरा communication है। मैंने मेल में चैनल के मालिकों को बताया है कि कैसे बिना लोन लिए xyz जी xyz जैसे महंगे शहर में कई मकानों के मालिक है। नेताओं, बिल्डर, और बिजनेसमैन से उनका कैसा nexus है। NDTV में कैसे वो पैसे लेकर खबर रोकते, चलते हैं। कहा ये भी जाता है कि जो भी उनके scheme of things के लिए खतरा बनता दिखता है उसे वो NDTV की मंदी की छंटनी के दौरान बाहर का रास्ता दिखवा देते हैं।

यशवंत जी, आशा करता हूँ कि आप मेरे इस मेल को गंभीरता के साथ पढ़ेंगे और अपने पोर्टल में जगह देंगे। मैं फिलहाल अपनी पूरी पहचान नहीं मुहैय्या कर रहा हूँ लेकिन जल्द ही evidence के साथ मैं Delhi में आपसे मुलाक़ात करूंगा।

आपका प्रशंसक

KR


मेल के साथ कोई प्रमाण न होने के कारण, सिर्फ आरोप होने के कारण, जिन सज्जन पर आरोप लगा है, उनका नाम और उनके शहर का नाम हटा दिया गया है ताकि उनकी पहचान उजागर न हो और बेवजह उनकी मानहानि न हो. उम्मीद करते हैं कि मेल भेजने वाले सज्जन प्रमाण भी मुहैया कराएंगे ताकि आरोपों की सच्चाई सामने आ सके, अन्यथा उपरोक्त सारी बातें बकवास मानी जाएंगी. -यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया

विक्रम चंद्रा बने एनडीटीवी के एक्‍जीक्‍यूटिव डाइरेक्‍टर

: हिंदुस्‍तान, वाराणसी से असद कमाल लारी का इस्‍तीफा : एनडीटीवी से खबर है कि बोर्ड आफ डायरेक्‍टर्स ने विक्रम चंद्रा को एक्‍जीक्‍यूटिव डाइरेक्‍टर नियुक्‍त किया है. यह नियुक्ति एक नवम्‍बर से लागू की गई है. श्री चंद्रा अगले पांच साल तक इस पद पर बने रहेंगे. बीते अगस्‍त महीने में ही एनडीटीवी प्रबंधन ने विक्रम चंद्रा को प्रमोट करके ग्रुप सीईओ बनाया था. वे एनडीटीवी से सन 1994 से जुड़े हुए हैं. विक्रम चंद्रा की पहचान बिग फाइट कार्यक्रम से बनी. इसके अलावा भी वे एनडीटीवी के लिए कई कार्यक्रमों की एंकरिंग करते रहे हैं.

हिंदुस्‍तान, वाराणसी से खबर है कि सिटी इंचार्ज असद कमाल लारी ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे अपनी नई पारी कहां से शुरू करेंगे इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है. लारी हिंदुस्‍तान के लांचिंग के पहले से जुड़े हुए थे. उनका हिंदुस्‍तान से डेढ़ दशक का साथ रहा है. बताया जा रहा है कि उन्‍होंने स्‍वास्‍थ्‍य कारणों का हवाला देते हुए अपना इस्‍तीफा दिया है परन्‍तु इसकी असली वजह स्‍थानीय संपादक अनिल भास्‍कर से उनकी पटरी ना बैठ पाने को बताया जा रहा है. इस संदर्भ में लारी से बात करने की कोशिश की गई तो उन्‍होंने फोन रिसीव नहीं किया. जबकि स्‍थानीय संपादक अनिल भास्‍कर का कहना है कि असद कमाल लारी स्‍वास्‍थ्‍य कारणों से छुट्टी पर हैं.

फिर शुरू होगी ‘रवीश की रिपोर्ट’

यह खबर सुनने को मिली तो एक सुखद आश्‍चर्य हुआ. प्राइम टाइम में स्‍नो पाउडर लगाकर स्‍टूडियो में बहस करते, झगड़े सुलझाते रवीश कुमार एक बार फिर सड़कों-गलियों, खेतों-खलिहानों, बाजार-हाट, कस्‍बों-झोपड़पट्टी की धूल भरी सड़कों पर अपने चिरपरिचित अंदाज में नजर आएंगे. लोगों से खुद को इंटरेक्‍ट करते दिखेंगे. अपनी अलहदा शैली में लोगों से बतियाते, उनकी परेशानियों-तकलीफों को अपने देशी अंदाज में अपने शब्‍दों की चाशनी में लपेटते-भिगोते-डूबोते नजर आएंगे. एक बार फिर स्‍टूडियो से बाहर सुनने को मिलेगा, नमस्‍कार मैं रवीश कुमार..! क्‍योंकि अब एनडीटीवी पर एक बार फिर शुरू होने जा रहा है 'रवीश की रिपोर्ट'.

एक बड़ा वर्ग जो न्‍यूज चैनलों पर अपनी खबरें भूसे के ढेर में पड़ी सुई की तरह खोज रहा है, उसके लिए यह बड़ी खबर हो सकती है. यह बड़ा वर्ग, जिसकी मार्केटिंग और ग्‍लोबल दुनिया में सुनने वाला कोई नहीं है, रवीश की रिपोर्ट को अपनी आवाज समझता था. यह रिपोर्ट उसकी अपनी बन गई थी, आम लोगों के बीच धूल फांकते, उनकी झोपड़ी में बैठते रवीश आम भारतीय की आवाज लगते थे, पर एनडीटीवी ने इस कार्यक्रम को ख‍तम करके रवीश को स्‍टूडियो का एयरकंडिशनजीवी शोपीस बना डाला था.

अब जब एक बार फिर रवीश की रिपोर्ट शुरू होने की चर्चा है तो मेरे जैसे तमाम लोग खुश होंगे, जो इस रिपोर्ट का इंतजार करते थे तथा बंद हो जाने के बाद दुखी हो गए थे. बुलेट न्‍यूज और भागती-दौड़ती-हांफती-कांपती-दुहाराती सूचनाओं के बीच एक बार फिर खबरों की उम्‍मीद जग रही है. एक बार फिर उम्‍मीद कर सकते हैं कि रवीश स्‍टूडियो में लगी जंग को झाड़कर अपने उसी तेवर के साथ 'रवीश की रिपोर्ट' प्रस्‍तुत करते दिखेंगे. खबरिया चैनलों की विजुअल नौटंकी के बीच लोग आधा घंटा के लिए ही सही पर राहत तो ले ही सकते हैं. अभी यह जानकारी नहीं मिल पाई है कि इसका प्रसारण पुराने समय और दिन पर होगा या कोई नया टाइम तय किया जाएगा.

विश्‍व भर के पांच बेहतरीन टीवी पत्रकारों में चुनी गईं बरखा दत्‍त

एनडीटीवी की ग्रुप एडिटर बरखा दत्‍त के नीरा राडिया से संबंध को लेकर भले ही मीडिया का एक वर्ग और जनता के लोग कुछ भी कहते रहे, इससे बरखा दत्‍त की सेहत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है. उल्‍टे वह पहले से भी ज्‍यादा पापुलर हो गई हैं. कुछ इस तर्ज पर कि बदनाम हुए तो क्‍या नाम ना हुआ. जी हां, पहले नीरा राडिया के लिए लाबिंग करने के विवादों को दरकिनार करते हुए प्रणब राय ने उन्‍हें एनडीटीवी का ग्रुप एडिटर बनाया. अब उन्‍हें विश्‍वभर के पांच बेहतरीन टीवी पत्रकारों में चुना गया है.

39 साल की बरखा दत्‍त को लंदन बेस्‍ड एसोसिएशन ऑफ इंटरनेशनल ब्रॉडकास्टिंग यानी एआईबी ने विश्‍वभर के पांच चुनिंदा टीवी पत्रकारों पर्सनालिटी ऑफ द इयर चुना हैं. 1993 में स्‍थापित एआईबी पिछले सात सालों से पर्सनालिटी ऑफ द इयर का वार्षिक अवार्ड प्रदान कर रही है. लंदन में 9 नवम्‍बर को आयोजित एक कार्यक्रम में इन पांचों में से फाइनल विजेता के नाम की घोषणा की जाएगी. बरखा के अलावा जिन अन्‍य चार लोगों का चयन फाइनल के लिए किया गया है, उनमें ब्रिटिश स्‍काई ब्रॉडकास्टिंग के सर डेविड एटेनब्राग, बीबीसी वर्ल्‍ड न्‍यूज की मिस मिशल हुसैन, कतर चैनल के टिम सेबेस्टियन एवं ब्रिटिश स्‍काई ब्रॉडकास्टिंग के रॉस केम्‍प शामिल हैं.  

बरखा का चयन उनकी मिस्र और लीबिया के साथ ओसामा बिन लादेन के मौत के आपरेशन की खबरों के बेहतर प्रस्‍तुतिकरण के लिए किया गया है. बरखा दत्‍त के अलावा उनके टीवी चैनल का भी चयन कई कटेगरी के पुरस्‍कारों के लिए किया गया है. एनडीटीवी के अलावा स्‍टार न्‍यूज एवं आईएनएक्‍स न्‍यूज का चयन भी दो कटेगरी में किया गया है. नीचे श्रीलंका गार्जियन में प्रकाशित बरखा की गुणगान करती खबर.

The 39-year-old Barkha Dutt, the versatile TV journalist of India who is the Group Editor of NDTV, a national 24-hour news channel, has been short-listed along with four other TV greats, for consideration for selection as the International TV Personality of the Year 2011 by a panel of independent judges.

The prestigious and highly coveted Award as the International TV Personality of the Year is given every year, along with awards in 15 other professional categories, by the London-based Association of International Broadcasting (AIB), which is the industry association for TV and radio globally. It was established in 1993.Its annual awards for media (TV and radio) excellence were instituted seven years ago. The awards for 2011 will be announced at a function in London on November 9.

The nominations for the awards in the 16 categories are submitted by different TV and radio companies all over the world. These are scrutinised by different panels of judges and short lists prepared for different categories for a final scrutiny by independent judges, who will decide the winners.

The most coveted of the awards in the 16 categories is that of the International TV Personality of the Year. The nominees for the short list are chosen on the basis of their contribution to TV Excellence during the year. The fact that out of dozens of nominations received, Barkha has been included in the short list of five is a recognition of her contribution to TV Excellence during the year.

Barkha is a versatile TV professional, who has made a name for her excellence in field reporting, interviews and talk shows. During the year 2011, she distinguished herself by her outstanding and courageous reporting, inter alia, from Egypt and Libya and by her coverage of the sequel to the killing of Osama bin Laden by the US Navy Seals in Pakistan on May 2. Her weekly talk show titled We The People , which is widely viewed in South Asia, completed 10 years in 2011. She also hosts a four-times-a- week current affairs talk show titled “The Buck Stops Here”.

She also produced some excellent documentaries of which two have been chosen by the preliminary team of judges of the AIB for consideration in other categories. These are “The Women of Tahrir Square” and the “Battle For Libya”.

Her NDTV channel, with which she has been associated since its inception, has had the honour of being a channel from India short-listed in the largest number of categories relating to Egypt, Libya, the Tsunami in Japan and Sports.

Two other Indian channels have also received the honour of being short-listed in two categories—Star News For Creative Marketing and the INX News Pvt Ltd, India – India Endangered—for Current Affairs Documentary (Domestic).

The other four nominess, along with Barkha, in the short list of International TV Personality of the Year are Sir David Attenborough of the British Sky Broadcasting, Ms. Mishal Hussain of BBC World News, Tim Sebastian, formerly of BBC World News who now works for a Qatar channel, and Ross Kemp of the British Sky Broadcasting.

Barkha has a large circle of admirers and well-wishers in the Indian sub-continent and abroad. They will be watching with bated breath as the final winners are announced at London on November 9.

Whatever be the final result, the fact that Barkha has made her way into the short list of five TV Greats of 2011 is a great honour to her, her channel and India. Courtesy : Sri Lanka Guardian

विकीलीक्‍स को सपोर्ट करने वाले भारतीयों का आभार जताया असांज ने

पूरे विश्‍व में तहलका मचाने वाला विकीलीक्‍स आर्थिक दिक्‍कतों से जूझ रहा है. जूलियन असांज ने विकीलीक्‍स का प्रकाशन अस्‍थाई रूप से बंद करने का ऐलान किया है. वे किसी भारतीय बैंक में अपना खाता खोलने की कोशिशों में जुटे हुए हैं ताकि विकीलीक्‍स को मिलने वाले अनुदान को जमा कर सकें. असांज ने विकीलीक्‍स को सपोर्ट करने वाले लोगों का आभार भी जताया है. असांज से एनडीटीवी ने कई मुद्दों पर विस्‍तार से बात की. वहीं से साभार लेकर असांज का साक्षात्‍कार प्रकाशित किया जा रहा है.

Sonia Singh : Mr Assange, it's been a year since the blockade, which you linked to the publication of diplomatic cables by the WikiLeaks. Why have you been driven to this stage where you have to suspend operations?

Julian Assange : Well, according to a 24 country poll that had 18,000 people, WikiLeaks has the support of almost 75 per cent of the world's population. And, in fact, one of the strongest supporters is the Indian population. But despite that, these US-based financial services companies – Visa, MasterCard, PayPal, Bank of  America and Western Union – have continued, since December last year, to conduct an extra judicial blockade, entirely outside of any administrative or judicial process. In fact, there has been only one formal US government enquiry into the issue and that was by the US Treasury and the US Treasury found, in January this year, that we should not be added to any kind of US government financial blacklist. But this blockade by these corrupt financial institutions continues.

Sonia Singh : And of course, in India you made the point that the huge support you got after this cash-for-votes scandal, that whole cable which talked about a trunk being found in some aide of a Congress politician's house, we have seen the revelations of Mayawati, and the more interesting ones, the ones which NDTV had also sourced with the Pakistani, the Pakistani-US diplomatic cables, trace key points on contradictions. Now you said the whole attempt to target WikiLeaks. You yourself are, of course, currently under virtual house arrest, under a court decision in Great Britain on an extradition in Sweden on alleged rape charges. You said those charges are politically motivated. Now you have had to suspend WikiLeaks operations. If WikiLeaks does shut down permanently, will this mean that the establishment that you fought against has won?

Julian Assange : Well, it is a possibility that the establishment will win. Certainly, it has been difficult for us for the last 11 months; we have been removed from 95 per cent. We have been surviving on cash reserves and the last 11 months, because if the situation continues, it can continue, if it does continue their need is inevitable. Sometime during next year, Wikileaks would completely run out of money and that would be the end of the organisation. So, we have decided to take this moment to fight back, to put everything we have got and to call on the world population to help us fight back, to try and attack this blockade, work out ways to get out of this blockade and politically demand that the blockade be removed. To investigate into these organisations, the European Commission has already launched investigation of MasterCard and Visa and to push past it, if Wikileaks is not successful, in defeating the blockade, then yes, the forces of darkness, sorry to speak, will have won the elimination of Wikileaks. They would not have won the battle. The big battle was to get this information out. For the past four months, we have been almost completely victorious in that big battle, but to do that battle cost the institution itself. That is a possibility, unless we all successfully, put everything we have got, into knocking down this blockade. Now we have put up some new mechanisms – You can send SMS donations, in some countries international bank transfers through some banks. Not through the Bank of America, and now we are in a process of setting up a local Indian bank account, so our strong Indian support can be represented. We are doing the same in similar countries. We are also looking for ideas from other people about how do you get around this problem. Personally, what we would like to see is that Visa and MasterCard and the Bank of America are simply banned for engaging in this sort of activity. They should be banned from India. The Icelandic Parliament is looking into banning them and European Commission, as I said before, is looking into whether they could start the prosecution against them.

Sonia Singh : Well, of course, that being an important decision soon. You made the point that the local bank account coming up in India – in so many ways WikiLeaks has touched revolutionary movements around the world – the Arab Spring, the Anna Hazare anti-corruption movement in India, Occupy Wall Street that started in America and spread around the world, and many have linked it to WikiLeaks and the way it challenged the traditional government structures. Does that hearten you? Do you think it will live on much beyond the WikiLeaks sight and institution?

Julian Assange : Well, this movement which we have been a part of, in the Arab spring, of the movement in India, for the anti-corruption movements in Madrid, which spread into Wall Street – some of our people are directly involved in the Wall Street movement as well. Yes, they may eliminate WikiLeaks, although, of course, we hope not. It is too late to stop some of the changes WikiLeaks has brought about, but cannot undo the movements. We would like to say that the courage is contagious. And we can say, that in occupying Wall Street and the movement in Arab spring, courage is contagious. On the other hand, the defeat of courageous people and courageous institutions is also contagious. So we have to be careful to make sure that this encouraging example is not set through the attempted elimination of WikiLeaks. It's important for us, it's important for other institutions in the movement, to make sure that the other banks do not win. I do not think that they will win. I actually think that this press conference and the support they were trying to stage today will continue on in the weeks and people will rally together and we will attack these institutions and it is a successful attempt to occupy Wall Street. And the other US corrupt financial institutions need to be held to account. I think we can all pull together and we can knock them down.

Sonia Singh : Right, of course, in internet we have already seen support pouring in for you and WikiLeaks after that press conference. But the larger issue, if you are fighting for open government, you are fighting to strengthen democracy, but why don't you let the democratic process do its job? You are under criticism for releasing this unredacted cables… a short while ago people asking whether that endangers security…why don't you let the democratic government function? The elected governments are voted in, if you don't like them, vote them out. Does WikiLeaks impede democracy? Is it anarchist?

Julian Assange :  Well, this seems to be not true. You know, as the publishing organisation, all the fruits of our labour are public. Everything that we do goes to the public. And the public chooses to support us with their wallets and thousands and thousands of people have done so. The average donation to WikiLeaks is 25 dollars. It is simply that we have very broad public support. So that interaction between us and the public occurs weekly. Weekly the public demonstrates their support for what we do. Not every four years, not as a result of huge corrupt campaigns but weekly, as a result of our publishing activities. So to that degree WikiLeaks is an expression of the democratic process and we can't say that everything, you know, the traditionally-elected governments do is an expression of the people's will. Is it an expression of the people's will that these parliamentarians have their huge fat pensions? That is not the expression of the people. No one actually votes for that, rather it is an expression of the power that these people have and the corruption of their position of power to take money and use it for their own interest. Courtesy : NDTV

लो, एनडीटीवी भी करने लगा पेड न्यूज!

: 40 करोड़ रुपये लेकर साक्षी टीवी के जरिए भ्रष्टाचारी रेड्डी को बचाने में जुटा एनडीटीवी प्रबंधन? : भड़ास4मीडिया के एक पाठक ने बड़ा महत्वपूर्ण सवाल उठाया है. उन्होंने जो पत्र भेजा है, वह पेड न्यूज के बारे में बड़े फलक पर सोचने को मजबूर करता है. चुनाव आयोग कहता है कि पेड न्यूज सही नहीं है. न्यूज चैनलों को चुनाव से महीनों पहले पेड न्यूज और राजनीतिक विज्ञापन दिखाने पर रोक है. लेकिन अगर कोई बड़ा नेता पेड न्यूज वाला पैसा व विज्ञापन का पैसा किसी दूसरे को देने की जगह खुद का ही चैनल खोल ले और जमकर अपनी मार्केटिंग करने लगे तो भला कोई क्या कर लेगा.

और ऐसा हो भी रहा है. दक्षिण भारत में जो साक्षी टीवी है, उसके बारे में सब जानते हैं कि यह वाईएस जगन मोहन रेड्डी का है. इनके पिता सीएम थे जिनकी जहाज हादसे में मौत हो गई. वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने साक्षी टीवी को चला पाने में असफलता के कारण इसको एडिटोरियली चलाने का जिम्मा एनडीटीवी को सौंप दिया है. इसके लिए एनडीटीवी को 40 करोड़ रुपये दिए गए हैं. अब एनडीटीवी प्रबंधन साक्षी टीवी के कंटेंट को देख रहा है. सीबीआई ने रेड्डी के पास अस्सी करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति के बारे में खुलासा कर चार्जशीट दायर करने की बात कही है तो आंध्र प्रदेश की लोकल मीडिया ने इस मुद्दे के जरिए रेड्डी को घेरने का काम शुरू कर दिया है. ऐसे में एनडीटीवी के एडिटोरियल नेतृत्व वाली साक्षी टीवी की टीम ने अब लोकल मीडिया के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है. जाहिर है, इसका मकसद भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे अपने मालिक व नेता रेड्डी को बचाना है. तो, क्या यह पेड न्यूज नहीं हुआ? यह तो बहुत बड़े लेवल का पेड न्यूज है और इसे बड़ी सफाई से अंजाम दे रहा है एनडीटीवी. वही एनडीटीवी जो अपनी सादगी और ईमानदारी के गुन गाते नहीं थकता. उस एनडीटीवी ने 40 करोड़ रुपये लेकर अपना ईमान बेच दिया है. भड़ास4मीडिया के पास जो पत्र आया है, वह इस प्रकार है–

killing Journalism

Marriage of SakshiTV and NDTV killing Journalism There is a lot of hue and cry on paid news. Press council banned paid news and stopped political advertising 6 months prior to the election. But what if a politician himself launches a newspaper or News TV station? He will propagate his party and himself 24/7. Is this not paid news? Our respected regulatory bodies do not have answer for this. Should we allow these media organizations function at the election hour propagating the owner-politicians and their respective political parties? No one has answer to this. Y.S. Jagan Mohan Reddy, President of YSR Congress Party has launched a newspaper and News TV channel in the State of Andhra Pradesh. He spent crores of rupees to start SakshiTV to support his activities. After an year of the launch he found out that he failed to run the channel and handed over the editorial responsibility to NDTV. NDTV got Rs. 40 Crores in this deal. Now CBI found out that there is illegal wealth to the tune of Rs. 80,000 crores with Jagan Mohan Reddy. CBI filed charge sheet on Jagan Mohan Reddy and started raiding his properties. Local media started covering this. NDTV lead editorial team of SakshiTv started attacking local media. It named Eenadu, Andhrajyothy and TV9 as corrupt channels and warned them not to telecast news of CBI raids on Jagan. One can understand the fate of the news channel started by a black money politician. But an organization like NDTV which always talks about the ethics in the media supporting this kind of activity is surprising. Values in the media up for sale for mere Rs. 40 Crores?

बरखा एनडीटीवी ग्रुप एडिटर, सोनिया एडिटोरियल डाइरेक्‍टर

नीरा राडिया प्रकरण में हुए छीछालेदर को दरकिनार करते हुए एनडीटीवी मैनेजमेंट ने बरखा दत्‍ता को प्रमोट करके ग्रुप एडिटर बना दिया है. शीर्ष स्‍तर पर हुए दो प्रमोशनों में सोनिया सिंह को एडिटोरियल डाइरेक्‍टर बनाया गया है. एनडीटीवी ने ग्रुप को और जिम्‍मेदार बनाने के लिए एडिटोरियल बोर्ड और एथिक्‍स कमिटी का भी गठन किया है, जिसका अध्‍यक्ष क्रमश: बरखा दत्‍त और सोनिया सिंह को बनाया गया है.

ये दोनों नए ग्रुप संपादकीय और नीतिगत मुद्दों पर नियमित बैठक करेगा. एडिटोरियल बोर्ड चेयरपर्सन राधिका राय के साथ एनडीटीवी के सभी संपादकीय मामलों के प्रति जिम्‍मेदार होगा. एडिटोरियल बोर्ड का गठन इसलिए किया गया है ताकि वो जटिल-पेंचदार मामलों पर शीघ्रता से कदम उठाए तथा संपादकीय मामलों में एनडीटीवी के अंदर तथा बाहर की शिकायतों पर जवाब दे सके. ज‍बकि एथिक्‍स कमेटी संस्‍था के नीतिगत मामलों पर निगरानी रखेगी तथा अपनी रिपोर्ट राधिका रॉय को देगी.