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सुभाष मिश्र पर गिरी गाज, इंडिया टुडे प्रबंधन ने विशाखापट्टनम किया तबादला

लखनऊ से खबर आ रही है कि इंडिया टुडे के सीनियर एडिटर सुभाष मिश्र पर गाज गिर गई है. उन्हें संस्थान से बाहर निकाले जाने की तैयारी थी लेकिन कई तरह के जुगाड़-दबाव के कारण इंडिया टुडे प्रबंधन ने उनका तबादला विशाखापट्टनम कर दिया है. सुभाष मिश्र को 22 मार्च को विशाखापट्टनम में कार्यभार ग्रहण कर संस्थान को रिपोर्ट करना था लेकिन वे अभी लखनऊ में ही हैं. बताया जा रहा है कि पत्नी के स्वास्थ्य कारणों से वे लखनऊ छोड़ पाने की स्थिति में फिलहाल नहीं हैं.

लखनऊ से खबर आ रही है कि इंडिया टुडे के सीनियर एडिटर सुभाष मिश्र पर गाज गिर गई है. उन्हें संस्थान से बाहर निकाले जाने की तैयारी थी लेकिन कई तरह के जुगाड़-दबाव के कारण इंडिया टुडे प्रबंधन ने उनका तबादला विशाखापट्टनम कर दिया है. सुभाष मिश्र को 22 मार्च को विशाखापट्टनम में कार्यभार ग्रहण कर संस्थान को रिपोर्ट करना था लेकिन वे अभी लखनऊ में ही हैं. बताया जा रहा है कि पत्नी के स्वास्थ्य कारणों से वे लखनऊ छोड़ पाने की स्थिति में फिलहाल नहीं हैं.

सूत्रों के मुताबिक प्रभु चावला के विदा होने के बाद अब उन लोगों पर गाज गिराई जा रही है जो प्रभु चावला के खास थे और कई तरह की शिकायतों के बावजूद अपने पद व शहर से टस से मस नहीं हो रहे थे. सुभाष मिश्र करीब 1995-1996 में इंडिया टुडे के हिस्से बने थे और उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. लखनऊ में सत्ता के गलियारों में सुभाष की खूब धमक है. पहले वे सिर्फ इंडिया टुडे हिंदी के लिए लिखते थे लेकिन प्रभु चावला की कृपा से उनका नाम अंग्रेजी में भी जाने लगा था. देखना ये है कि सुभाष विशाखापट्टनम से रिपोर्टिंग शुरू करते हैं या इंडिया टुडे त्यागकर लखनऊ में ही किसी और संस्थान को ज्वाइन करते हैं.

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0 Comments

  1. Manish Mishra

    March 28, 2011 at 12:58 pm

    दो करोड़ की कोठी ऐसे ही नहीं बन जाती है जनाब. इंडिया टुडे वालो को भी पता चल ही जाता है. अब इमानदार लोगो कि तलाश है इंडिया टुडे वालो को, वो किनारे लगाये जा रहे है जिन्होंने लम्बी कमी कि है.

  2. j.adam

    March 29, 2011 at 8:47 pm

    really? shocking. if your report is true then india today took 15 long years to rcognise subhash mishra’s “hidden talent and hidden wealth”. now the management must have realising his hidden power to stay in job may be due to his political and bureaucratic godfathers. Beauty of journalism as a profession is that while journalists can ‘expose’ others nobody or institutons can expose ‘honest journalists’ like subhash mishra. what you can do? ask your readers to suggest ways how to expose the likes of subhash and measures to weed them out to restore credibility of the profession.

  3. amitvirat

    March 30, 2011 at 5:45 am

    bhai aaj ke yug mein kisi ko imaandar nahin choron ki zarurat hai imandar logon ko to koi snasthan bardast hi nahin karta. chaoro, dalalon ki sabse badi mandi ban gai hai media

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