क्या आजतक वाले अपनी महिला स्टाफ की सुरक्षा को लेकर गंभीर हैं?

 

अंजना कश्यप के साथ छेड़छाड़ की घटना की जितनी निंदा की जाये, कम है, लेकिन आजतक और हेडलाइंस टुडे का ये शोर ढकोसला ही लग रहा है। टीवीटुडे प्रबंधन अपने स्टाफ को भगवान भरोसे छोड़ने पर आमादा है। इन दिनों कॉस्ट कटिंग के नाम पर टीवीटुडे ने मॉर्निंग पिकअप बंद करवा दिया है। मॉर्निंग शिफ्ट सात से बढ़ा कर साढ़े सात बजे से कर दी गयी है, लेकिन सुबह आना अपनी व्यवस्था से ही है।
 
अगर साढ़े सात बजे नोएडा फिल्म सिटी पहुंचना है तो जनकपुरी या पूर्वी दिल्ली के किसी इलाके से आने के लिये छह बजे या उससे भी पहले चलना पड़ता है। सर्दी में पांच-छह बजे कितना अंधेरा रहता है इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है। ऐंकरों को तो ऑटो, बस या मेट्रो में पहचान छुपाने के लिये मुंह पर स्कॉर्फ या रुमाल बांधना पड़ता है। ऐसे में आजतक और हेडलाइंस टुडे पर आम परिवार की बच्चियों को बलात्कारियों से सुरक्षा दिलाने की बहस कितनी जायज़ है ये कोई भी समझ सकता है।
 
बताया जाता है कि ये सारा मसला कुछ महीनों पहले तब से शुरु हुआ है जब से नए हेड ऑफ ऑपरेशंस राहुल कुलश्रेष्ठ ने ज्वाइन किया है। उन्होंने अपनी मोटी तनख्वाह को जस्टिफाई करने के लिये स्टाफ पर होने वाले खर्चे को ही कम करने का फैसला किया है। लेकिन उन्हें क्या पता कि छोटी तनख्वाह वालों को अपनी इज्जत कैसे बचानी पड़ती है?
 
(टीवीटुडे की इंप्लॉयी द्वारा भेजी गयी खबर पर आधारित)

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