ज्ञान प्रकाश बने नेटवर्क10 के यूपी ब्‍यूरोचीफ

लखनऊ से खबर है कि वरिष्‍ठ जर्नलिस्‍ट ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी उर्फ ज्ञान स्‍वामी ने नेटवर्क10 ज्‍वाइन कर लिया है. उन्‍हें चैनल में यूपी का ब्‍यूरोचीफ बनाया गया है. ज्ञान को पत्रकारिता और फोटोग्राफी दोनों में महारथ हासिल है. दैनिक आज से फोटोग्राफर के रूप में करियर शुरू करने वाले ज्ञान बाद में इसी अखबार में संवाददाता भी बन गए. वे इसके बाद दैनिक जागरण, अमर उजाला, इंडिया न्‍यूज, आजसमाज, लोकमत समेत कई अखबारों और चैनलों में कार्यरत रह चुके हैं. ज्ञान उत्‍तर प्रदेश फोटो जर्नलिस्‍ट एसोसिएशन के अध्‍यक्ष भी हैं. राजनीति और नौकरशाही में भी ज्ञान की अच्‍छी पकड़ है.

नेटवर्क10 से विदा हुए 11 पत्रकारों की लिस्‍ट

ख़ुशी आने पर भी थी और जाने पर भी है। कल अकेले थे आज टीम हो गयी। पत्रकरिता जीवन का एक और पड़ाव पार हो गया। उत्तराखंड से प्रसारित पहले 24×7 चैनल की लॉंचिंग टीम ने आखिरकार एक साल के सफर के बाद चैनल को अलविदा कह दिया। ये शायद पहला मौका होगा कि चैनल को अलविदा कहने वाले कर्मचारियों ने चैनल हेड को बकायदा पुष्प गुच्छ देकर उन्हें इस बात के लिए धन्यवाद दिया कि उन्होंने अपने सानिध्य में हमें काम करने का मौका दिया।

ऐसे अवसर मीडिया में कम ही आते हैं जब विपरीत परिस्थितियों में काम करने के बाद एक सौहार्दपूर्ण माहौल में भविष्य की उम्मीदों के साथ कर्मचारी संस्थान को अलविदा कहते हैं। फिर मिलेंगे किसी नए संस्थान में नई जिम्मेदारियों के साथ। नेटवर्क10 के कर्मचारी, जिन्होंने चैनल को अलविदा कहा-  आशीष तिवारी, दीपक तिवारी, संदीप जगूड़ी, मनोज रावत, दिव्या पाण्डेय, भावना पंचभैया, सोनाली शर्मा, अर्चना मनवाल, सुधीर शर्मा, सुधांशु पुरी, शशांक गौड़।

आशीष तिवारी की कलम से.
 

सैलरी क्राइसिस के चलते नेटवर्क10 से कई का इस्‍तीफा

: अपडेट : देहरादून से संचालित नेटवर्क10 से खबर है कि यहां सैलरी को लेकर हंगामा काफी तेज हो गया है. प्रबंधन से नाराज लगभग एक दर्जन पत्रकारों ने चैनल को अलविदा कह दिया है. अब चैनल दोयम दर्जे के पत्रकारों के सहारे संचालित किया जा रहा है. इस्‍तीफा देने वाले सभी पत्रकारों को पोस्‍ट डेटेड चेक दिए गए हैं. चैनल को सबसे बड़ा झटका प्राइम टाइम एंकर आशीष तिवारी के इस्‍तीफा देने से लगा है. आशीष प्राइम टाइम एंकर होने के साथ आउटपुट हेड की जिम्‍मेदारी भी संभाल रहे थे.

अनियमित सैलरी के चलते कर्मचारियों ने हड़ताल कर दिया था, जिसके बाद एक्‍जीक्‍यूटिव एडिटर ने कहा कि जिन लोगों को सैलरी चाहिए उन्‍हें चैनल छोड़ना पड़ेगा. साथ ही शर्त यह रखी कि इस्‍तीफा देने वाले लोगों की सैलरी पोस्‍ट डेटेड चेक से दी जाएगी. मरता क्‍या न करता की तर्ज पर पत्रकारों एवं गैर पत्रकार कर्मचारियों ने अप्रैल माह का पोस्‍ट डेटेड चेक लेकर चैनल को छोड़ दिया है. कर्मचारियों के हड़ताल की वजह से स्‍पेशल प्रोग्राम भी नहीं जा पा रहे हैं. चैनल पर घिसे-पिटे बुलेटिन चल रहे हैं.

आशीष के अलावा इस्‍तीफा देने वाले जिन लोगों के नाम की जानकारी मिल पाई है, उसमें दीपक तिवारी, अर्चना, दिव्‍या पांडेय, सोनाली एवं वीडियो एडिटर संदीप कुमार शामिल हैं. इनके अलावा भी कई लोगों ने चैनल छोड़ दिया है. प्रबंधन बिना विजन के चैनल का संचालन कर रहा था. दीपक का पोस्‍ट करेस्‍पांडेंट का था, परन्‍तु उनसे काम आउटपुट का लिया जा रहा था. इसी तरह से कई अन्‍य पत्रकारों का भी हाल था. बताया जा रहा है कि जल्‍द ही कई और लोग चैनल से इस्‍तीफा देंगे.

खबर है कि प्रबंधन के पास अच्‍छे एंकरों की कमी है, लिहाजा रिपोर्टरों से एंकरिंग करने की तैयारी की जा रही है. सैलरी न मिलने को लेकर चैनल के अंदर तनाव है. बाहर से आए काम करने वाले पत्रकार यहां से जाने की तैयारी कर रहे हैं. अब वे ही लोग मजबूरीवश चैनल में काम करने को तैयार हैं, जिनका घर देहरादून या आसपास में है. सूत्रों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो चैनल का बंटाधार तय है. बताया जा रहा है कि कुछ लोग खुद की सैलरी जस्टिफाइड करने के लिए नीचे के पत्रकारों पर कहर ढा रहे हैं.

हालांकि इस संदर्भ में नेटवर्क10 में वरिष्‍ठ पद पर कार्यरत राजीव रावत का कहना है कि इन लोगों की विदाई दी गई है. चैनल में किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं है. नए बदलाव के तहत आउटपुट की जिम्‍मेदारी चंद्र बल्‍लभ को दे दी गई है. उन्‍हें चैनल में आउटपुट हेड बनाया गया है. वे कई संस्‍थानों में काम कर चुके हैं. कहीं कोई दिक्‍कत नहीं है. सब कुछ स्‍मूथ चल रहा है.

अशोक पांडेय ने किया नेटवर्क10 का बेड़ा गर्क

कहावत है कि पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं। नेटवर्क 10 की लांचिंग से पहले ही आसार दिखने लगे थे कि आने वाले वक्त में इसकी हालात खस्ता होने वाली है। चैनल प्रबंधन ने मालिकों को शुरुआत में बड़े बड़े सपने दिखाए, उन सपनों के आगोश में आकर ही चैनल मालिकों ने नेटवर्क 10 को खड़ा करने के लिए जमकर पैसे लुटाए। शिमला बाईपास पर एक नई बिल्डिंग में चैनल का आफिस खोला गया। न्यूज़ रूम से लेकर, पीसीआर, आईटी और तमाम आफिस शानदार तरीके बनाए गए। 

 
नेटवर्क 10 के आफिस में जाने के बाद ये अहसास होता था मानो किसी बड़े चैनल के न्यूज रूम में आ गए हों। लेकिन कुछ ही महीने बाद इस चैनल का बंटाधार हो गया। इस चैनल को बर्बाद करने के पीछे प्रबंधन के लोग खुद ही जिम्मेदार है। जिन लोगों के कंधों पर चैनल चलाने की जिम्मेदारी दी गई है उन्हें चापलूसी के अलावा कुछ आता ही कहां है। चैनल प्रबंधन में ऊंचे ओहदे पर बैठे लोगों ने इस चैनल के लिए कभी मन से काम किया ही कहां है। जिस चैनल की कोई पालिसी ही नहीं है भला वो कामयाब कैसे होता। अब आपको इस चैनल के शेड्यूल के बारे में बताते हैं। 
 
इस चैनल में ऊंचे ओहदे पर काम कर रहे ज्यादातर लोग देहरादून से ही ताल्लुक रखते हैं। ये वो लोग हैं जिन्हें नेताओं की चापलूसी के अलावा कुछ नहीं आता है। ड्यूटी से ये अक्सर नदारद रहते हैं और हुक्म अपने जूनियरों पर चलाते हैं। चैनल में ऐसे कई चेहरे हैं जो दूसरे चैनलों के साथ भी काम कर रहे हैं और यहां से भी मोटी सैलेरी उठा रहे थे। नेटवर्क 10 के मालिकों ने जिस हिसाब से पैसा खर्च किया है, अगर उसे सही प्लानिंग के साथ इस्तेमाल किया जाता तो ये चैनल जरूर सक्सेस होता, लेकिन कामचोरों की फौज ने इस चैनल का बेड़ा गरक कर दिया। 
 
न्यूज हेड ऐसे लोगों को बना दिया गया जिन्हें खुद खबरों की परख नहीं हैं। एंकरिंग वो लोग कर रहे हैं जिन्हें ढंग से बोलना तक नहीं आता है। देहरादून में रिपोर्टिंग के लिए ऐसे पत्रकार रखे गए हैं जिन्हें सिर्फ कैमरे के सामने ही चमकने का शौक है। ऐसे हालात में भला कोई क्‍या काम कर पाएगा, इस चैनल में दिल्ली से काफी लोग गए थे, पर सैलेरी के संकट को देखते हुए ज्यादातर लोग दिल्ली वापस लौट आए हैं। इसके अलावा कुछ लोग चंडीगढ़ और कुछ ग्वालियर और आगरा के सी न्यूज का रूख कर रहे हैं।
 
नेटवर्क 10 के कर्मचारियों को अभी भी सैलरी नहीं मिली है, जिस कारण सभी कर्मचारियों ने मालिक के भारत कन्ट्रक्शन के ऑफिस के बाहर धरना दिया। वहीं थोडी देर बाद चैनल के कर्ताधर्ता अशोक पाण्डेय आए और सभी को जल्द ही सैलरी देना का आश्वासन दिया और कहा कि पोस्ट डेटेड चेक ले लो, और चैनल छोड दो। जिसके बाद तमाम लोगों ने चैनल छोड़ने का मन बना लिया है, जो लोग सैलरी नहीं लेंगे उनकी नौकरी बची रहेगी। इस चैनल का बेड़ा गर्क करने के सबसे बड़े जिम्‍मेदार अशोक पांडेय है। वहीं चैनल के मालिक अभी भी स्थिति स्पष्ट करने को राजी नहीं हैं कि आखिर उनके बीच और पाण्डेय जी के बीच डील क्या हुई है।
 
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

सैलरी के लिए नेटवर्क10 चैनल में कर्मचारियों की हड़ताल

देहरादून से संचालित नेटवर्क10 में स्थिति खराब है. सैलरी नहीं मिलने से नाराज कर्मचारी हड़ताल कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि दो महीने से लेकर पांच महीने तक की सैलरी कर्मचारियों को नहीं मिली है. जो लोग प्रबंधन के नजदीकी हैं उन्‍हें तो बीच बीच में कभी सैलरी के नाम पर पैसे दे दिए गए, परन्‍तु जिनकी मैनेजमेंट से नजदीकी नहीं रही वे लोग कई महीनों की सैलरी नहीं पा सके हैं. कर्मचारी फिलहाल सांकेतिक हड़ताल पर हैं, पर उनका कहना है कि जल्‍द से प्रबंधन ने उनकी बातों पर ध्‍यान नहीं दिया तो वे चैनल का प्रसारण ठप कर देंगे.

कर्मचारियों के सांकेतिक हड़ताल के चलते कोई स्‍पेशल प्रोग्राम नहीं जा रहा है. कर्मचारियों का कहना है कि 15 फरवरी को चैनल के एक साल पूरा होने पर मैनेजमेंट तथा राजीव गर्ग ने लाखों रुपये खर्च कर बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया, लेकिन कर्मचारियों को देने के लिए इनके पास पैसे नहीं हैं. बताया जा रहा है कि चैनल से कई लोग तो बिना सैलरी लिए ही चले गए. चैनल का स्विचर भी कई दिनों से खराब पड़ा हुआ है. पैसा नहीं दिए जाने के चलते चार दिन तक चैनल की आवाज एनएसटीपीएल में पैसा नहीं देने के चलते बंद कर दी गई थी.

बताया जा रहा है कि हड़ताल की संभावना देखते हुए प्रबंधन भी सचेत हो गया है. चैनल के एक्‍जीक्‍यूटिव एडिटर अशोक पाण्‍डेय ने मामले को सलटाने के लिए सभी कर्मचारियों को पोस्‍ट डेटेड चेक देने का वादा किया तथा हड़ताल खतम करने को कहा, परन्‍तु कर्मचारी इसे मानने को तैयार नहीं हैं. उनका कहना है कि अगले 24 घंटों के अंदर उनका हिसाब किताब क्‍लीयर नहीं हुआ तो वे प्रसारण ठप करने के अलावा प्रबंधन का पुतला फूंकेंगे तथा इसकी शिकायत सीएम से करेंगे. इस संदर्भ में प्रबंधन का पक्ष लेने के लिए अशोक पाण्‍डेय को फोन किया गया परन्‍तु उन्‍होंने फोन पिक नहीं किया.