ज़ी-जिंदल प्रकरण में उलझा टाइम्स ग्रुप भी, ‘ऑफ द रिकॉर्ड’ गरियाने का मामला

अपने राजफ़ाश करने वाले प्रेस कॉन्फ्रेंस में नवीन जिंदल बेशक पत्रकारों के साथ सवाल-जवाब सेशन से बचकर निकल लिए हों, टाइम्स नाउ पर अर्णब के कार्यक्रम में खूब जम कर बरसे। टाइम्स नाउ और ग्रुप के सभी अखबारों ने इस मसले को जम कर उछाला। ये वही टाइम्स ग्रुप है जिसकी कुछ ही दिनों पहले दुनिया भर में थुक्का-फ़जीहत हो चुकी है, लेकिन इस बार उसके आक्रामक होने का कारण कुछ और ही है।

दरअसल सुधीर चौधरी, समीर आहलूवालिया और जिंदल के अधिकारियों बीच हुई बातचीत में टाइम्स ग्रुप के तीन-चार वेंचरों का नाम आया है। समीर आहलूवालिया ने जहां इकोनॉमिक टाइम्स के फ्रंट पेज के बिके होने का आरोप लगाया था वहीं सुधीर चौधरी ने उनके मीडिया नेट के इरादों पर सवाल उठाया था।
 
दोनों संपादकों ने न सिर्फ दिल्ली टाइम्स और बॉम्बे टाइम्स के पूरे बिके होने की बात कही वहीं ये भी कहा कि टाइम्स ऑफ इंडिया भी 'उन्हीं की तरह' ब्लैकमेलिंग के कारोबार में शामिल है।
 
उधर टाइम्स ग्रुप के सीईओ रवि धारीवाल ने अपनी एडीटोरियल पॉलिसी को पाक-साफ बताया है। उनके मुताबिक ज़ी ग्रुप के संपादकों के बयान 'पूरी तरह बेबुनियाद और झूठे' हैं। उन्होंने ये तो माना कि दिल्ली टाइम्स और बॉम्बे टाइम्स में एडवरटोरियल कंटेंट छपते हैं, लेकिन ये भी कहा कि उनका कोई आधार नहीं है।
 
बहरहाल, ज़ी ग्रुप के खिलाफ़ मोर्चा खोले टाइम्स ग्रुप ने बेशक जिंदल को अपनी बातें खुल कर बोलने का मंच दिया हो, लेकिन वो ये भूल रहा है कि एडिट की हुई सीडी में जिंदल ने ही जानबूझ कर टाइम्स ग्रुप वाले कमेंट डलवाए थे जो कि ऑफ द रिकॉर्ड बातों की खुफिया रिकॉर्डिंग थी।
 
किसने क्या कहा?

 
समीर: एक अखबार आप तो रोज़ पढ़ते ही होगे… इकोनॉमिक टाइम्स, इसलिए आपको पता है। ऐट लीस्ट वी आर डूइंग अ प्रॉपर डील विद यू… ऐट लीस्ट वी आर नॉट डूइंग फ्रंट पेज स्टोरी व्हिच इज पेड (हमलोग आपसे कायदे का सौदा कर रहे हैं… हमलोग फ्रंटपेज की खबर नहीं छाप रहे जो बिकी हुई हो) ईटी में तो फ्रंट पेज़ स्टोरी बिक रही हैं आजकल…
 
सुधीर: मुझे आमिर खान बता रहा था एक बार… ये मीडिया नेट वाले आमिर खान के पास पहुंच गए… जब थ्री इडियट्स रिलीज़ हो रही थी… बोला कि आप ये लो मीडिया नेट… हम जब आपकी पिक्चर रिलीज़ होगी तो पूरा सपोर्ट करेंगे… और इसमें हम आपको फोर स्टार दे देंगे…
 
सुधीर चौधरी (इस सवाल पर कि क्या देश भर का मीडिया पूरी तरह बिका हुआ है?): हां, मैं आपको बताता हूं कि रिलेशनशिप कैसे बनता है… अब मान लीजिए कि ये वोडाफोन का ऐड है (इकोनॉमिक टाइम्स में)… नेक्स्ट टाइम समथिंग इज़ हैप्पेनिंग अगेंस्ट वोडाफोन… वोडाफोन इसको बोलता है कि बॉस, वहां मेरा ये आ रहा है और ऐसा नहीं है कि वोडाफोन ने गलत काम नहीं किया… किया होगा… तभी फंसा वो… तो वोडाफोन बोलेगा, यार इसमें प्लीज़ थोड़ा देख लो… मैं तुम्हारा क्लाइंट ही हूं… मैं तुम्हारा.. यू आर… वर्किंग टुगेदर… तो उसमें क्या होता है… न्यूज़पेपर का जो मैनेज़मेंट है… थोड़ा सॉफ्ट हो जाता है…
 
समीर: दिल्ली टाइम्स, बॉम्बे टाइम्स पूरा पेड है… ए-टू-बी
 
समीर: हम क्या कर रहे हैं…? एवरीबडी डज़ इट.. एवरीबडी इज़ इन द सेम बिजनेस… स्टॉप.. इफ यू स्टॉप बिज़नेस विद टाइम्स ऑफ इंडिया.. दे विल स्टार्ट… (हर कोई ये करता है… हर कोई इसी कारोबार में है… अगर आप टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ कारोबार रोक देंगे… तो वो 'शुरु' कर देंगे…)


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zee jindal

 

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