जी हां! जबसे सिलीगुड़ी की इकाई शुरू हुई, तबसे लेकर और ज्ञानेश्वर पांडेय जी के जाने तक की स्थिति तो यही बयां कर रही है। दरअसल, दैनिक जागरण के सीनियर खेमा यानी सीधे तौर पर यह कहा जाये कि जीएम बनाम मुख्य संपादक के बीच की अंदर की लड़ाई की बलि का बकरा वहां जाने वाला हर संपादकीय प्रभारी बना है, जैसा कि सूत्र बताते हैं।
एक वरिष्ठ सूत्र ने बताया कि दैनिक जागरण के प्रबंधन के कारण सिलीगुड़ी जागरण की यह स्थिति हुई है, क्योंकि वहां की व्यवस्थाएं स्थानीय प्रबंधक शुभाशीष जयहलदर जी की अंगुलियों की पुतली है। चूकी हलदर जी पर महाप्रबंधक आनंद त्रिपाठी का हाथ है, इसलिए कुछ चाहकर मुख्य संपादक शैलेंद्र दीक्षित कुछ नहीं कर पाते हैं। आनंद त्रिपाठी इसलिए जयहलदर पर मेहरबान हैं कि चलो कोई तो यूनिट है, जो सालाना लक्ष्य पूरा करती है और कुछ सेवा-सुसुरका हो जाती है।
वहां अगर आप जाकर देखें, तो साफ हो जायेगा कि प्रबंधकीय टीम की तुलना में संपादकीय टीम कहां है। यदि कोई प्रबंधकीय टीम में बहाली होती, तो वह एक अच्छे पैकेज में होती है, जबकि संपादकीय में ऐसी नहीं है। संपादकीय प्रभारी यदि कुछ विशेष करने की कोशिश करते हैं, तो महाप्रबंधक के सहयोग से उसे बीच में उड़ा दिया जाता है। एक-दो छोटी-मोटी बातों से संपादकीय प्रभारियों को उनकी औकात इशारों में समझा दी जाती है, जिससे आगे वह बड़ा कदम नहीं उठा पाते हैं।
इसी तरह की व्यवस्थाओं से ऊब चुके धीरेंद्र श्रीवास्तव की भाग्य अच्छी रही कि उनका तबादला उसी ओहदे पर मुजफ्फरपुर कर दिया गया। इस इकाई को लांच कराने का श्रेय इन्हीं को जाता है। इसके बाद झारखंड के दिग्गज पत्रकार देवेंद्र सिंह को वहां कमान सौंपी गयी। वहां पर उन्होंने शुरुआत अच्छी की और सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था कि प्रबंधन से अनबन हो गयी। तबीयत खराब होने के कारण उनका तबादला रांची कर दिया गया, लेकिन सिलीगुड़ी का ओहदा नहीं मिला, लेकिन इससे उनको नुकसान नहीं हुआ, क्योंकि वहां से एक बड़ा ही ओहदा उनका खुद जमाया हुआ फील्ड मिल गया।
अब ज्ञानेश्वर पांडेय की बारी आयी। सूत्र बताते हैं कि वहां का प्रभार सौंपे जाने के वक्त खुद माननीय शैलेंद्र दीक्षित, महाप्रबंधक आनंद त्रिपाठी भी मौजूद थे। इन पदाधिकारियों ने सार्वजनिक तौर पर घोषणा की कि ज्ञानेश्वर जी व्यवस्थाओं को लेकर थोड़े कड़क हैं। ऐसी स्थिति में ज्ञानेश्वर जी ना चाहते हुए अपने रूख को बनाये रखे, चूकी सार्वजनिक रूप से जो उनका तगमा देते हुए कड़ा रूख अपनाने का निर्देश दे दिया गया था। यदि वह ऐसा नहीं करते तो अपने सहयोगियों के बीच नजर से गिर जाते। अब जब कर्मचारियों पर इसका विपरीत असर पडऩे लगा और भगदड़ मची तो स्थानीय प्रबंधन ने ठिकारा फोड़ दिया उन पर, जबकि भाग रहे कर्मचारियों को रोकने के लिए उन्होंने काफी कोशिशें कीं, लेकिन प्रबंधकीय व्यवस्था के कारण एक भी सदस्य वहां रुकने के लिए तैयार नहीं था। अब जब ज्ञानेश्वर जी ने वहां से पद छोड़ दिया है, तो कुछ यक्ष प्रश्न भी छूट गये हैं…
1. साप्ताहिक छुट्टियों में काम करने वाले कर्मचारियों को क्या मिलेगा, क्योंकि छुट्टियां तो संग्रहित होती नहीं हैं।
2. क्या 12 से 14 घंटे के कार्य से मुक्ति दिला पायेंगे नये संपादकीय प्रभारी?
3. क्या एक घंटा भी अधिक काम करने पर प्रबंधकीय टीम की तरह संपादकीय टीम को खाने-पीने की व्यवस्था होगी?
4. क्या सीएल को आगे बढ़ाने या छुट्टी देने पर विचार होगा?
5. क्या अन्य यूनिटों की तरह वहां पर कर्मचारियों को जागरण के कर्मचारी होने का बिल्ला लगा पायेंगे नये संपादकीय प्रभारी?
6. क्या शैलेंद्र दीक्षित और आनंद त्रिपाठी यह सुनिश्चित करा पायेंगे कि नये संपादकीय प्रभारी को बीते दौर से नहीं गुजरना होगा..आदि….आदि?
किसी ने अपने दिल की भड़ास निकालकर भड़ास4मीडिया के पास मेल के जरिए प्रेषित किया है. इसे यह मानकर प्रकाशित किया जा रहा है कि तथ्यों में कमी-बेसी या हेराफेरी की गई होगी, आग्रह-दुराग्रह झलक रहा होगा. पर, किसी के दिल-दिमाग की बात को सुना-पढ़ा जाना चाहिए. और, हिसाब बराबर करने के लिए नीचे दिया गया कमेंट बाक्स तो है ही.












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March 31, 2011 at 6:33 pm
1. साप्ताहिक छुट्टियों में काम करने वाले कर्मचारियों को क्या मिलेगा, क्योंकि छुट्टियां तो संग्रहित होती नहीं हैं।
2. क्या 12 से 14 घंटे के कार्य से मुक्ति दिला पायेंगे नये संपादकीय प्रभारी?
3. क्या एक घंटा भी अधिक काम करने पर प्रबंधकीय टीम की तरह संपादकीय टीम को खाने-पीने की व्यवस्था होगी?
4. क्या सीएल को आगे बढ़ाने या छुट्टी देने पर विचार होगा?
aishi samsya kai akhbaro me hai……..;)
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April 1, 2011 at 8:31 am
aarmy wale kitne ghante kam karte hain???
police wale ki duty kya hoti hain….jara unke ghar ja kar unke bibiwo ke kv intervew lekar news banawo….
sala pure media house me patrkaro ka shoshan….
kisne kaha media me naukri kro…..
baniye ki dunkan me kamayee v hain izaat v…..
eslhy silli gudi ke patrakaro chinta choro… jo hosiyar se nikal gye…. tumlog v nikal jawooo….. mauka nahi hain to mauka talaso…
ab chahoge ki silliguddi me hi malayee kayen to kuch to kimat chukani padegi… esase achha delhi mumbai ya kahi aur struggele karo aage nikal jawoge…
ha ha ha ha ha ha hah ha ha h h;D