मान्यवर यशवंत जी, मैंने वर्ष 2008 में डीएलए के साथ अपने करियर की शुरुआत गाजियाबाद से की थी. दो वर्ष के बाद मोदीनगर में मेरे विरोधियों ने मेरी आफिस में ताले कटवा कर चोरी करा दी. इसके बाद मेरे पास संसाधनों की कमी के चलते गाजियाबाद के संपादक राज कौशिक जी मेरे होते हुए किसी और को काम करने के लिए कह दिया. और तो और मेरे आफिस में चोरी की खबर को मेरे ही अखबार ने मात्र पांच लाइनों में ख़तम कर दिया.
इसके चलते मुझे आगरा आने के लिए मजबूर होना पड़ा, `कहते हैं की आपने घर की बात किसी को नहीं बतानी चाहिए, मगर बात बता देने से मन हल्का जो हो जाता है`, इसलिए अपना समझते हुए बता रहा हूँ. 29 जून 2009 में मेरी शादी हो गयी, उसके बाद 12 अगस्त को मेरे छोटे भाई की सड़क दुर्घटना ने टाँगे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण उसको आगरा के जीजी अस्पताल में रखना पड़ा. पूरे पांच महीने के इलाज के बाद उसको दो बार और भर्ती करना पड़ा. इस दौरान उसे 28 यूनिट ब्लड और 3 यूनिट प्लेटलेट के जम्बो पैक की जरूरत पड़ी. ऐसी दुख की घड़ी में परिवार के साथ रहना जरूरी था, इस कारण मैं मोदीनगर नहीं जा सका.
जब दिसम्बर के लास्ट में मेरी खबर भेजने वाले मेरे ही एक साथी ने मेरठ के संपादक सुनील छेयाँ जी से मिल कर मोदीनगर में डीएल का सुबह का अख़बार मांगने लगा, जब एक ही शहर में एक ही नाम के दो अखबार सुबह और दोपहर में आने लगे तो आप खुद ही मेरा दर्द समझ रहे होंगे. इस दौरान मैंने अजय अग्रवाल को भी स्थिति से अवगत कराया और आपको एक मेल भी किया था कि डीएल की कोई खबर नहीं क्या? सर तो आपके पोर्टल पर खबर आई कि हिंदुस्तान से पीलापन और डीएलए से सुबह गायब. मैं बुरी तरह से तनाव में आ गया मॉर्निंग अखबार के बंद होने के बाद मेरा साथी अभी चुप नहीं बैठा और मेरे हाथ काटने के लिए मेरी ऑफिस में ताले कटवा कर चोरी करवा दी. अब मेरे पास का कम्पूटर, इंवर्टर और कैमरा के साथ अन्य सामान चोरी चला गया.
इस दौरान मैं आगरा आकर हिंदुस्तान में विज्ञापन विभाग में नौकरी शुरू कर दी. यह नौकरी भी ज्यादा दिन न चल सकी, या फिर यूँ कहिये कि मेरे दुखों का समय अभी ख़तम नहीं हुआ. हालत इतने ख़राब हो गये की अपनी पत्नी का प्रसव एक ब्लॉक लेवल के सरकारी अस्पताल में कराना पड़ा. घर में पिता का सारा रुपया भाई के इलाज में ख़त्म हो गया. मेरी कुछ जमा पूँजी भी भाई के इलाज में चली गयी. अब बेटे तबीयत ख़राब होने के चलते मुझे आगरा के कई मीडिया सेंटरो की नौकरी गंवानी पड़ी और आज मेरे बेटे यश की हालत पा फिल्म के जैसी है, जिसको सभी डॉक्टरों ने सिजेरिया का मरीज बताया है जिसका इलाज पूरी दुनिया में कहीं नहीं. अब ऐसे में न तो मेरे पास कोई नौकरी है और न कोई व्यवसाय. आज मुझे नौकरी की सख्त आवश्कता है. 24 जनवरी में आपके अपने पाठकों के प्रति संवेदना को देखते हुए यह मेल भेज रहा हूँ. आपसे केवल दो विनती है पहला यह मेल प्रकाशित करने के लिए नहीं है और दूसरा मेरी आगरा में किसी मीडिया सेंटर में नौकरी लगवाने के लिए एक अपील है.
आज में आगरा में किराये का रूम होने के बाबजूद मुझे आर्थिक तंगी के चलते अपने गांव में रहना पड़ रहा है. बेटे की हालत यथा बनी हुई है. अब तो बस आपका ही एक सहारा है, इसय गुमनामी कि जिन्दगी से मजबूर हूँ. मुझे केवल एक नौकरी दिलवाने की मेहरबानी करो भाई. इसलिए मैं अपना आत्म विवरण भी भेज रहा हूँ. मेरे दुखों का समय अभी खतम नहीं हुआ है. 18 मार्च को मां और भाई एक सड़क हादसे में घायल हो गए. मां को काफी चोटें आई हैं. मां का ऑपरेशन भी दो दिन में होने वाला है. अब मुझे मदद की आवश्यकता है. आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास करता हूँ आप पर! आपकी मेल या फोन का इन्तजार बड़ी बेसब्री के साथ करूंगा. धन्यवाद
कृष्ण मुरारी सिंह
मोबाइल नम्बर – 9927012195












arvind singh
March 23, 2011 at 3:38 pm
shri yashwantaji sadar pranam,
aapake portal par ek patrakaar bhai ki dukha bhari kahani padhakaar bahut kasta hua,aur usase jyaada is baat ko lekar kasta ho raha hai ki aap apani hi baat par kayam nahi hai, jab us patrakaar ne saaf-saaf likha diya hai ki usaki yah dukha bhari kahani portal par prakashit karane ke liye nahi bheji gai hai tab kyu aapane usake dukha ka is tarah se majaak udaya hai, jab ki aap apane portal par likhate hi ki agar koi kahega to usaka patra gopaniya rakha jaayegam are bhai aap aakhir kya batana chahate hai ya kya sabit karana chahate hai, agar aapako us patrakaar ki bato me koi sandeh ya gadabadi dikhai de rahi thi to mat karate usaki koi madat,lekin is tarah kisi ki peeda ka prakashan karana kaha ki insaaniyat ya fir budhimatta hai, yashwant ji me aapaki bahut ijjat karata hu,lekin kabhi-kabhi apaki kisi socha ya kisi kaam ko dekhakar bhramit ho jaata hu. muze bhi aapake is tarah ke kartab ka anubhav hua hai, isi liye majboor hokar yah sab likha raha hu. mene bhi ek baar apani peeda aapako likhi thi aur aapane meri pareshaani ki parwaah na karate huye usame mere naam ka ullekha kar use prakashit kar diya tha. yashwant ji aapake portal par jis tarah desha bhar ke akhabaaro ke sandarbha me ya patrakaaro ke sandarbha me khabare prakashit hoti hai,unhe dekha kar to yahi lagata hai ki aapake paas akhabaar jagat ki tamaam jankaariya hai, to fir kisi ke leha ya peeda par appako kahi koi duwidha ya sandeha ho to aap apane logo se usaka satya pan karawakar hi use prakashit kare ya agar aapako koi baat galat lage to use apane tak hi rakhe jisase kisi ko na to koi pareshaani ho aur nahi kisi ki peeda ka isatarah se majaak ude. apaka chhota bhai
arvind singh
March 23, 2011 at 3:49 pm
yashwant ji apake paas bahut bada madhyam yah portal hai,jisake dwaara aap patrakaar biradari ke liye itana badi aasaani se kar sakate hai ki unaka jameer jaga dijiye,jisase o kam se kam apane mool bhoot adhikaaro ki ladai lad sake aur isa baar majidhiya ayog ki report apane hak me sarkaar se lagoo karawa le to sacha me muz jaise nirih patrakaar ka jaroor bhala ho jayega, sacha me itana kam wetan milata hai ki mumbai jaisi ngariya me rahana ab bahut hi jyaada muskil ho gaya hai, aur upar wale ki mehar baani se apane koi mai baap bhi nahi hai, jaha se kuchha tatha kathit jugaad ho sake, bhai sahab sirf wetan par ashrit patrakaar hu,ha ek alag se kamara hai,jisaka kiraya milata hai to usase jaroor thodi madat ho jaati hai,nahi to wetan to maheene bhar ke liye poora bhi nahi ho paata. bhai sahab akele aadami par ghar ke 13 logo ki jimmedari hai, jisame ek bewa bahaan aur usake 3 bache aur ek berojgaar bhai,jisake 4 bache hai aur meri patni aur me hu, bhai sahab mere khud ke bache nahi hai nahi to agar unaka bhi kharcha dekhana padata to kab ki atmahatya karani padati. isaliye haatha jodakar prarthana kar raha hu ki duniya bhar ka satta lene wale patrakaar bhaiyo bina kisi laag lapet ke apane aham aur swartho ko darkinaar rakha kaar agar sacha me apame koi madda hai to ek baar apani ladai lad kar majithiya ayog ki sifarishe laagoo karawa lijiye to kam se kam mere jaise patrakaar to do chhar saal aur ji jayege.
pramod yadav_output head,azad news
March 23, 2011 at 4:21 pm
are murari patrkar hoke bhik mangte ho rupay ki itni jarurat hai to kisi chay ke dukan me kiyo nahi kam kar lete.ye yashwant ko bhi kiya ho gaya hai bhikhriyo ko bhi apne portal me jagai.de deta hai.
veer chauhan
March 23, 2011 at 7:45 pm
अरे यशवंत जी ये अनर्थ किया है आपने इस मेल को भेजने वाले ने आपसे विनती की है कि आप ये मेल ना प्रकाशित करें लेकिन फिर भी आपने इसे प्रकाशित कर दिया…आज मैं इस इंसान को नौकरी तो नहीं दे सकता लेकिन हां आपसे ये गुज़ारिश ज़रुर करूंगां कि इस मेल को हटा दें किसी की बद्दुआ लेना ठीक नहीं है ।
rajkumar
March 24, 2011 at 8:49 am
sabhi media maliko ka yahi hall hoga.our wo bhi waqt ane per sab ko
pata chal jayga.
cs shastri
March 24, 2011 at 4:38 pm
krishnmurari
jab kam chahiye delhi aa jana
ham bahut bade media house to nahin hain lekin jaise bhi hain, tumhen sahayog karenge
c s shastri
09013894604
cs shastri
March 24, 2011 at 4:43 pm
कृष्ण मुरारी
जब वास्तव में काम करने का मन करे, दिल्ली आ जाना
हम बहुत बड़े मीडिया हाउस तो नहीं हैं, लेकिन जैसे भी हैं, तुम्हें सहयोग करेंगे।
चंद्रशेखर शास्त्री
संपादक
मीडियाटुडे
09013894604
veer chauhan
March 25, 2011 at 7:51 pm
अबे चूतिये प्रमोद यादव नाम के धरती के बोझ साले तू भी भिखारी बनने वाला है चिंता मत कर साले वालिया और उसकी बेटी तानिया को तेरी करतूतों के बारे में बता दिया है साले सड़क पर आकर भीख भी मांगेगा ना तो लोग थूकेंगे तुझ पर किसी मजबूर का इस तरह मजाक बनाता है बेशर्म ख़बीज़ की औलाद थू है तुझ पर
Prem Arora 9012043100
March 26, 2011 at 7:56 am
written by pramod yadav_output head,azad news, March 23, 2011
are murari patrkar hoke bhik mangte ho rupay ki itni jarurat hai to kisi chay ke dukan me kiyo nahi kam kar lete.ye yashwant ko bhi kiya ho gaya hai bhikhriyo ko bhi apne portal me jagai.de deta hai.
उपरोक्त टिप्णी बहुत ही अशोभनीय है…आप आजाद न्यूज़ के आउट पुट हेड हैं…जो पैसे लेकर अपनी आई डी वेच रहा है आज कल आदरनीय यह भड़ास फॉर मीडिया आम पतरकार के लिए एक बहुत बड़ी आशा की किरण है. इस लिए हर पत्रकार सोचता है की..शयद कोई तुरंत वाली रहत यहाँ मिल जाएगी. आप एक बात याद रखें..मैंने अछे आचे आउट पुट इनपुट और डेस्क वालों को देखा हुआ है जो बड़ी कारों से आते थे… आज उनके पास ऑटो के पैसे भी नहीं होते… डेल्ही में डी टी सी की बस या मेट्रो का इंतजार कर रहे होते हैं… मेरा आपसे करत्व निवेदन है की एक पत्रकार को भिखारी कहने पर आपको इस पोर्टल पर माफ़ी मंगनी चाहिए…. आपको महसूस होंगा चाहिए की आम आदमी की वेदना क्या है… कॉर्पोरेट के हाथों की कथ्पुतिली पत्रकारिता और उसका दर्द क्या जाने… आज आप जैसे आउट पुट हेड हैं और ऐसे भावना आपने व्यक्त की है.. आप जहाँ भी जायेंगे वही का डिब्बा गोल करेंगे ऐसा मेरा मानना है…क्यों जो सवेदनशील नहीं है वोह पत्रकार नहीं है…क्षमा प्रार्थी हूँ पर आपकी बात का बुरा लगा