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साप्ताहिक वीकएंड टाइम्स का दसवें वर्ष में प्रवेश, गोष्ठी का आयोजन

उत्तर प्रदेश के प्रमुख साप्ताहिक समाचार पत्र वीकएंड टाइम्स ने अपने दसवें वर्ष की शुरआत होने पर राजनीति और मीडिया विषय पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें देश भर से आये पत्रकारों ने राजनीति और मीडिया के घालमेल पर चिंता जताते हुए पत्रकारों से अपने पेशे में ईमानदारी लाने की बात पर बल दिया। देश भर में मीडिया के सामने आ रहे ज्वलंत मुद्दों पर पत्रकारों ने अपनी राय रखी।

उत्तर प्रदेश के प्रमुख साप्ताहिक समाचार पत्र वीकएंड टाइम्स ने अपने दसवें वर्ष की शुरआत होने पर राजनीति और मीडिया विषय पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें देश भर से आये पत्रकारों ने राजनीति और मीडिया के घालमेल पर चिंता जताते हुए पत्रकारों से अपने पेशे में ईमानदारी लाने की बात पर बल दिया। देश भर में मीडिया के सामने आ रहे ज्वलंत मुद्दों पर पत्रकारों ने अपनी राय रखी।

                                 द्वीप प्रज्ज्वलित करते जनसत्ता के संपादक ओम थानवी

लाइव इंडिया के संपादक और बीईए(ब्रॉडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन) के सचिव एनके सिंह ने कहा कि लोग मीडिया को बदनाम करने के लिए आरोप लगा रहे है कि मीडिया को बड़े कार्पोरेट घराने खरीद रहे है जबकि देश के किसी भी घराने की इतनी हैसियत नहीं है कि वो मीडिया को खरीद ले। उन्होंने कहा कि देश की मीडिया गंभीरता पूर्वक अपनी जिम्मेदारी का निर्वाहन कर रही है और खुद ही अपनी कमियों को दूर कर रही है।

न्यूज़24 के संपादक अजित अंजुम ने कहा कि अब मीडिया पर आरोप लगाना फैशन सा हो गया है। सरकार अपने खिलाफ कुछ सुनना पसंद नहीं करती। कभी सैफई में डांस दिखाने पर न्यूज़ चैनल बंद करा दिए जाते है तो कभी पंजाब की सरकार भी अपने खिलाफ खबर देख कर चैनल बंद करा देती है। यह लोकतंत्र के लिए बड़ी गम्भीर स्थिति है।

जनसत्ता के संपादक ओम थानवी ने कहा कि अब जिसके खिलाफ खबर लिखो वो मीडिया के बिकाऊ होने का आरोप लगा देता है। हकीकत यह है कि पत्रकारिता जैसे ईमानदार पेशे को भी अब आरोप के घेरे में रखने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा प्रभाष जोशी जी जिस पेड़ न्यूज़ के खिलाफ अभियान चलते रहे वो अभियान फिर शुरू करने की जरुरत है। मीडिया में पूंजीपतियों का दखल एक गम्भीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा 9 सालों तक बिना सरकारी मदद के वीक एंड टाइम्स जैसा अखबार निकालना एक सफल प्रयोग है और इस प्रयोग को दूसरे राज्यों में भी दोहराना चाहिए।

भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह ने कहा कि कार्पोरेट घरानो के दवाब में खबरे किसके लिए क्यों की जा रही है और क्यों रोकी जा रही है यह सब समझने लगे हैं।उ न्होंने कहा कि यह बदलते हुए समाज की बदलती हुई तस्वीर का नया रूप है, जहाँ सोशल मीडिया एक नए रूप में हम सबके सामने है। सोशल मीडिया के इस दबाव ने बड़े मीडिया घरानो को भी चिंता में डाल दिया है।

श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के अध्यक्ष के विक्रम राव ने कहा कि देश में मीडिया के सामने बड़ा संकट खड़ा है क्योकि इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे है। उन्होंने कहा कि राजनीति और मीडिया के बीच महीन रेखा होती है और उसका उलंघन नहीं किया जाना चाहिए। राज्यसभा टीवी चैनल के संसदीय कार्यक्रम के हेड अरविन्द सिंह ने कहा कि कोई कितना भी आरोप लगा ले मगर हकीकत यही है कि लम्बे समय से मीडिया खुद अपना आंकलन करके ख़बरों को लगातार बेहतर बना रही है।

कार्यक्रम के आयोजक वीकएंड टाइम्स के संपादक संजय शर्मा ने कहा कि राजनेताओं से संबंध होने के बाबजूद पत्रकारों को यह ध्यान रखना चाहिए कि राजनेताओं का प्रभाव उनकी पत्रकारिता में दखल ना दे। उन्होंने कहा कि सरकारों से ज्यादा लाभ लेने की चाहत ने पत्रकारिता को बहुत नुकसान पहुंचाया है।

                              बीईए(ब्रॉडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन) के सचिव एनके सिंह

                                              न्यूज़24 के संपादक अजित अंजुम

                                           पूर्व केंद्रीय गृह राज्य स्वामी चिन्मयानन्द

                                      (बांए)वीकएंड टाइम्स के संपादक संजय शर्मा

                                             वीकएंड टाइम्स के विशेषांक का विमोचन

                                                सूफी गायन पेश करते मुनव्वर मासूम

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व केंद्रीय गृह राज्य स्वामी चिन्मयानन्द ने मीडिया की निष्पक्षता को हर हालत में बनाये रखने की जरुरत पर बल दिया। कार्यक्रम को प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त प्रदीप यादव, सीपी राय, मधुकर जेटली ने भी संबोधित किया। सपा के राष्ट्रीय महासचिव अशोक बाजपेई ने भी मीडिया के ईमादार रहने की वकालत की। कार्यक्रम में वीकएंड टाइम्स के विशेषांक का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम में उलेखनीय पत्रकारिता के लिए दस पत्रकारों को भी सम्मानित किया गया।

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