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बीएन मण्डल विवि के कुलपति ने हिन्दुस्तान के पत्रकार से मार-पीट की, कैमरा छीना

बिहार के मधेपुरा स्थित बीएन मण्डल विश्वविद्यालय के कुलपति आरएन मिश्रा ने हिन्दुस्तान संवाददाता संजय परमार को अपमानित कर उसका कैमरा छिन लिया। इस सिलसिलेमें मधेपुरा सदर थाना में दोनों ओर से प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है। कुलपति के आदेश से संजय परमार पर परीक्षा की गोपनीयता भंग करने तथा अवैध प्रवेश करने का आरोप लगाया गया है। जबकि पत्रकार के द्वारा दर्ज़ कराई गई प्राथमिकी में  कुलपति पर पत्रकार से गाली-गलौच, मार-पीट, धमकी देने और कैमरा छीन लेने का आरोप लगाया गया है।

बिहार के मधेपुरा स्थित बीएन मण्डल विश्वविद्यालय के कुलपति आरएन मिश्रा ने हिन्दुस्तान संवाददाता संजय परमार को अपमानित कर उसका कैमरा छिन लिया। इस सिलसिलेमें मधेपुरा सदर थाना में दोनों ओर से प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है। कुलपति के आदेश से संजय परमार पर परीक्षा की गोपनीयता भंग करने तथा अवैध प्रवेश करने का आरोप लगाया गया है। जबकि पत्रकार के द्वारा दर्ज़ कराई गई प्राथमिकी में  कुलपति पर पत्रकार से गाली-गलौच, मार-पीट, धमकी देने और कैमरा छीन लेने का आरोप लगाया गया है।

 
भ्रष्टाचार और संस्कार हीनता के लिए बदनाम बीएन मण्डल विश्वविद्यालय अपनी स्थापना के समय से ही चर्चित रहा है। अवांछित तत्वों को रेवड़ी की तरह पद बांट कर कार्य संस्कृति को जहां अपसंस्कृति में बदल दिया गया वहीं परीक्षा तथा अन्य कार्यों में पैसों का खुला खेल हुआ। कई कुलपतियों और विवि अधिकारियों को जेल जाना पड़ा तथा न्यायालय से जमानत लेनी पड़ी। ऐसे लोगों की बदनामी भी हुई, लेकिन अपनी राजनीतिक पहुंच के कारण ऐसे लोग अब भी सक्रिय हैं। इस बदनाम विश्वविद्यालय में लंबी अवधी तक निगरानी विभाग की जांच चलती रही और छात्रों को प्रमाणपत्र देना निगरानी विभाग के बहाने बंद रहा। इस विश्वविद्यालय में अब भी माफिया राज कायम है। कई परीक्षा नियंत्रक, निरीक्षक तथा अधिकारी अपने पुत्र-पुत्रियों का मेडिकल में नाम लिखवाने तथा उन्हें उत्तीर्ण करवाने में सफल रहे हैं।
    
विगत दिनों विश्वविद्यालय के पीजी विभाग के बरामदे में चल रहीं मेडिकल की परीक्षा को कवर करने पहुंचे पत्रकार संजय परमार के साथ कुलपति ने न सिर्फ दुव्यवहार किया गया बल्कि उनका कैमरा भी छीन लिया। इस दिन परीक्षा निर्धारित समय डेढ़ घंटा बिलम्ब से प्रारंभ हुई। आश्चर्य तो यह है कि मेडिकल परीक्षा का प्रश्नपत्र कुलपति का अंगरक्षक बांट रहा था। इसकी तस्वीरें लेते देख कुलपति अपना आपा खो बैठे और अपश्ब्दों का इस्तेमाल कर संजय परमार का कैमरा छीन लिया। बाद में पत्रकार के खिलाफ थाना में शिकायत भी दर्ज करवा दी। पत्रकार को अबतक कैमरा वापस नहीं किया गया है। जिससे मधेपुरा के पत्रकारों में कुलपति के खिलाफ काफी आक्रोश है।
    
सवाल उठता है कि जब परीक्षा कदाचारमुक्त हो रही थी तो तस्वीर खींचने पर कुलपति इतना आग बबूला क्यों हो गये। मण्डल विश्वविद्यालय की कोई परीक्षा बिना विवादों के आज तक नहीं हुई है। यों मेडिकल की परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सरगर्मी के साथ चल रहा है। आर्थिक अपराध ईकाइ इसकी छानबीन भी कर रही है। घटना के दिन ईकाइ की ओर से परीक्षा केन्द्र और परीक्षा विभाग में छापामारी भी की गयी थी और प्रश्नपत्र लीक होने से संबंधित कई मामले और तथ्य पुलिस को मिले हैं। इसमें कुलपति और परीक्षा नियंत्रक की गिरफ्तारी हो सकती है।
    
इस विश्वविद्यालय के कारगुजारियों की लम्बी फेहरिस्त है। इसका अपना प्रेस रहते हुए भी कहीं और से प्रश्न पत्र, अंक पत्र प्रिंट कराये जाते हैं। वहीं बगैर पुस्तकाध्यक्ष के पुस्तकालय चला है और उसमें पुस्तक क्रय करने के नाम पर लाखों रूपये का वारा न्यारा किया गया है। अंकपत्र और परीक्षा परिणाम के नाम पर छात्रों का शोषण होना पुरानी प्रथा है। यह सब कुलपति के जानकारी में होता रहा है। लेकिन कुलपति अपना शेखी बधारते रहे हैं और विश्वविद्यालय की कारगूजारियों को प्रकाशित करने पर पत्रकारों पर अपना खीज निकालते नजर आते हैं। विधि विधान को ताक पर रख कर मूगलिया फरमान निकाल कर शासन करने वाले इस कुलपति की उच्च न्यायालय में फजीहत हो चुकी है।  
        
मधेपुरा
विश्वविद्यालय का दुर्भाग्य है कि यहां कुलपति के तौर पर एक-दो लोगों को छोड़कर कोई विद्वान और काबिल कुलपति पदस्थापित नहीं हो सका। अधिकांश छंटूआ लोग राजनीतिक आकाओं के बल पर कुलपति बनते रहे हैं। फिलहाल(अपने पाठ्य विषय को छोड़कर) अल्पज्ञानी आरएन मिश्र कुलपति बने हुए हैं। सहरसा से आने वाले इस सज्जन को मधेपुरा में विष्वविद्यालय स्थापित होना अच्छा नहीं लग रहा है। इनकी मान्यता है कि मधेपुरा के बजाय सहरसा में विश्विद्यालय होना चाहिए था। इनका तर्क है कि मधेपुरा चूंकि सहासा जिला से कट कर बना है। इसलिए विश्वविद्यालय वहीं होना युक्ति संगत है। ऐसा उन्होंने डॉ. जगन्नाथ मिश्र के पिता आरएन मिश्र के स्मरण में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था। जबकि इस अल्पज्ञानी को यह मालूम ही नहीं है कि सहरसा एक अप्रैल 1954 से पूर्व मधेपुरा अनुमण्डल का हिस्सा था। मधेपुरा सैकड़ों वर्षों तक सहरसा का अनुमण्डल मुख्यालय रहा है और यादवी आक्रामकता के कारण ही ब्राह्मण राजनेताओं के द्वारा सहरसा को मधेपुरा का जिला बना दिया गया था। जनांदोलन के बाद 9 मई 1981 को मधेपुरा जिला बन पाया। लेकिन तब तक सहरसा को प्रमण्डल बना दिया गया। इसकी भरपाई मधेपुरा में विश्वविद्यालय देकर की गयी।
    
फिलहाल
मधेपुरा के पत्रकार तुगलकी कुलपति के खिलाफ एकत्रित हो गए हैं और चुनाव के बाद इनके खिलाफ आन्दोलन चलाकर विश्वविद्यालय का शुद्धिकरण का मन बना लिया है। वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ बिहार के प्रदेश महासचिव डा. देवाशीष बोस, अध्यक्ष तथा हिन्दुस्थान समाचार अभिकरण के राज्य प्रभारी शशि भूषण प्रसाद सिंह, उपाध्यक्ष आरएन सिंह ‘रौशन’, सचिव तथा रफ्तार टाईम्स न्यूज के बिहार-झारखण्ड के प्रभारी मोहन कुमार, सचिव अभिजीत पाण्डेय तथा संगठन सचिव सुधीर मधुकर ने बीएन मण्डल विशश्वविद्यालय के कुलपति आरएन मिश्र के हिन्दुस्तान के पत्रकार संजय परमार के खिलाफ अशोभनीय हरकत की मुखालफत करते हुए घटना की निन्दा की है। सभी ने पत्रकार के खिलाफ हुए मुकदमे को समाप्त कर कुलपति की गिरफ्तारी की मांग की है।

 

मधेपुरा से सपना बोस की रिपोट।
 

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