यूएनआई को माफियाओं से बचाने के लिए कांग्रेस मुख्यालय पर प्रदर्शन

दिल्ली, 3 मार्च। प्रवासी भलाई संगठन के तत्वाधान में बुद्धिजीवियों, लेखकों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की संयुक्त जनसभा में सैकड़ों लोगों ने कांग्रेस मुख्यालय पर दस्तक दिया। मुद्दे था स्वतंत्र पत्रकारिता की मांग और यूएनआई बचाने का अभियान। इस अवसर पर सड़क पर उतरे लोगों ने देश के कर्णधारों को अभिव्यकित की आजादी की हिफाजत के लिए चेताया। जनसभा को सम्बोधित करते हुए वरिष्ठ नेता और सामाजिक चिंतक विमल त्रिवेदी ने कहा कि उदारीकरण के दौड़ में देश के हुक्मरानों ने जनहित की बेतहाशा उपेक्षा की है। इस वजह से देश की चेतना के निजीकरण की नौबत देखने को मिल रही है। यूएनआई जैसी प्रतिष्ठित समाचार एजेंसी भी आज इसी वजह से भूमाफिया और घोटालेबाजों की गिरफ्त में है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि अगर देश को साम्राज्यवादी शकितयों और साम्प्रदायिकता से बचाना है तो स्वतंत्र पत्रकारिता को बचाना ही होगा।

इस मौके पर प्रवासी भलाई संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अविनाश कुमार सिंह ने कहा कि यूएनआई देश के कमजोर वर्गों की आवाज रही है। एक अर्से से कुछ माफिया तत्व इस प्रतिष्ठित न्यूज एजेंसी को मिटाने के फिराक़ में है। हमारे नेताओं का ही दायित्व है कि देश को दिशा देने वाली समाचार एजेंसी की यथा सम्भव रक्षा करें। लेकिन घोटालेबाज प्रशासकों को महिला उत्पीड़न और दलित उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोपों के साबित होने के बाद भी कोई कारवाई न होने से उनके हौसले बुलंद हैं। हम लोग समाज के हर जागरूक तबके और लोगों से अनुरोध करते हैं कि सच्चे और बहादुर पत्रकारों के पक्ष में एकजुट हों। यह हमारा प्रमुख कर्तव्य होना चाहिए। संगठन के मुखिया ने समाधान में विलम्ब होने पर देशव्यापी आंदोलन छेड़ने का ऐलान करते हुए मुद्दे को जनता की अदालत में ले जाने की घोषणा की है। यूएनआई के वरिष्ठ पत्रकार समरेंद्र पाठक ने कहा कि विडम्बना है कि देश के पहले प्रधानमंत्री पण्डित जवाहर लाल नेहरू के सपने के रूप में समाज को मिली सौगात आज खतरे में है। जिस एजेंसी को राजीव और इंदिरा जी ने अपने प्रयासों से मजबूत बनाया और दुनिया में भारतीय पत्रकारिता को नयी पहचान दी उसके लिए यूपीए की अध्यक्ष सोनिया जी से अनुरोध है कि अपने हस्तक्षेप से घोटालेबाज प्रशासकों की गिरफ्तारी और नए रिसीवर की नियुक्ति सुनिश्चित करें।

वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार कौशल किशोर ने बताया कि एजेंसी के दस्तावेजों से साफ पता चलता है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे के अतिरिक्त लगभग दो दर्जन सांसदों ने इस मसले में रुचि ली है। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के पत्रों और सांसदों के प्रतिवेदनों के बावजूद भी कोई ठोस कदम नहीं लिया गया है। ऐसी दुरुह परिस्थिति में देश की जनता और श्रमजीवी पत्रकारों को सड़क पर उतरने के सिवा कोई और चारा नहीं रह जाता है। जनसभा में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार उपेन्द्र मिश्र, अरविन्द पाठक, वरिष्ठ समाजवादी नेत्री कालिंदी राय ने भी इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे समाजसेवियों और नेताओं के साथ मौके पर मौजूद पुलिस के साथ धक्का-मुक्की भी हुई। यूपीए अध्यक्षा को ज्ञापन देने के बाद जन सैलाब ने दस जनपथ से जंतर-मंतर तक मार्च किया। इस मार्च के दौरान 'देश की धरोहर यूएनआई बचाओ और 'सोनिया जी ध्यान दो-घोटालेबाज प्रशासक को गिरफ्तार करो जैसे नारे लगाये गए।

अविनाश कुमार सिंह
राष्ट्रीय अध्यक्ष,
प्रवासी भलाई संगठन।
मो. 9888188989

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