बीजी वर्गीज़ ने राष्ट्रहित में बलात्कारी सैनिकों को बचाने के लिए कहा था

वरिष्ठ पत्रकार बीजी वर्गीज़ को जम्मू-कश्मीर के एक रिटायर्ड नौकरशाह सैय्यद मोहम्मद यासीन ने एक बयान दे कर विवादों में घसीट लिया है। मोहम्मद यासीन 23 साल पहले कुपवाड़ा के डिप्टी कमिश्नर थे जहाँ सेना के जवानो ने 13 से 60 वर्ष कि 32 महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार किया था। बीजी वर्गीज़ प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया द्वारा घटना की जांच के लिए भेजी गयी टीम के अध्यक्ष थे। टीम ने जांच के बाद सेना के जवानों को क्लीन-चिट दे दी थी।

रविवार को, एक सेमीनार में अपनी तेईस साल लम्बी ख़ामोशी तोड़ते हुए मोहम्मद यासीन ने कहा के प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया की टीम ने उन्हें राष्ट्रहित में सैनिकों को बचाने के लिए कहा था। मोहम्मद यासीन ने आगे बताया कि उन्होंने बीजी वर्गीज़ से कहा 'आपकी आर्मी ने जो कूनान-पोशपोरा में किया, क्या आप उसपे शर्मसार नहीं हैं?' ये सुन कर वर्गीज़ नाराज़ गए और उन्होंने मोहम्मद यासीन और उनके परिवार को धमकी दी। मोहम्मद यासीन ने कहा के विशेष सचिव ने भी उनपर केस ख़त्म करने के लिए दवाब डाला था। लेकिन उन्होंने ऐसा करने से मन कर दिया, इसके बाद उन्हें परेशान करने के लिए उनका बार-बार तबादला किया गया।

रेमन मेगासेसे पुरस्कार से सम्मानित और अपनी गम्भीर लेखनी के लिए पहचाने जाने वाले वरिष्ठ पत्रकार बीजी वर्गीज़ हिन्दुसतान टाइम्स के संपादक रह चुके हैं। सिक्किम अधिग्रहण को लेकर इंदिरा सरकार की आलोचना करने के कारण बिड़ला के स्वामित्व वाले हिन्दुसतान टाइम्स से उन्हे निकाल दिया गया था।      
 

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